आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

डर — 138 प्रश्नोत्तर

वे प्रश्नोत्तर जिनके प्रश्न या उत्तर में “डर” शब्द आता है — नए पहले।

मन353 उत्तरध्यान331 उत्तरगुरु2,248 उत्तरकर्म580 उत्तरअहंकार84 उत्तरमृत्यु43 उत्तरपरिवार239 उत्तरसेवा321 उत्तरडर138 उत्तरक्रोध46 उत्तर

P23-0195

गुरु जी, अगर सिर्फ मनुष्य शरीर से ही परोपकार होता है, तो क्या हाथी वगैरह एक-दूसरे की रक्षा करके, अपने बच्चों को संस्कार देकर, या वानर आदि शोर मचाकर हिरणों को शिकार से बचाकर परोपकार नहीं करते? क्या ममता के बिना परोपकार संभव है?

P23-0184

गुरु जी, मुझे सिर्फ एक बात पता करनी है — जो लोग नशा करते हैं, वे इतने दयालु क्यों होते हैं, और जो नशा नहीं करते वे वैसे नहीं होते — ऐसा क्यों?

P23-0169

गुरु जी, जब हम अपने आप में होने के लिए बैठते हैं तो बहुत चिंता आती है, थोड़ी देर बाद बोर हो जाते हैं, कभी-कभी डर भी लगता है। क्या करें?

P23-0126

गुरु जी, रात को मैं कहती हूं कि जाऊंगी और सुबह कहती हूं कि नहीं जाऊंगी — घर, सुविधाएं सब हैं, लेकिन होश में आती हूं तो कहती हूं कि वह भी नहीं चाहिए। यह द्वंद्व क्यों है? मेरे अंदर दृढ़ता क्यों नहीं आ रही, मैं बार-बार डगमगा क्यों जाती हूं?

P22-0161

गुरु जी, रात को ऑफिस से आए तो ऑटो वाला भी यहां तक आने में डर रहा था कि वापस कैसे जाएगा; हमें भी उसके प्रति अजीब लगा, हमने कहा "भैया, ध्यान से जाना" — क्या इसे भी राग कहेंगे?

P22-0155

गुरु जी, डर फेक है कि रियल? रात को डर लगता है तो मेरे लिए तो रियल है।

P22-0136

गुरु जी, सभी धर्मों में अपने-अपने मंदिर-मस्जिद हैं, सब बोलते हैं दर्शन करने जाना — असल में दर्शन का क्या मतलब है? इसका कोई आध्यात्मिक महत्व है?

P21-0171

गुरु जी, ईमानदारी में बहुत बार हमें दूसरों को झेलना पड़ता है — उस प्रेशर को हम कैसे हैंडल करें?

P21-0164

गुरु जी, एक प्रोफेसर बहुत सत्कर्म करते थे, 30 साल तक बिस्तर पर पड़े अपने परिवार-जन की सेवा भी की, लेकिन उन्होंने 30 साल तक इतने कष्ट झेले और उनका देहांत हो गया। इससे मुझे लग रहा है कि भगवान है या नहीं? क्या सत्कर्म करने वालों की ये परीक्षा है? मैं बहुत कंफ्यूज हूं।

P21-0126

गुरु जी, आप कहते हैं जरूरत में जियो, पर हर सिचुएशन में मेरी जरूरत कितनी है — यह ढूंढने में मैं असफल हूं। इसे कैसे पहचानूं?

P21-0116

गुरु जी, फिर भी — मुझे एक्चुअली कहां होना चाहिए? उदाहरण से समझाइए।

P21-0112

गुरु जी, संसार में किसी पद पर रहते हुए कर्मचारियों से काम लेना पड़ता है, समझाना-कहना पड़ता है — इसमें राग-द्वेष बनता है और वहां से बददुआ भी आती है; इसके लिए मार्गदर्शन करें।

P21-0087

महाराज, बीवी कहती है रोज मंदिर जाओ, पूजा-पाठ करो — वो धक्का देकर भेजती है, पर मेरा मन जाने का नहीं करता। क्या मंदिर न जाने से पाप लगेगा?

P20-0152

मैं ईमानदारी से काम करती हूं, पर बॉस बुलाते थे तो डर लगता था कि निकाल न दें — नौकरी में डर कैसे जाए?

P20-0144

हम हर समस्या को "मेरा प्रारब्ध है, लेना-देना पूरा करना पड़ेगा" कहकर अध्यात्म में पीछे रह जाते हैं — प्रारब्ध सच में होता है?

P20-0125

"तुम्हारे जैसे कितने आए और कितने जाएंगे" — यह सुनकर डर लगता है, पसीना आ जाता है कि गुरु को मेरी जरूरत ही नहीं, तो मेरा कल्याण कहां होगा?

