आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

ध्यान — 331 प्रश्नोत्तर

वे प्रश्नोत्तर जिनके प्रश्न या उत्तर में “ध्यान” शब्द आता है — नए पहले।

मन353 उत्तरध्यान331 उत्तरगुरु2,248 उत्तरकर्म580 उत्तरअहंकार84 उत्तरमृत्यु43 उत्तरपरिवार239 उत्तरसेवा321 उत्तरडर138 उत्तरक्रोध46 उत्तर

P23-0173

गुरु जी, हमें आत्मज्ञान के जो रास्ते पता थे — ध्यान, नाम जाप और मंत्र जाप — आपने उन्हें गलत बता दिया, इससे प्रॉब्लम और बड़ी हो गई है, कोई रास्ता नहीं बचा। क्या अब परमात्मा को खोजना छोड़ दूं?

P23-0171

गुरु जी, मन को कैसे स्थिर किया जाता है?

P23-0167

गुरु जी, नाम देने वाले कहते हैं कि नाम और नामी एक हैं। इसका क्या अर्थ है?

P23-0165

गुरु जी, अपनों की कुटिया से जाने के बाद साधक की घर में दिनचर्या कैसी होनी चाहिए, और लोगों से व्यवहार कैसा हो?

P23-0128

गुरु जी, जैसे बच्चा टॉफी की जिद करता है और मां जानती है कि इससे उसके दांत सड़ेंगे, तो वह उसे धीरे से दूसरे ऑप्शन में लगा देती है — क्या गुरु भी ऐसे नहीं कर सकते?

P23-0117

गुरु जी, जैसे आंख बंद करके बैठते हैं, तो क्या इसको ध्यान नहीं बोला जा सकता? शुरुआती दौर में लोग मूर्ति का या मंत्र का सहारा लेते हैं, लेकिन एक स्थिति होती है जब किसी का सहारा नहीं लिया जाता, अपने आप में रहना होता है — उसको ध्यान बोलना ठीक नहीं रहेगा?

P23-0105

गुरु जी, दिन भर जो कार्य हमारे द्वारा होते हैं, कुछ समय जानते हुए करते हैं, कुछ अनजाने में अचानक होते रहते हैं। तो कोई ऐसी युक्ति हो, कोई सूत्र, कि 24 घंटे हम सजग रहें, जानते हुए करें — आजकल जो सजगता, अवेयरनेस की बात बताई जाती है?

P23-0104

गुरु जी, मालिकपन से सेवक बनना है — तो किनका सेवक बनना है? सेवकपन का भाव कैसे लाएं?

P23-0096

गुरुदेव, यह आत्म तत्व — क्या इसका संख्यात्मक दृष्टिकोण भी है? आत्मा एक है या अनेक? ब्रह्म एक है, परमात्मा एक है, तो आत्मा?

P23-0093

गुरु जी, समझ में तो आता है — शास्त्र, महापुरुषों की वाणी पढ़ते हैं, सब समझ में आ रहा है — लेकिन अपना बनाया हुआ अस्तित्व मिटा नहीं पा रहे। ऐसा क्यों? और ब्रह्म को मानें या जानें?

P23-0086

गुरु जी, एकांत में शांति से अपनी चटाई लेकर बैठते हैं; अभी तक तो हम ध्यान करते थे — अब ध्यान नहीं करना है, तो अब क्या करें? केवल चुपचाप बैठें? अपने आप में ही आनंद है, तो अपने आप को कैसे सोचें?

P23-0085

गुरु जी, कहते हैं कि जगह में खासियत होती है — क्या किसी स्थान में कोई शक्तियां होती हैं?

P23-0077

गुरु जी, आप जो रास्ता दिखा रहे हैं वह तो पहले से हमारे ग्रंथों में लिखा है — अहिंसा, सत्य, अस्तेय, अपरिग्रह; अपरिग्रह का अर्थ है आवश्यकता से अधिक वस्तु का संग्रह ना करें। पहले इतने ईमानदार लोग थे — फिर हमारे देश में लोग इतने भ्रष्ट कैसे हो गए? शिक्षा में हमारी कमी रही, या हमने आवश्यकता से अधिक चाहा?

