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अपनों की कुटिया आश्रम के बारे में

योगी रविकांत जी अपनों की कुटिया के संस्थापक भी हैं — एक अनोखा आध्यात्मिक आश्रम, जो सच्चे आध्यात्मिक साधकों और सत्य के खोजियों के लिए बनाया गया है। यह आश्रम दुनिया में अपनी तरह का अकेला है। यह शायद दुनिया का पहला ऐसा आश्रम है, जहां सच्चे सत्य-खोजियों को बिना किसी बाध्यता के — सात दिन से लेकर पूरे जीवन तक — रहने के लिए आमंत्रित किया जाता है, केवल आध्यात्मिक विकास और मुक्ति की दिशा में काम करने के उद्देश्य से।

ज़्यादातर जगहों पर आध्यात्मिक शिक्षा शर्तों, समय या बाध्यताओं में बंधी होती है। लेकिन अपनों की कुटिया में, जो सच्चा साधक वास्तव में आध्यात्मिक रूप से आगे बढ़ना चाहता है, उसका अनुशासित आध्यात्मिक सिद्धांतों के अंतर्गत रहने, सीखने और स्वयं को रूपांतरित करने के लिए स्वागत है। आश्रम एक शांत वातावरण और सबसे महत्वपूर्ण, एक जीवित आत्मज्ञानी गुरु का प्रत्यक्ष मार्गदर्शन देता है, साथ ही वे सभी बुनियादी सुविधाएं भी, जो साधक को आंतरिक विकास और आत्म-विकास पर ध्यान लगाने के लिए चाहिए।

फिर भी, आश्रम आराम या निष्क्रिय जीवन की जगह नहीं है। यह सच्चे रूपांतरण की जगह है। जो सच में सीखना और आगे बढ़ना चाहते हैं, उनका स्वागत है, लेकिन जो जड़ बने रहते हैं या आध्यात्मिक रूप से आगे बढ़ना नहीं चाहते, वे वहां नहीं रह सकते। योगी रविकांत जी इसे आश्रम के एक मार्गदर्शक सिद्धांत के द्वारा स्पष्ट रूप से कहते हैं:

“रहो तो साधो।”

इसका अर्थ है कि अगर आप आश्रम में रहना चुनते हैं, तो आपको अपनी आध्यात्मिक प्रगति पर सक्रिय रूप से काम करना होगा। अगर ठहराव है और आंतरिक विकास के लिए कोई सच्चा प्रयास नहीं है, तो स्वाभाविक रूप से आश्रम की ऊर्जा उस व्यक्ति को वहां रहने नहीं देगी।

अपनों की कुटिया उन लोगों के लिए एक शांत स्थान है, जो सच में सत्य और आध्यात्मिक विकास की खोज में हैं। यह एक दुर्लभ अवसर है, जहां साधक सीधे एक आत्मज्ञानी गुरु से सीख सकते हैं और सत्य, ईमानदारी, नैतिक जीवन और निःस्वार्थ सेवा को समर्पित वातावरण में रह सकते हैं।

जो सच में अपना जीवन बदलना और आध्यात्मिक रूप से आगे बढ़ना चाहते हैं, उनके लिए अवसर मौजूद है — एक जीवित गुरु, एक शांत स्थान और कालातीत शिक्षाएं उपलब्ध हैं। इसका लाभ उठाने के लिए केवल सच्ची निष्ठा चाहिए।

आश्रम का पता

अपनों की कुटिया — जठलाना, हरियाणा (यमुना तट)
गाँव जठलाना, पोस्ट जठलाना
तहसील रादौर, जिला यमुनानगर
हरियाणा 135133
मानचित्र
अपनों की कुटिया — अदलपुरा, मध्य प्रदेश (माँ नर्मदा तट)
गांव अदलपुरा, पोस्ट चीचली निमरानी
तहसील कसरावद, जिला खरगोन, पश्चिम निमाड़
मध्य प्रदेश 451660
मानचित्र

संपर्क सूत्र: +91 92441 38241

कुटिया में ठहरने वाले जिज्ञासु के लिए आवश्यक नियम

  1. जिज्ञासु को सर्वप्रथम अपनों की कुटिया में दिये गए व्यक्तिगत विवरण (फॉर्म) को भरना होगा। फॉर्म में दिए गए अपने परिवार के एक सदस्य से बात करवाना आवश्यक होगा।
  2. जिज्ञासु जब तक कुटिया में साधना करेगा, तब तक फोन को बंद रखेगा।
  3. जिज्ञासु केवल आध्यात्मिक प्रश्नों के साथ ही अपनों की कुटिया में रह सकता हैं।
  4. जिज्ञासु का दूसरे किसी से भी बातचीत/ मुस्कुराना सख्त मना हैं। — नोट- अति आवश्यक होने पर प्रबंधक से ही अपनी बात रख सकते हैं।
  5. जिज्ञासु नित्यकर्म के बाद केवल आसन लेकर बरगद के नीचे आत्म चिन्तन के लिए बैठेगा।
  6. जिज्ञासु केवल नाश्ते और भोजन के वक्त ही हॉल में आ सकता हैं।
  7. जिज्ञासु अपने साथ किसी भी तरह का बाहरी खाद्य पदार्थ नहीं ला सकता।
  8. जिज्ञासु को उपयोग की गई चटाई, आसन, कम्बल कुटिया छोडने से पहले धोकर जाना होगा।
  9. जिज्ञासु बिना आज्ञा के नर्मदा तट पर नहीं जा सकता। — नोट- आज्ञा केवल प्रबंधक से ही लेनी होगी।
  10. जिज्ञासु को कुटिया के क्षेत्र में ही रहना होगा।
  11. जिज्ञासु कुटिया में अपना पर्स, फोन, कोई भी कीमती सामान आदि अपने लॉकर में रखकर चाबी स्वयं की जिम्मेदारी में रखें। — नोट- कुटिया की जिज्ञासु के किसी भी तरह के सामान की जिम्मेदारी नहीं रहेगी।
  12. जिज्ञासु कोई भी बाहरी माला-जप, शास्त्र-अध्ययन, डायरी इत्यादि ना करके केवल आत्म-चिंतन ही करें।
  13. योगी जी के चरण- स्पर्श करना या बात-चीत करना सख्त मना हैं। — नोट- सत्संग के समय ही आप अपने आध्यात्मिक प्रश्न पूछ सकते हैं।

अपनों की कुटिया आश्रम — जठलाना, हरियाणा

गुरु जी आश्रम के खेतों मेंआश्रम के खेत और परिसरगुरु जी आश्रम परिसर में

आश्रम की तस्वीरें — अदलपुरा, मध्य प्रदेश

अपनों की कुटिया आश्रम — भवन और आंगनआश्रम भवन और पेड़आश्रम भवन और शेडआश्रम का बरामदाआश्रम भवन — दूसरी ओर सेअपनों की कुटिया आश्रम — सामने से