P20-0120

साधक फिसलता किस बात में है और उससे कैसे बचे?

P20-0115

क्या आपको केदारनाथ और उस भूखी रात में मौत से डर नहीं लगा?

P20-0114

मेरी ईमानदारी की कमाई 10 लाख है, उसमें से 5 लाख ज्ञान प्रसारण में लगाना चाहूं तो मन डरता है — कल अस्पताल की जरूरत पड़ी तो? इस डर से कैसे निकलें?

P20-0107

परीक्षा की पहचान क्या है — "परीक्षा में भागने का ऑप्शन होता है" का क्या अर्थ है?

P20-0104

गुरु के जितना नजदीक जाएंगे उतनी परीक्षा बढ़ेगी — परीक्षा से डर लगता है, क्या करें?

P20-0094

गुरु जी, सब छोड़कर अकेले अध्यात्म में आगे बढ़ने में डर लगता है — क्या करें?

P20-0082

गुरु जी, साधना में अपने मार्ग के साथियों का साथ क्यों जरूरी है?

P20-0070

गुरु जी, घर में कोई कुछ कहे तो कैसे प्रतिक्रिया दें?

P20-0016

गुरु जी, चित्त कभी-कभी स्वयं में लीन होकर आनंद से निःशब्द हो जाता है, पर डर लगता है कि कहीं खो न जाऊं — यह क्या है?

P18-0121

गुरु जी, जब आत्मा इच्छा-अपेक्षा में जीव बनी और उसे पता है कि मूल तक पहुंचना है, तो फिर भी वह अपने आप को बचाकर क्यों रखना चाहती है — अपना नाश क्यों नहीं करना चाहती?

P18-0089

गुरु जी, किसी ने अपनी बात अधूरी या इधर-उधर कह दी तो आप उसे पूरा करके साफ कर देते हैं — गुरु का कर्तव्य क्या होता है?

P18-0015

गुरु जी, केदारनाथ की पैदल यात्रा में डर और दर्द के बीच आपने क्या समझा?

P17-0190

गुरु जी, जब आप कहते हैं कि पढ़ाई-करियर छोड़ दो, तो डर लगता है।

P17-0169

गुरु जी, क्या केवल पापी मन वाली बुद्धि को ही डर लगता है, और जिसके मन में राम और सत्य स्थित हैं उसे कोई भय नहीं लगता?

P17-0025

जब मुझे डर लग रहा हो, उस वक्त मैं क्या भाव बनाऊं? क्या एकांत में चली जाऊं, या रोना आए तो क्या करूं?

P17-0024

तो क्या आज से मैं जो भी कर्म करूं, उसके पीछे यही भाव बनाऊं कि इस कर्म का जो परिणाम मिलेगा, उसमें मुझे अपने लिए कुछ नहीं चाहिए?

P17-0023

आपका भाव रहता था कि मैं जो भी कर रहा हूं — खाना, सोना, रोना, बात करना — मैं अपने लक्ष्य की तरफ ही पहुंच रहा हूं। तो अगर हम पथिक भी अपनी पूरी दिनचर्या में, ईमानदारी और सत्कर्म करते हुए, ये भाव रखें कि जो कुछ मेरे शरीर से, मन से, कल्पना में, डर में हो रहा है, उसका निचोड़ यही है कि मैं अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ रहा हूं, कि मेरा गुरु देख रहा है — तो ये मेरे लिए कितना कारगर होगा?

P16-0135

हर जीव अपने प्राण क्यों बचाना चाहता है? बहुत लोग 100 वर्ष के ऊपर चले जाते हैं; एक बूढ़ी अम्मा कह रही थीं कि अब तो सिर्फ मौत का इंतजार है, बस शरीर जल्दी छूटे और दर्द ना हो — फिर भी मौत का डर है। एक चींटी को भी मारूं तो वह भी प्राणों की रक्षा करती है। आखिर यह डर किस चीज का है?

P16-0132

क्या परमात्मा के अंदर वासना पैदा हुई, तभी पृथ्वी का निर्माण हुआ? इसलिए तो हमारे अंदर भी वासना है?

P16-0109

आपसे बात करने में डर लगता है। जैसे ही बोलने लगता हूं, रोना आ जाता है, गला भर आता है। लगता है कोई गलती ना हो जाए।

P16-0057

आत्मज्ञान होने के बाद कौन भोगों की इच्छा करेगा या विवाह का ख्याल करेगा?

P16-0018

प्रणाम गुरुदेव, आसपास के लोग प्रभावित ना करें, इसके लिए क्या करना होगा?

P16-0017

गुरु जी, क्या आत्मज्ञान होने के बाद डर-भय नहीं लगता?