P23-0075

गुरु जी, जरूरत से ज्यादा बनाना-रखना तो प्रगति है ना? इसे प्रगति क्यों ना कहें?

P23-0070

गुरु जी, क्या सिमरन और ध्यान एक हैं? हम जिस गुरु की शरण में हैं उन्होंने ध्यान करने से मना किया है, केवल सिमरन बताया है — क्या यह सही है?

P23-0050

गुरु जी, एकांत में खान-पान का भी विशेष ध्यान देना पड़ता है क्या? क्या पेट भर भोजन नहीं करना चाहिए?

P23-0023

गुरु जी, ये साधनाएं, विधियां तो स्वयं को जानने के लिए करते हैं — मूल प्रश्न तो यही रहता है कि स्वयं को जानें।

P23-0022

गुरु जी, उपलब्धि के बाद भी लोगों ने भोजन मांगा — भूख लगी, भूख का विचार आया, तभी भोजन मांगा। तो विचार से मुक्त कैसे होते हैं?

P23-0012

गुरु जी, अपना शुद्ध स्वरूप क्या है?

P23-0011

गुरु जी, 'कुछ नहीं चाहिए' के भाव में — जैसे कोई मजदूर है, उसकी रोजी-रोटी, आय — उसमें भाव नहीं होना चाहिए? और परिवार में, घर-गृहस्थी में रहते हुए एकदम 'कुछ नहीं चाहिए' की स्थिति तो नहीं हो सकती।

P23-0005

गुरु जी, जब बात शुरू हो रही थी तो मुझे लगा था कि आप साधना आदि का पूरी तरह निषेध कर रहे हैं, लेकिन अब लग रहा है कि निषेध सिर्फ इसलिए था कि अपरिपक्व व्यक्ति वैसा ना करे। दूसरा, आपने ध्यान का उदाहरण लेकर कहा था कि ध्यान करने वाला और जिसका ध्यान किया जा रहा है, वह बाहरी चीज हो गई; लेकिन वाल्मीकि जी 'मरा मरा' के रूप में ध्यान तो कर ही रहे थे — तो सहायता के लिए उसका उपयोग किया जा सकता है?

P23-0002

तो इसका मतलब महाराज जी, फिर उसके दो पक्ष हो गए — एक तो उन्होंने कर्म को छोड़ दिया, और दूसरा जप को अपनाया? यानी पहले वाले को पूरी तरह करके, उसे अपना आधार बनाकर, तब वे दूसरे वाले की तरफ गए?

P22-0165

गुरु जी, ध्यान के बारे में मेरा प्रश्न है — जैसे गौतम बुद्ध ने ध्यान की विधि की और उस विधि से तर गए; और बैठते हैं तो विचार ही चलते रहते हैं।

P22-0161

गुरु जी, रात को ऑफिस से आए तो ऑटो वाला भी यहां तक आने में डर रहा था कि वापस कैसे जाएगा; हमें भी उसके प्रति अजीब लगा, हमने कहा "भैया, ध्यान से जाना" — क्या इसे भी राग कहेंगे?

P22-0117

गुरु जी, अल्टीमेट तो ध्यान से भी मुक्त होना है, लेकिन हर काम के लिए ध्यान जरूरी है — तो यह कैसे होगा?

P22-0101

गुरु जी, बचपन से हमें सिखाया गया है कि नाश्ता राजा जैसा, दोपहर का भोजन रानी जैसा और रात का भोजन भिखारी जैसा करो; कहा जाता है कि नाश्ता भारी करना चाहिए ताकि दिन भर काम करने की ऊर्जा मिले। यह तो उल्टा है?

P22-0096

गुरु जी, यहां से घर जाने के बाद हमारी दिनचर्या कैसी होनी चाहिए — कम खाना, भोजन, ध्यान, घर पे क्या करना है? थोड़ा इस पर भी प्रकाश डालिए।

P22-0067

गुरु जी, कभी दिमाग में कोई विचार चलता है तो मन उसके साथ एक हो जाता है, फिर उस विचार पर डिसीजन लेने में कन्फ्यूजन आता है — हम सिलेक्शन नहीं कर पाते कि सही क्या है, गलत क्या है।

P22-0051

गुरु जी, धारणा, ध्यान, समाधि क्या है?

