आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रवचन PV02-0014 · भाग 2

सांसों पर ध्यान आराम है, यात्रा नहीं — ध्यान मत सिखाओ, काम करने का तरीका सिखाओ

14 जून 2026 · ध्यान कैसे करें । ध्यान कैसे करते हैं ।ध्यान मे ध्यान । #yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान

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मुख्य बातें

कब तक धोखा दोगे

मां अपने ही बच्चे को दूध बेचे, तो उस मां को क्या कहोगे? मेरी समझ से वो मां नहीं हो सकती। अगर पक्की मां होगी तो अपने बच्चों को दूध नहीं बेचेगी। हां, ये हो सकता है कि बच्चों को धोखा देने के लिए उसने बनावटी दूध लगा लिया हो और पिला रही हो। लेकिन जिस दिन वो बच्चे बड़े होंगे, उन्हें भी पता चल जाएगा — कभी ना कभी तो पता चलेगा।

ये देखो, ये पिल्ला है। कल हमने इसे चिक्की दी, फिर वो मीठा फ्रूट वाला दिखाया, तो वो पहला छोड़ के तुरंत आ गया। मतलब इसको भी ज्ञान है कि ये माल बढ़िया है। वो जानवर है, उसे भी पता चल जाता है। तो आज नहीं तो कल पता चल जाएगा। कब तक लोगों को धोखा दोगे? कभी ना कभी सच्चाई सामने आएगी। कागज के फूलों से कब तक सेंट मारते रहोगे?

सांसों पर ध्यान — आराम है, यात्रा नहीं

आज आदत हो गई है कुछ करने की। कोई कह रहा यहां ध्यान करो, कोई कह रहा वहां करो, कोई कह रहा सांसों पर करो — यह हालत है। आप सांसों पर कितना भी ध्यान करो, आप मन को बहिर्मुखी जाने नहीं दोगे, अचेतन मन में जाने नहीं दोगे; सांसों के द्वारा यहीं केंद्रित कर लोगे। लेकिन उठोगे तो कहां जाओगे? जहां थे, वहीं ना। काश छुड़ाने का काम करते! लेकिन आपने विधि द्वारा जबरदस्ती रोक दिया। उठे तो आप वहीं गए, और सालों से यही हो रहा है आपके साथ।

एक समय ऐसा आएगा कि जिस शरीर के द्वारा विधि कर रहे थे, उस शरीर का काम करना कम हो जाएगा। आप वो विधि भी सही तरीके से नहीं कर पाओगे, और तब पछताओगे कि ये मैंने क्या कर दिया।

उसमें होता क्या है? बॉडी रिलैक्स होती है। वो तो बस में यात्रा करो तो झपकी आती है, तब भी रिलैक्स होती है; सोने के बाद भी रिलैक्स होती है। आप ध्यान के नाम से आराम कर रहे हो। ऐसा ना करो। अपने आप को छुड़ाओ, काम करो, मेहनत करो।

मैं प्रयोग करके बोल रहा हूं, ऐसे ही नहीं बोल रहा। मैंने भी इसका प्रयोग किया है। एक-आध घंटे ऐसे केंद्रित करके बैठ जाओ, तो लगता है शरीर है ही नहीं। अच्छा लगता है, स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा है — लेकिन फिर उठते हैं तो वही पाते हैं। आपको तो यात्रा करनी है। इसलिए जीवन में सोच-समझ के आगे बढ़ो।

मतलब कभी नहीं बदलता

ध्यान के बारे में जब भी इस दुनिया में बोला जाएगा, तो बोलने के तरीके अलग हो सकते हैं, लेकिन बोलना तो वही पड़ेगा जो है। इस पत्ते के बारे में जब भी पृथ्वी पर बोला जाएगा, तो इस पत्ते के बारे में ही बोला जाएगा। समझाने का सरल तरीका आप ला सकते हो, लेकिन समझाना तो वही पड़ेगा जो है; आप उसमें कुछ मिला नहीं सकते।

पहले नदियों से पानी पीते थे, फिर तालाब से, फिर कुएं से; फिर गांव-गांव में दरवाजे पर नल लगा, अब घर-घर में, कमरे-कमरे में नल लग गया। लेकिन मतलब तो एक ही है — पानी पीना, प्यास बुझाना, स्वास्थ्य। पानी आपके कमरे तक आ गया, पर मतलब नहीं बदला। मतलब आप कभी नहीं बदल सकते — ये ध्यान रखना।

ध्यान बचपन से हर काम में है

ध्यान तो हमें बचपन से दिया जा रहा है। 'मां, खेलने जा रहा हूं' — 'हां, बचा के खेलना, ध्यान से खेलना।' बचा के खेलना मतलब ध्यान आ गया। जरूरी नहीं कि ध्यान शब्द बोला ही जाए। ध्यान से बाजार जाना, ध्यान से पढ़ना, पढ़ाई सही तरीके से करना — उसमें भी ध्यान आ गया। आपको हर काम ध्यान से ही करना है; ध्यान अपने आप आता है आपके काम में।

जब भी आप कुछ करते हो, तो पहले भी ध्यान, बाद में भी ध्यान आ ही जाता है — आप बेईमानी भी करते हो, तो उसमें भी ध्यान आता है। मतलब ध्यान शुरुआत में है, ध्यान आखिरी में है; इसको करना नहीं है। लेकिन जब आप ध्यान करोगे, तो फंस जाओगे। इसे बहुत गहराई से समझकर अपने आप को निकालना है।

ध्यान मत सिखाओ, काम करने का तरीका सिखाओ

हमारे माइंड में फिट हो गया है कि ध्यान करना है। ध्यान करना नहीं है, वह हो जाता है। ध्यान से काम करना है। गड़बड़ ये हो गई है कि संदेश गड़बड़ चला गया मार्केट में — इनको वहां से निकालना है।

हर आदमी कह रहा है मुझे ध्यान सिखाओ। उसे कहना चाहिए कि मुझे काम करने का तरीका सिखाओ, उसमें ध्यान तो आ जाएगा। आज लोग इतना भटक गए हैं — एक घंटे ध्यान कर लिया, बाकी समय ठगी-बेईमानी का काम कर रहे हैं। ध्यान सीखना-सिखाना नहीं है; 24 घंटे का ध्यान है। ध्यान करना नहीं, ध्यान में होना ध्यान है — होश में करना। जब आप कुछ कर रहे हो, ध्यान से काम करके ध्यान से भी मुक्त हो जाना — यही है ध्यान।

धीरे-धीरे आएगा, प्रयास करते रहो। हमारे माइंड में कुछ फिक्स कर दिया गया है, भर दिया गया है; वो धीरे-धीरे निकलेगा। मैं अपनी तरफ से कुछ नहीं बोल रहा हूं, जैसा है वैसा आपको बता रहा हूं।

समझ बढ़ेगी तो सब सामने आएगा

जैसे-जैसे समझ बढ़ेगी, वैसे-वैसे सब सामने आएगा। पुराना एक-एक खुलेगा। उसके लिए तुम रोओगे, गिड़गिड़ाओगे, आंसू आएंगे। अभी तो शुरुआत है — पश्चाताप होगा, घुटन होगी कि ये मैंने क्या कर दिया, उसके साथ मैंने कितना गंदा व्यवहार किया। सब तुम्हारे सामने आएंगे। विचार तो रुक नहीं सकते, वो आते-जाते हैं — उन्हें रोकना क्यों चाहते हो? जो आता है उसे आने दो, जो जाता है उसे जाने दो। मैं वही कहूंगा जिसमें जी रहा हूं।