P16-0003

गुरु जी, आत्मज्ञान प्राप्ति से पहले क्या आपको पीएम, सीएम, आईपीएस, पीसीएस के सामने आने से कोई फर्क पड़ता था?

P15-0160

गुरु जी, क्या डर से मुक्त होने के लिए जिस काम से डर लगता है, वो काम बार-बार करना चाहिए?

P15-0131

गुरु जी, बचपन में पिता बहुत मारते थे — 10 साल की उम्र से कॉलेज तक। अब मैं 34 साल का हूं, पर पिता के सामने आने से ही बहुत डर लगता है, ढंग से बात भी नहीं कर पाता। यह डर कैसे दूर करूं?

P15-0123

गुरुदेव, मैं अच्छे कर्म कर रहा हूं, सत्कर्म कर रहा हूं, फिर भी कोई मेरा शोषण कर रहा है और मुझे दिखाई दे रहा है — ऐसे समय में मैं क्या करूं?

P15-0050

ध्यान में मौत का डर लगता है, छूटने का भय बना रहता है — मार्गदर्शन करें।

P14-0071

गुरु जी, जहां सारी बातें प्रैक्टिकल करके समझाई जाती हैं, ऐसी जगह भीड़ कम क्यों रहती है? आखिर लोगों को क्या डर है?

P14-0032

गुरु जी, बुद्ध, महावीर और आपने भ्रमण करके आत्मज्ञान प्राप्त किया। हम तो यहां आपकी कुटिया में रुक गए — क्या यहां आत्मज्ञान की प्राप्ति हो जाएगी?

P13-0099

गुरु जी, इतना घना जंगल है, आपको डर नहीं लगता?

P12-0164

(लाइव में) मुझमें एक बुराई है — कई बार मैं जानबूझकर बुरा सोचता हूं और सोचकर खुश हो रहा होता हूं। ये भाव भीतर अक्सर आता है, इस पर ज्यादा सोचूं तो डर लगने लगता है। शायद ये मेरे पिछले संस्कार हैं — इसे ठीक करना है।

P12-0107

पत्नी को हर वक्त डर रहता है कि पति झोला उठाकर चल ना दे। यह भी तो एक प्राणी को कष्ट देना हुआ; क्या ऐसे कोई मोक्ष या मुक्ति पा सकता है?

P12-0104

मैं गृहस्थ हूं; बरसों से सत्संग सुनता हूं — रोज चार-पांच घंटे रामकृष्ण परमहंस जी को और एक घंटा आपको — इतना ज्ञान भर गया है, पर भीतर की अनुभूति के लिए एकांत चाहिए, जो घर-गृहस्थी में हो ही नहीं पाता। एकांत के लिए जाना चाहता हूं तो पत्नी और परिवार रोक लेते हैं, उन्हें डर रहता है कि कहीं गृहस्थी ना छोड़ दूं। क्या करूं?

P12-0037

नया अपराध करने के बाद क्या लक्षण दिखते हैं, और पुराने अपराध की भरपाई के बाद क्या लक्षण दिखते हैं?

P12-0012

हम हमेशा निश्चितता या स्थिरता क्यों चाहते हैं?

P11-0095

अगर सभी बच्चों को आत्मज्ञान में लगा दिया जाए, तो क्या देश की टेक्नोलॉजी पीछे नहीं चली जाएगी?

P11-0018

अध्यात्म में हमारा पहला कदम है, बहुत डर लगता है — जैसे केजी वन में एडमिशन लेने वाला बालक घबराता है, कि कहीं गलती ना हो जाए।

P11-0005

अगर मैं (पुरुष) होती, तो कब का घर छोड़ के भाग जाती। (महिला शरीर में समाज का डर लगता है।)

P10-0186

(भ्रमण में) साथ में किसी को लेकर जाएं या अकेले जाएं?

P10-0184

गुरु जी, मैं आत्म कल्याण के लिए घर से निकल नहीं पा रहा हूं। मुझे अपने मन से डर लग रहा है कि मुझसे कोई गलत काम ना हो जाए। मार्गदर्शन करिए।

P10-0149

गुरु जी, आप जब दिल्ली आए थे तब मैं आ सकता था, पर पता नहीं क्यों नहीं आया। बहुत डर लग रहा था कि कहीं आप सच में कुछ बदल ना दें, फिर आम जिंदगी में जीना मुश्किल हो जाएगा।

P10-0145

गुरु जी, मुझे डर लग रहा है कि आप जैसे महापुरुष के होते हुए भी मैं पूरा लाभ नहीं ले पा रहा हूं। फिर कब और कितने सालों बाद मुझे मौका मिलेगा?

P10-0143

गुरु जी, आप में डर, डाउट या चिंता नहीं है — क्या यह आत्मज्ञान की वजह से है, या आप पहले भी ऐसे ही थे?