P22-0021

महात्मा जी, मैं जब भी परमात्मा का नाम जप करता हूं या ध्यान में होता हूं तो मुझे अपने गुरु के प्रति बुरे विचार आते हैं; ऐसा बार-बार होता है। ऐसा क्यों होता है? मैं इससे मुक्त होना चाहता हूं।

P22-0016

गुरु जी, मैंने 17 साल की उम्र में स्ट्रगल शुरू किया और सब कुछ पाया, फिर भी अब लाइफ बेकार लगने लगी है — अब क्या करूं?

P21-0189

गुरु जी, एक विद्यार्थी इंजीनियरिंग या डॉक्टरी में नहीं जाना चाहता, साधारण BA करना चाहता है; लेकिन घर में सब इंजीनियर हैं, दबाव है — घर वाले इज्जत नहीं देंगे, कंपेयर करेंगे — तो वो दबाव में झूठ बोल देता है कि मैं भी करूंगा। उसे क्या करना चाहिए?

P21-0181

गुरु जी, कर्म सिद्धांत और ज्ञान मार्ग — ये दोनों कैसे जुड़ते हैं, और कैसे हम आत्मज्ञान की तरफ चलें?

P21-0129

गुरु जी, परिवार (कुटुंब) और आध्यात्म — दोनों को साथ लेकर कैसे चलें?

P21-0128

गुरु जी, भक्ति, ज्ञान और ध्यान — इन तीनों में किसे महत्व देना चाहिए? इनमें क्या डिफरेंस है?

P21-0108

गुरु जी, मैं समझा हूं कि बीज में वृक्ष की तरह मेरा कल्याण भी ईमानदारी (100%), सत्कर्म और सत्संग से शुरू होगा, फिर ध्यान और समाधि घटित होंगे — तो धारणा-ध्यान-समाधि कैसे होती है, और सत्य और शिव की स्थिति अलग है या एक?

P21-0107

गुरु जी, आपने कहा था ध्यान करना नहीं है, ध्यान से मुक्त होना है — पर जो चीज पूरी नहीं हुई, ध्यान तो बार-बार उधर ही जाएगा ना?

P21-0089

गुरु जी, आप कहते हो सब कुछ हो रहा है — जब सब कुछ हो रहा है तो हम किससे लड़ें और क्यों लड़ें?

P21-0085

गुरु जी, आपने कहा शब्द पकड़ो, शब्द वहां तक ले जाएगा — पर शब्द जहां से आएगा वहीं तक ले जाएगा ना? शब्द बुद्धि के तल से, मन के तल से निकल रहा है, तो क्या वह उस निराकार तक ले जाएगा जहां कोई शब्द है ही नहीं?

P21-0073

गुरु जी, जब ईश्वर एक है तो सभी महापुरुषों का ज्ञान भिन्न क्यों है — जैसे नाम दान, ब्रह्म ज्ञान, आत्म ज्ञान और सांसों का ध्यान?

P21-0063

गुरु जी, घुटन तो अभी भी है, क्योंकि रहना उन्हीं के साथ है जो इस मार्ग पर नहीं चल रहे — इसी घुटन की वजह से क्या लोग भक्ति मार्ग की तरफ ज्यादा मुड़ जाते हैं?

P21-0052

गुरु जी, शहर लौटकर बीवी-बच्चों के बीच व्यवहारिकता में तो करना ही है — तब क्या करें?

P21-0051

गुरु जी, थोड़ा ध्यान करवाने का समय मिल सकता है?

P21-0040

यानी कान, जीभ और आंख — ये तीन सबसे ज्यादा रस लेते हैं?

P21-0023

क्या सबका स्व एक ही है — जैसे "अहं ब्रह्मास्मि" में सबका एक बोलते हैं?

P21-0014

परमात्मा से आत्मा के अलग होने से लेकर वापस जाने तक की पूरी यात्रा क्या है?