P10-0136

गुरुवर, मैंने एक-दो साल पहले शिव नाम जप शुरू किया था, और आगे बढ़ते-बढ़ते मुझे अपने स्वभाव की असलियत पता चली और मैं डर गया। तब से भाग रहा हूं। अब मैं उलझ चुका हूं। क्या फिर से शुरू करूं?

P10-0110

गुरु जी, दूसरे हमारे बारे में क्या सोचते हैं, इसका डर कैसे खत्म हो?

P10-0084

गुरुदेव, मैं लोगों के बीच बोलना चाहता हूं पर डर लगता है। मुझे हकलाहट होती है और डॉक्टर ने बोला है कि लोगों से बात करो। मैं 100 लोगों के बीच बोलना चाहता हूं। कैसे करूं?

P10-0072

कोई बड़ा कार्य करने में डर लगता है कि कहीं फेल ना हो जाएं, लोग क्या कहेंगे। ऐसे विचार से कैसे बचें?

P10-0044

बात तो ठीक है, सर, लेकिन आपके खौफनाक कुत्तों से डर लगता है।

P10-0007

घर में दबाव रहता है। यह करना है, वह करना है। अपने जीवन का निर्णय खुद नहीं ले सकते। घुटन हो रही है, इसलिए मैं मौन हूं। क्या दबाव में हम कभी आगे नहीं बढ़ सकते? फिर क्या उन लोगों से लड़ना चाहिए, क्योंकि वे समझ नहीं सकते, तमोगुण ऊर्जा वाले हैं? मैंने उनसे मानसिक रूप से दूर बना लिया है, लेकिन उनकी गलत बात नहीं मानता।

P9-0100

मैं काफी समय से, दो साल से या बीस साल से, वीडियो देख रहा हूं। अदृश्य रूप में लाभ हो रहा है। नाम अरुंध शाह है। तो क्या अब देना चाहिए, आपके काम में लगना चाहिए?

P9-0098

क्या कोई इस धरती पर आपके समान साधना और तप कर सकता है? आपके समान कोई मिला क्या, या आगे मिलेगा?

P9-0072

गुरु जी, मैं हरियाणा से अकेली आऊंगी। आश्रम दूर होगा, और मुझे डर लगता है। फिर भी मैं आऊंगी। मेरा मार्ग यही है।

P9-0040

भविष्य का डर लगता है कि कुछ नहीं होगा, तो क्या होगा?

P9-0035

मुझे अपने आप से भी डर लगता है, कभी-कभी, कि मुझे कोई गलत काम न हो जाए।

P9-0033

मौत का डर क्यों लगता है?

P9-0030

उसी घर में पत्नी भी रिश्ते के कहने की वजह से अप्रत्यक्ष रूप से पिता को कंट्रोल करती है। बच्चे सिर्फ डर से जीते हैं। उन बच्चों में मैं एक बच्चा हूं, सत्संग सुनता हूं, और उन्हें यह पसंद नहीं। वह बच्चा क्या करे?

P9-0014

जिसके साथ मैं हूं, उसके अंदर मुझे संभालने का डर है। मैं उस पर इतना आश्रित हूं कि वह जीवन में कुछ नहीं कर पाता। गुलामी से मैं कैसे मुक्त होऊं?

P8-0095

साधना को ईमानदारी से करना भी तो ईमानदारी है न? और क्या किसी पर भरोसा करके मार्ग पर चलना चाहिए, जबकि बताने वाला खुद नहीं पहुंचा?

P8-0056

कोई भी उस व्यक्ति से प्रेम नहीं करता जिससे वह डरता है। गुरु जी, यह कितना सही है?

P8-0053

अचेतन मन में जो डर के विचार हैं, उनसे कैसे ठीक हों? और यह डर के विचार उसमें कैसे बैठे?

P8-0026

कुछ भी काम करने से डर लगता है। क्या कारण है? क्या कोई कुछ कर दिया है?

P7-0097

हम दोनों सेंट्रल गवर्नमेंट से रिटायर हैं, दोनों सक्षम हैं। अब क्या करें? परिवार के लिए कितना ईंट पत्थर जोड़ें? पति कहते हैं कहीं अच्छा कार्य में लगा न दूं, सब लुटा दूंगी। कोई भी गेरुआ वस्त्र पहन के आ जाए तो देने का डर है। गेरुआ वाले को कैसे समझें, जरूरत कैसे देखें?

P7-0087

लाइव पर प्रश्न है। डर किस स्थिति में खत्म होगा?

P7-0083

अपनी जिंदगी की क्लैरिटी क्यों नहीं हो पा रही? अंदर गुणों की ताकत नहीं है, शारीरिक बल नहीं है, अधूरापन है, कमियां हैं। जिन पर काम नहीं करना चाहता, उन्हें ढक रहा हूं। भाई कवर कर ले, इधर से कुछ मिल जाए। जहां कमी है, वहां पचहत्तर बार नमस्ते करूंगा, घरवालों की चापलूसी करनी पड़ती है। आज परिवार के साथ, कल पति-पत्नी के साथ, फिर बच्चों के साथ, दादा-दादी बनने तक वही कमजोरी रह जाएगी। जन्म-जन्म डर-डर कर क्यों जी रहे हैं? मैं आपसे डर रही हूं, आप मुझसे डर रहे हो, बात ही नहीं हो रही। कोई किसी को डरा क्यों रहा है?

P7-0060

एक झटके में जीवन के कष्ट कुछ नहीं दिखे, अब बहुत कुछ दिमाग में अपने आप आ रहा है और डर लग रहा है। क्या करें?

P7-0023

जो मिटने के लिए तैयार है वही आ सकता है और रुक सकता है। गहरे पानी में डूबने, मीरा के पदों और बोध के बाद वाले प्रेम का क्या अर्थ है?

P7-0005

क्या सूक्ष्म शरीर होता है? स्वप्न में जाते हैं तो कुछ हो जाता है, और स्थूल शरीर पर भी उसका प्रभाव आता है। यह कैसे है?

P6-0173

राधेश्याम पूछते हैं, ईमानदारी से चलने पर मृत्यु का डर कम लगेगा क्या?

P6-0101

हरियाणा से आई बहन साधना में लगातार बैठने से पैर और शरीर के दर्द में बहुत परेशान थी। कहा गया था, या तो बैठो या चली जाओ, उसके बाद दर्द चला गया। साधना में दर्द और पीड़ा को कैसे देखें? गुरु कठोर क्यों होता है? शरीर, धन और समझ की ताकत को संचित करें या कहां लगाएं?

P6-0077

जो परिवार छोड़कर केवल ध्यान लगाता है, आकाशवृत्ति से रहता है, धन नहीं जोड़ता, उसे गाली और मार भी मिलती है। उसका क्या होता है? कृष्ण ने अर्जुन को आत्मभाव में टिकने के लिए भी कहा था, तो कर्म का सिद्धांत क्यों बताया? अर्जुन आत्म तत्व में कैसे स्थिर हुए? और क्या मैं शुद्ध आत्मा हूं कहना भी एक विधि है, जिससे कल्याण नहीं होता?

P6-0065

साधक आत्मिक रास्ते पर यह कैसे समझे कि वह सही रास्ते पर जा रहा है? कैसे पता चले कि हम अध्यात्म में हैं या नहीं? आए हुए सात दिन हुए हैं। बोलने से मना था, फिर भी बोल दिया। नियम पूरी तरह नहीं निभा।

P6-0064

गुरु से इतना डर क्यों रहता है? गुरु और शिष्य के बीच का दायरा क्या होना चाहिए? कुछ भी पूछना चाहते हैं, खुलकर बोलना चाहते हैं, पर बोल नहीं पाते। चलते हुए भी लगता है कि कहीं कुछ गलत न हो जाए और डांट न सुननी पड़े। यह डर कैसे खत्म हो? मर्यादा कैसी होनी चाहिए?

P6-0055

नमन योगी जी। मैं अपनी स्थिति का जायजा कैसे लूं? अगर गहराई से जानना हो और जीवंत गुरु न मिले तो क्या करूं? महिलाएं ऐसा भ्रमण कैसे करेंगी? अगर मैं अपनी स्थिति घर पर ही जांचना चाहूं और कोई ऐसा गुरु न हो कि आज पहले अपने आप को समझूं, तो थोड़ा भी कैसे समझूं? क्या स्त्री शरीर या डर निकलने में बाधा बनता है?

P6-0043

समझ बढ़ाने की बात हुई, पर समझ अपने हाथ में है ही नहीं। हाथ में होती तो कब का विकसित कर लिया होता। जिज्ञासा भी भीतर से अपने आप उपजती है, विचार अपने आप उठता है, और किसी समय कोई विचार आता ही नहीं। फिर तो चाहत हो गई, और चाहतों में फंस जाएंगे। एक संकल्प छोड़ने के लिए क्या करना है?

P6-0035

मन की परिभाषाएं अलग-अलग — राग-द्वेष पिंडों में कैसे अलर्ट रहें?

P6-0031

बच्चे-मकान-गाड़ी सुप्रीम करने के बाद भी sufficiency का प्रश्न क्यों?

P6-0027

दांत चबाने के लिए हैं — दांत तोड़ने/दर्द पर मरने की बात कैसे?

P6-0012

गुरु ने जीवन बदला फिर रूप बदल गया — क्या गुरु की स्टेट भी कंप्रोमाइज हो जाती है?