P20-0190

अगर ऐसे ही चलता रहा तो यह चक्र छूट ही नहीं सकता — स्व को पहचानेगा कौन, और छोड़ने के बाद वह फिर पकड़ नहीं लेगा?

P20-0188

इच्छा की परिभाषा क्या है — स्व से हम हटे कैसे?

P20-0174

गुरु जी, आपका "ध्यान तो हर समय घट रहा है" वाला प्रवचन सुनकर आया हूं, बातें समझ में आ रही हैं — अब आगे क्या करना है?

P20-0154

गुरु जी, हंसने, रोने, गुस्से में हॉर्मोन रिलीज होते हैं — ध्यान में बिना कुछ किए जो गहरा नशा-सा, सिर्फ "हूं" का एहसास होता है, क्या वह भी हॉर्मोन या माइंड का गेम है?

P20-0131

अगर कभी सूक्ष्म अहंकार आ जाए तो क्या करें — गुरु के दर पर कैसे टिके रहें?

P20-0044

गुरु जी, बहुत गुरु कहते हैं भीतर जाओ — भीतर जाने का असली अर्थ क्या है? ध्यान शरीर के भीतर लगाना है या बाहर?

P20-0031

गुरु जी, मैंने निश्चय कर लिया है कि मुझे छूटना है — आगे क्या करूं? ध्यान खुली आंखों से करूं या बंद?

P20-0015

गुरु जी, किसी से वाद-विवाद हो जाए तो ध्यान बार-बार उसी पर जाता है — वहां से कैसे हटाएं?

P20-0007

गुरु जी, ईमानदारी कितनी जरूरी है — कभी एक बार बेईमानी कर ली तो क्या फर्क पड़ता है?

P19-0200

गुरु जी, कुटिया या आश्रम में रहते हुए साधक को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

P19-0189

गुरु जी, ध्यान करने के बाद मैं पहले जैसा ही हो जाता हूं और न करूं तो दुख होता है — क्या करूं?

P19-0179

गुरु जी, ध्यान में शिव जी और माता पार्वती की प्रतिमा दिखती है — इसे क्या समझूं?

P19-0178

गुरु जी, ध्यान में मन प्रभु की तरफ नहीं लगता, दैनिक कार्यों की तरफ चला जाता है; घर-परिवार में रहते हुए गहरा ध्यान कैसे करें?

P19-0177

गुरु जी, ध्यान में ध्यान करते हुए जब अच्छाई-बुराई कुछ न मिले, तो ध्यान कहां केंद्रित करें?

P19-0150

गुरु जी, आप साधकों से घंटों ध्यान या कोई साधना क्यों नहीं करवाते? क्या सिर्फ सत्संग से आत्मज्ञान हो सकता है?

P19-0123

गुरु जी, महापुरुषों से अध्यात्म की पीएचडी स्तर की बातें सुनने को मिलती हैं, जबकि हमें तो ए बी सी डी भी नहीं आती। हम अपना आध्यात्मिक स्तर कैसे बढ़ाएं?

P19-0109

गुरु जी, मैं तो मानता हूं कि बाजार में बैठकर भी ध्यान हो सकता है; फिर सत्संग में कोई उठे तो क्या फर्क पड़ता है?

P19-0084

गुरु जी, भगवान और परमात्मा में क्या अंतर है?

P19-0027

गुरु जी, रजनीश (ओशो) ने आत्मज्ञान के लिए मेडिटेशन पर जोर दिया, आप सद्गुण पर बल देते हैं — क्या दोनों साथ लेकर बढ़ा जा सकता है?

P19-0008

गुरु जी, क्या कबीर जी ने कभी किसी को ध्यान करवाया? आज उनके नाम पर ध्यान क्यों करवाया जाता है?

P19-0004

गुरु जी, ध्यान में कान दबाकर या बिना कानों के जो अंदर की धुन (अनहद) सुनाई देती है, वह क्या है?

P18-0197

गुरु जी, जब आपके पास लोग कम आते थे तो क्या आपने सोचा कि ज्ञान देने के लिए आवरण (वेश-भूषा) का सहारा लेना पड़ेगा? आपको इसका जवाब कैसे मिला?