P6-0003

मार्ग पर मेहनत — क्या पता आगे कुछ हो ही नहीं? आत्मिक कल्याण का मतलब?

P5-0167

डर का क्या उपाय है — छोटी चीजों से भी डर लगता है?

P5-0156

ध्यान में सूक्ष्म शरीर बाहर निकलता है, दिल की धड़कन बढ़ती है, ऊंचाई से डर लगता है, आंखें खुल जाती हैं — मिटने का भय है। क्या करें?

P5-0129

कार्य शुरू करने का भय कैसे दूर करें? मन साधना में लगता है पर पारिवारिक कर्तव्य रुकावट — क्या करें?

P5-0098

मलिन विचार आते हैं, साधना-पूजा में तकलीफ — क्या करें? डर का सामना, क्रोध निवारण, प्रेम कैसे आए?

P5-0064

आप कहते हैं भगवान पे यकीन मत करो, और यह भी कि जहां है वहीं से निकाल देंगे। ईश्वर को लेकर आपका विचार क्या है?

P5-0053

(मोहन) समाधि अवस्था में क्या अनुभव होता है? कई महीने?

P5-0020

(वही साधिका) कहते हैं कामना से मुक्त हो जाओ — क्या कामना को पहले प्राप्त कर लो तब मुक्त हो जाएँगे? मैं आर्थिक परेशानी क्लियर करके निडर होकर आना चाहती हूँ; और पीतमपुर का मकान छोड़कर गाँव जाना चाहती हूँ पर डर है कि वहाँ फंस न जाऊँ।

P5-0017

(कुटिया में साधिका) उस (युवक) में समझ तो है, बस वो चल नहीं रहा — हम कैसे निर्णय कर सकते हैं, हो सकता है वो पहुंच ही गया हो और ऐसे ही सबको खींच रहा हो, परीक्षा ले रहा हो? और वैसे हमारी स्थिति का कोई शायद अनुमान भी नहीं लगा पाएगा।

P4-0193

(वही साधिका) मेरी शादी बचपन में 14-15 साल में हो गई, दो बच्चे हो गए। अध्यात्म में आने के बाद मेरी कोई ख्वाहिश, इच्छा नहीं बची — पति के साथ हूं, पर वो अब भी फिजिकल प्यार चाहते हैं, और मेरा माइंडसेट अध्यात्म में हो गया है, मेरी बॉडी उस चीज को एग्री नहीं करती। तो क्या मेरी जिम्मेदारी बनती है? उनके लिए क्या करूं?

P4-0190

(वही साधिका) आपने अपनी यात्रा कैसे की — आप पहले क्या करते थे, और फिर एकदम से ऐसा जीवन कैसे बना लिया? पैसे की चिंता कैसे नहीं हुई?

P4-0189

(वही साधिका) मैं बहुत सी चीजों से मुक्त हो गई — ईर्ष्या, समाज, रीति-रिवाज, अंधी पूजा-पाठ, मां-बाप का मोह। लेकिन आर्थिक डर पर आकर अटक जाती हूं — अगर मेरे पास पैसे नहीं हुए तो जिंदगी कैसी होगी? ईमानदारी से (ज्ञान के) वीडियो बनाती हूं तो लोग सुनते नहीं, कमाई घट गई है। इस डर को कैसे खत्म करूं?

P4-0186

(वही साधिका) मार्केट में नकली ज्यादा पॉलिश करके बिकता है, चाहे अध्यात्म ही क्यों ना हो; असली थोड़ा डर्टी भी दिख सकता है। असली और नकली (गुरु/ज्ञान) की पहचान कैसे की जाए?

P4-0167

(वही साधिका) दूर रहकर आपके नियमों का पालन करते हुए भी मुझे अपना स्तर पता नहीं चलता था — मैं सोचती थी कि आत्मज्ञान के बहुत करीब हूं; आपके सामने आकर पता चला कितना डिस्टेंस है। (और आज) मेरी जांच हुई, बाबूलाल भाई की क्यों नहीं हुई?

P4-0089

(लाइव) प्रणाम गुरु जी। आपने बोला था कि सब हम सोचते हैं, लेकिन मैं तो डरावना नहीं सोचता — डर के विचार मुझे क्यों आते हैं? इसका मतलब तो यह हुआ कि सोचता मैं हूं, परंतु विचार खुद आते हैं। विचार का स्रोत कौन है? यह कहां से आते हैं?

P4-0079

(कुटिया में साधक, उज्जैन से) मैं 2017 में घर से एक साल के लिए निकल गया था। ओशो की विधियां (डायनामिक मेडिटेशन आदि) बहुत ऊर्जा देती थीं, उसमें मैं घबरा गया, एकांत में डर भी लगता था, फिर वापस संसार में लौटा — ना संसार का रहा, ना सन्यास का। बेचैनी, चिंता, तनाव, अनिद्रा, फिर सिगरेट-शराब भी लगी; डॉक्टर की दवाइयों के बाद मेरा दिमाग सुन्न हो गया। बहुत प्रयास किए, कई जगह पूछा। अब दिमाग सुन्न पड़ा है, कोई भावना ही नहीं उठती, शरीर में ताकत भी नहीं बची — अब क्या करूं?

P4-0021

(लाइव) योगी जी प्रणाम। सत्कर्म और कृतज्ञता क्या है? क्या दया-एहसान, लालच और डर इन्हीं से आते हैं?

P3-0182

(कुटिया में साधक) आज भ्रष्टाचार शिष्टाचार बन रहा है, (बेईमानों को) पुरस्कार मिल रहे हैं; ईमानदारी से पुलिस की नौकरी करना बहुत तकलीफ में आ रहा है, हम शिक्षकों को भी बहुत तकलीफ हो रही है — हमें दिखाना पड़ता है कि हम ईमानदार हैं। समूह ज्यादा है, बड़े अफसर कहते हैं नीचे से ऊपर तक की व्यवस्था ऐसे ही चलनी चाहिए। ऐसे में क्या करें?

P3-0093

(उसी साधिका का प्रश्न) गर्दन कटते समय मुझे जो डर लगा, वह कहां से था? मुझे लगता है इस जन्म में तो कोई विकार हुआ नहीं, तो सूक्ष्म रूप में विकार कब हुआ?

P3-0089

एक साधिका: मैंने चार दिन तक दृश्य देखा कि विष्णु जी बाहर निकल रहे हैं और उनका सुदर्शन चक्र बहुत तीव्र गति से चल रहा है; मैंने कहा मुझे अपने अंदर कर लो, तो उनका दायरा बढ़ गया और चक्र से मेरी गर्दन कटकर अलग हो गई, मुझे डर लगा। फिर ऊपर बहुत ऊंचाई पर ओम दिखा और तीव्र किरणें निकलीं। इसका अर्थ क्या है? मैंने सोचा कि क्या अंतर्मन में कोई सूक्ष्म विकार — शायद पूर्व जन्म का — था जिसे उन्होंने सुदर्शन चक्र से काट दिया? क्या यह चिंतन सही है?

P3-0060

ऑफिस में काम करवाने के लिए थोड़ा झूठ (सीनियर ने कहा urgent) — गलत? नौकरी छूटने का डर?

P3-0050

समाज छोड़ अकेले खड़ी — अध्यात्म में पूरी तरह आने में डर कि फिर कलंक लगे। सुरक्षा?

P3-0049

समझ आती है पर दृढ़ता/स्ट्रॉन्ग पावर नहीं — परिवार बैकग्राउंड आध्यात्मिक नहीं। क्या करें? गिरने का डर?

P3-0033

असली-नकली जरूरतमंद पहचान मुश्किल; धर्म का डर — दान न करूं तो भगवान नाराज / करूं तो फंसूं। डर कैसे निकाले?

P3-0032

स्वास्थ्य बिगाड़ने वाला खाना (शुगर वाले को मीठा) — जिम्मेदारी? डर कि नेगलेक्ट कर दिया?

P3-0028

अमेरिका में ट्रक चलाते हुए होमलेस जरूरतमंदों को रेस्टोरेंट में ले जाकर जो मांगे वो ऑर्डर करवाता हूं — वे नॉनवेज-सोडा लेते हैं; कभी खुद वेज दे देता हूं। क्या ये सत्कर्म है? उनकी मर्जी से नॉनवेज कराना चाहिए या अपनी मर्जी से शाकाहारी देना?

P3-0011

कल्पना में अध्यात्म शुरू किया हो, पीछे आसक्ति-मोह कैंची से नहीं कटती, सुरक्षित महसूस किया था — तो क्या कल्पना में चलते-चलते भी परम स्थिति पक्की हो सकती है? आपके व्यवहार में करुणा-कृपा देखकर क्या मेरा भी वहां पहुंचना हो सकता है, चाहे शुरुआत कल्पना से हो?

P2-0200

आप कहते हैं कि मैं कभी पूर्ण था और लालच-लोभ में अपूर्ण हो गया — चीजों के उदाहरण (मटका, मशीन) समझ में आते हैं क्योंकि मैंने खुद खरीदा और बिगड़ते देखा; लेकिन अपने ऊपर यह कैसे याद करूं कि मैं कभी पूर्ण था?