P18-0173

गुरु जी, कभी-कभी ध्यान में ऐसी चीज की कल्पना आती है जिसे हमने कभी देखा ही नहीं — वह तो स्टोर नहीं थी, फिर कैसे आई?

P18-0161

गुरु जी, अगर हम खान-पान पर ध्यान न दें और सिर्फ लोगों से व्यवहार पर ध्यान दें तो क्या मोक्ष मिल सकता है?

P18-0144

गुरु जी, मेरा सबसे ज्यादा लगाव मां से है, हालांकि माता-पिता का झुकाव छोटे भाई की तरफ है; मैं कहता हूं पूरी संपत्ति उसे दे दो, मुझे नहीं चाहिए, मैं अपना कर्तव्य करूंगा — क्या यह ठीक है?

P18-0137

गुरु जी, प्राणायाम के बारे में कुछ बताएं।

P18-0120

गुरु जी, मुझे पहले आत्मज्ञान जैसा अनुभव होता था — प्रश्न उठते ही अंदर से उत्तर मिल जाता था — लेकिन यहां (कुटिया) आने के बाद वह अनुभव खत्म हो गया; ध्यान में भी नहीं मिलता। वह कहां चला गया?

P18-0112

गुरु जी, जिस भाव से हम मार्ग पर निकले थे, क्या वह बाद में बदल सकता है? अगर काम हमेशा उस भाव के अनुसार नहीं हो पाता तो क्या होता है?

P18-0095

गुरु जी, आप कहते हैं जो पाया है वह छोड़ दो — पर गृहस्थ जीवन में तो सब चाहिए, फिर क्या छोड़ें? और "चाहिए" वाले ध्यान से मुक्त हो गए तो दैनिक कार्य कैसे करेंगे?

P18-0094

गुरु जी, ध्यान करते वक्त मन में परेशानी और घबराहट होती है — मन इतने विचार क्यों देता है, और स्थिरता कैसे बने?

P18-0088

गुरु जी, ध्यान में ध्यान करते हुए क्या करना है, परम ध्यान में क्या करना है, और साधना में परीक्षा कब होती है?

P18-0087

गुरु जी, मन भटकता रहता है — क्या कल्पना करना और फिर उस कल्पना को बार-बार देखकर सही निर्णय लेना ही ध्यान है?

P18-0086

गुरु जी, मैं अपना ध्यान कैसे लगाऊं और कैसे पहचानूं कि मैं कौन हूं?

P18-0085

गुरु जी, कुटिया में एक महीना रहकर घर लौटे; एक दिन अच्छा लगा, फिर व्यवहार में प्रतिक्रिया न देने से घुटन होने लगी — क्या संसार में रहना ही बेईमानी है?

P18-0073

गुरु जी, ध्यान विधि करने से काम वासना बहुत बढ़ गई है — इसे नियंत्रित कैसे करें?

P18-0047

गुरु जी, कहा जाता है कि नाम जप से मन पर ठहराव आता है — क्या नाम जप से विचार रुक जाते हैं और पिछले कर्म कटते हैं?

P18-0046

गुरु जी, मैं ध्यान हटाकर सिर्फ नाम पर केंद्रित होकर निरंतर नाम जप कर रहा हूं और सोच को रोक रहा हूं — क्या यह सही है? इसका क्या परिणाम होगा, या यह भटकाव है?

P18-0036

गुरु जी, आपकी साधना का क्रम क्या था — कितने घंटे, कौन-सी साधना, कोई अनुशासन या क्रम था?

P18-0025

गुरु जी, भक्ति, ध्यान, योग और ज्ञान — इनमें से किस मार्ग से जाएं?

P18-0012

गुरु जी, उस समय (आत्मज्ञान की) मन-स्थिति, भाव-स्थिति क्या होती है?

P18-0005

गुरु जी, आज कई जगह फीस भरकर 10 दिन में आत्मज्ञान या ध्यान कराने की बात होती है — इसे कैसे देखें?

P17-0156

गुरु जी, भ्रमण में भोजन और ठहरने के बारे में क्या ध्यान रखना चाहिए?

P17-0155

गुरु जी, आप कहते हैं इस शरीर को साधो — इसका क्या मतलब है?