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गृहस्थ जीवन में डर और असुरक्षा सताती रहती है — कल मेरा क्या होगा। जवानी में दौड़कर पैसे, घर, बैंक बैलेंस, जानकारियां और सोशल सर्कल इकट्ठे किए ताकि सुरक्षित महसूस हो, फिर भी एकांत या दुख में लगता है कोई किसी का नहीं। आपकी व्यक्तित्व में जो निश्चितता-स्थिरता आई है, वह मैं अपने अंदर कैसे लाऊं? अपूर्णता से पूर्णता की तरफ जल्दी कैसे बढ़ूं? अध्यात्म में बाहर जैसी प्रगति नहीं दिखती, तो डर लगता है कहीं मैं नई दुनिया तो नहीं बसा ली — मार्गदर्शन करें।

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तो यह अपने को जांचने का पैमाना हो सकता है। मैं डरा हुआ इंसान हूं और डर निकालना चाहता हूं — लक्ष्य की ओर अपनी यात्रा तेज कैसे करूं?

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क्या मैं इसे ऐसे पैमाने की तरह समझ सकती हूं कि अगर मैं लक्ष्य की तरफ जा रही हूं तो शांति, उत्साह बढ़ेगा और निडर होती जाऊंगी; और लक्ष्य के विपरीत जा रही हूं तो घुटन, अशांति, असुरक्षा और डर बढ़ेगा?

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ज्ञान होने तक तो ये घाव बार-बार हरे हो जाते हैं; याद आते ही मन घृणा से भर जाता है और न चाहते हुए भी उनके लिए बद्दुआएं निकल जाती हैं। फिर डर लगता है कि इस द्वेष से मैंने फिर कर्म-बंधन बांध लिया। अगर ज्ञान से पहले शरीर छूट गया, तो क्या इस द्वेष के कारण मैं फिर उन्हीं के इर्द-गिर्द, उनके परिवार में पैदा हो जाऊंगा — वही चक्र, जिसे मैं तोड़ना चाहता हूं?

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आदमी ठान तो लेता है, पर पहली यात्रा में उसे पता नहीं होता कि रास्ता कितना दुर्गम होगा। क्या आपको अपने बलबूते पर ऐसा अटूट विश्वास था कि जब ये (पहले वाले) पहुंचे हैं, तो मैं भी पहुंचूंगा, शर्तें कुछ भी हों?

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अकेले में हम अपनी मस्ती में चलते-बैठते हैं, पर जैसे ही कोई दूसरा व्यक्ति दिखता है, चाल बदल जाती है, एकदम सजग हो जाते हैं, सोचते हैं कि इसने मुझे देख तो नहीं लिया — पशु-पक्षियों के सामने ऐसा नहीं होता। यह अपने आप होता है। इसके पीछे क्या कारण है?

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नमस्ते गुरु जी। मैं ईमानदारी से रहने का प्रयास करता हूं, पर कभी-कभी उलझन और स्पष्टता की कमी के कारण डर जाता हूं, मुरझा जाता हूं।

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गुरु जी, खुद की ताकत और मन की शक्ति कैसे बढ़ाएं, जिससे कोई और हम पर प्रभाव न डाल पाए और डर भी न हो?

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गुरु जी, (निर्माण में) बिजली के साथ लोहा लगा है, करंट का डर रहेगा।

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हर जगह तो मजबूत नहीं बन सकते। मैं बस इतना कर सकती हूं कि जितनी मेरी जरूरत है, उसी में जियूं; क्योंकि हर कमजोरी तो नहीं निकल सकती — मैं होड़ करती हूं, कल्पना करती हूं कि काश मेरे पास भी यह गाड़ी हो, ऐसा महल हो।

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गुरु जी, भविष्य में कुछ बुरा या नुकसान होने का डर बना रहता है। क्यों?

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लेकिन योगी जी, अध्यात्म में भी ‘काउंटर’ बहुत हैं — बहुत आश्रम हैं, बहुत प्रतिस्पर्धा है। कहीं जाओ तो उनके नियम में रहो, उनकी माला रटो, तिलक लगाओ, बड़ की 11-21 परिक्रमा करो — पैर दुखने लगते हैं, पर कुछ अनुभव नहीं होता। बहुत जिंदगी ऐसे ही ट्राई एंड टेस्ट में निकल गई। तो क्या बार-बार ऐसे ही ट्राई एंड टेस्ट करती रहूं?

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गुरु जी, मुझे डर लग रहा है कि यह सब मैंने क्या कर लिया — अब मैं अंदर से देख पा रहा हूं कि फंस गया हूं।

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गुरु जी, डर किसे होता है — मन को या शरीर को?

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गुरु जी, मुझे मानसिक कमजोरी, हर बात का डर और अति-विचार (ओवरथिंकिंग) से बहुत तकलीफ होती है; लगता है कुछ हो जाएगा। कोई एक उपाय बता दीजिए।