P17-0145

गुरु जी, मूल से मेरा हटना कैसे हुआ — हम परमात्मा से अलग होकर इस दुनिया में कैसे आए?

P17-0117

गुरु जी, योग किसे कहते हैं? ज्ञान, भक्ति, योग, ध्यान — किस मार्ग से जाएं?

P17-0111

गुरु जी, यहां आकर जो आनंद मिला है, वह छिन ना जाए — जहां भी रहें, किस बात का ध्यान रखें?

P17-0110

गुरु जी, अब तक माला-जप, ध्यान सब किया, ऋषिकेश, बनारस, अयोध्या, द्वारका, उज्जैन सब तीर्थ और आश्रम घूमे, पर मन नहीं लगा। अब क्या करना है?

P17-0053

गुरु जी, मैं पहले विकार में था, अब उससे बाहर हूं; पर दुनिया विकार के पीछे है, तो मुझे लगता है मैं भी वही करूं। विकार छोड़ता हूं तो कुछ करना नहीं पड़ता, फिर लोगों को देखकर दुविधा में अटक जाता हूं — क्या करूं?

P17-0050

गुरु जी, कहा जाता है कि मन ही काल है — इस पर क्या कहेंगे?

P17-0048

गुरु जी, आप जो ध्यान की प्रक्रिया अपने आश्रम में कराते हैं, उसे घर पर कैसे कर सकते हैं? कृपया बताने की कृपा करें।

P17-0045

गुरु जी, मैंने एक बार ध्यान में ओम की साउंड और वाइब्रेशन सुना, अब दोबारा नहीं सुन पाता — मार्गदर्शन करें।

P17-0040

गुरु जी, ध्यान कैसे करें?

P17-0038

गुरु जी, गृहस्थ जीवन में भोजन कैसा रहे? गलत खाने की आदत कैसे छोड़ें? (खाने में बहुत ध्यान जाता है।)

P17-0033

गुरु जी, जो ध्यान मार्ग से साधना करते हैं, उनको पूर्व पापों को काटने के लिए क्या नाम या मंत्र जाप करना आवश्यक है?

P17-0031

गुरु जी, ध्यान करने पर मैं शून्य में नहीं पहुंच पाता। जागने पर विचार कम आते हैं, मगर ध्यान करने बैठूं तो एक विचार जाता है तो दूसरा आ जाता है — ध्यान में विचारहीन कैसे हों?

P17-0030

गुरु जी, साधक की दिनचर्या कैसी होनी चाहिए?

P17-0017

भक्ति मार्ग हो या ज्ञान मार्ग, मैंने अपनी लाइफ में भी देखा है कि लोग रिश्तों वाली आसक्ति उठाकर किसी "गुरु" पर शिफ्ट कर देते हैं, और जिसे गुरु समझा वो उस स्थिति में था ही नहीं — इससे कई जिंदगियों से खिलवाड़ हुआ, जीवन और बखेड़ा हो गया। तो विवेक कैसे रखें कि मैं वहां न फंस जाऊं, कि वो अपनी कामना के लिए मुझे मोहरा तो नहीं बना रहा — गुरु को कैसे पहचानें?

P16-0182

मैं आंखों के आकर्षण के कारण किसी तक पहुंची, फिर उपराम आ गया — रूप ही तो चेंज है, और इसमें मैंने कितना फंसाव कर लिया। अब लगता है यह आंख ही मुझे भ्रमित कर रही है। तो क्या अब मेरा दायित्व यह होना चाहिए…?

P16-0181

तो क्या इसका मतलब यह समझें कि अगर कोई कह रहा है कि यह मेरा शोषण कर रहा है, तो वह भी शोषण करवा रहा है?

P16-0172

(लाइव) कुंडलिनी शक्ति जागृत करने के लिए चक्र-ध्यान कैसे करें? आत्मज्ञान की स्थिति कहां पर बनती है? कहा गया है कि आज्ञा चक्र के बाद जब सहस्रार खुलता है तब आत्मज्ञान होता है।

P16-0167

(लाइव) काम-वासना के शमन के लिए क्या करना चाहिए? जब उपवास करते हैं, तभी काम-वासना ज्यादा क्यों होती है?

P16-0164

(लाइव) ध्यान करते हैं तो माथे पर कुछ आता है; क्या आता है, मालूम नहीं पड़ता।

P16-0140

बीड़ी-चिलम पीने से ध्यान एक जगह एकत्रित हो जाता है; उसके इंतजार में यह एक सहारा है। बीड़ी छोड़नी जरूरी है क्या?

P16-0131

क्या प्रकृति और परमात्मा एक ही हैं या अलग-अलग?

P16-0129

ज्ञान के बाद भी क्या वह बुद्धि का उपयोग करता है? और क्या वह आंतरिक यात्रा करता है?

P16-0125

गुरु जी, इस जवाब से मैं पूरा संतुष्ट नहीं हुआ। मुझे लगता है आप बुद्धि को नकार रहे हैं। यह मैं मान गया कि वह पांचों इंद्रियों से परे है, लेकिन यह समझने के लिए भी तो बुद्धि आवश्यक है ना? अगर आत्मा से परमात्मा की यात्रा करने वाला मंद बुद्धि होगा, तो उसकी यात्रा शुरू ही नहीं होगी। तो क्या इसमें बुद्धि का रोल ही नहीं है?

P16-0095

गुरु जी, ध्यान क्या है?

P16-0075

गुरु जी, चित्त क्या है? यदि सरलता से समझाएं तो अति कृपा होगी।

P16-0068

गुरुदेव, ईमानदारी की क्या परिभाषा है? हर व्यक्ति की ईमानदारी की परिभाषा अलग-अलग है — कृपा करके विस्तार से बताएं।

P16-0057

आत्मज्ञान होने के बाद कौन भोगों की इच्छा करेगा या विवाह का ख्याल करेगा?

P16-0052

गुरुदेव, क्या ईश्वर की पूजा आदि ना करते हुए सिर्फ निष्काम कर्म से उस तक पहुंचा जा सकता है?

P16-0027

आत्मज्ञान की घोषणा करना कब उचित है?

P16-0025

मुझे आत्मज्ञान हो गया है, अब आध्यात्मिक ज्ञान बांटने की इच्छा है, लेकिन मां-पिता सभी खिलाफ हैं। मेरा ना नौकरी में मन है, ना किसी चीज में।

P16-0019

गुरुदेव, भजन और भक्ति में क्या अंतर है? मार्गदर्शन करें। क्या भक्ति द्वारा भी अपने आप में पहुंच सकते हैं?

P16-0012

गुरु जी, मेरा मन काम में नहीं लगता — सिलाई करने में, खाना बनाने में। मंत्र जाप करती हूं, ध्यान करती हूं; जिन गुरु जी ने मंत्र दिया उन्होंने कहा था सब ठीक होगा, लेकिन कुछ नहीं हुआ। क्या करूं?

P16-0005

इतना पढ़ लिया कि पढ़-पढ़ के परेशान हो गया — ऐसा क्यों होता है?

P15-0198

गुरु जी, आप जो बता रहे हो उस तरीके से साधना कर रहे हैं। अब इस स्तर को धीरे-धीरे ऊपर कैसे उठाएं?

P15-0190

ना चाहते हुए भी विचार में गड़बड़ होती रहती है। जो चीज आज तक सीखी है उसे छोड़ना चाहते हैं, पर बार-बार आदत से वही आ जाती है — जैसे स्वास पर नाम का सुमिरन मिला था, अब ध्यान में बैठता हूं तो वह अपने आप चालू हो जाता है। यह छूटेगा कैसे?

P15-0189

इस प्रश्न का उत्तर मैं आपसे चाहता हूं — मैं इस जीवन को और उचित तरीके से कैसे जीऊं?

P15-0188

गुरु जी, दृष्टा और दृश्य को समझाइए।

P15-0184

गुरु जी, आत्म ध्यान और परम ध्यान में क्या अंतर है?

P15-0183

ध्यान की ऊर्जा को कैसे बढ़ाएं?

P15-0182

गुरु जी, बहुत कोशिश करने के बाद भी ध्यान लगाता हूं तो आंखें बंद करने पर अंधेरा ही दिखता है। ध्यान की सही विधि बताइए, कैसे ध्यान सही होगा?

P15-0169

गुरु जी, नाम जप कैसे बढ़ाएं?

P15-0139

गुरुदेव भगवान, विचार जो चलते हैं वह अलग है, और जो मन बताता है वह अलग है?

P15-0120

मेरे भगवान, मैं मन को शरीर रूपी रथ का घोड़ा मानता था, लेकिन आपने बताया कि घोड़ा मन नहीं है, मैं हूं — मिला-जुला के सब कुछ आप ही हो?

P15-0116

गुरुदेव, देखा गया है कि बालक में भी, जिसको अभी उतना बोध नहीं है, क्रोध-लालच दिखते हैं; पशुओं में भी। कई बालक बांटने को तैयार होते हैं, कई नहीं होते। यह कहां से आता है?

P15-0111

आप कहते हैं ज्ञान होने के बाद कोई ध्यान करने की जरूरत नहीं, पर शिव जी तो हमेशा ध्यान में ही रहते हैं?

P15-0105

क्या ज्ञान पाने के बाद भी ध्यान मार्ग जरूरी है?

P15-0088

ध्यान में कंपन, हाथ-पाँव में झटके या वाइब्रेशन होते हैं — कृपया स्पष्ट करें।

P15-0073

अपने आप को कैसे समझें, खुद को कैसे जानें?

P15-0058

ध्यान कैसे करें?

P15-0050

ध्यान में मौत का डर लगता है, छूटने का भय बना रहता है — मार्गदर्शन करें।

P15-0030

कंफर्ट ज़ोन में रहकर क्या ध्यान हो सकता है — स्थान सुरक्षित भी रहे, भंग भी ना हो और ध्यान भी हो जाए?

P15-0014

कैसे पता करें कि ध्यान सही हो रहा है?

P15-0013

मुझे आज्ञा चक्र पर ध्यान लगाते समय घबराहट होने लगी, इसलिए मैंने ध्यान करना बंद कर दिया है।

P15-0006

ध्यान शुरू करते ही ऐसा लगता है जैसे धरती घूमने लगी है, ऐसा क्यों?

P14-0200

ईमानदारी और सत्कर्म से आत्म-शांति तो आ ही जाएगी प्रभु?

P14-0175

गुरु जी, आप दिन में कितने समय ध्यान करते हैं?

P14-0169

अष्टावक्र जी ने जनक जी से कहा कि तू संग-रहित है, निष्क्रिय है, स्वयं-प्रकाशित है, सभी दोषों से परे है — ऐसा ध्यान करता हुआ जो समाधिस्थ हो रहा है, यही तेरे बंधन का कारण है। कृपया समझाइए।

P14-0160

ध्यान में ब्रह्मचर्य का क्या महत्व है?

P14-0155

गुरु जी, आप सबको अपने पास क्यों बुला रहे हो? सबका परिवार छुड़ा रहे हो क्या?

P14-0149

आपके पास हर प्रश्न का जवाब है, और सब सटीक है — ये कैसे?

P14-0109

गुरु जी, शाब्दिक ज्ञान को जीवन में धारण कैसे करें?

P14-0095

गुरु जी, निर्मल प्रेम क्या है?

P14-0088

गुरु जी, ध्यान कौन करता है — मन, शरीर या जीव?

P14-0081

गुरु जी, पहले अवधारणा थी कि ज्ञान के बाद यह माया समाप्त हो जाएगी, परंतु ज्ञान के पश्चात भी अनुभव हुआ कि माया कार्य करती है — ऐसा क्यों?

P14-0075

गुरु जी, ध्यान 24 घंटे का है, पर बुद्ध जैसे लोगों ने तो कुछ घंटे बैठ कर ध्यान किया, तो उपलब्धि हुई?

P14-0074

गुरु जी, ध्यान क्या चीज है? क्या ध्यान की कोई विशेष विधि है, कुछ देर बैठना है?

P14-0067

गुरु जी, आप किस मौज में रहते हैं?

P14-0060

गुरु जी, संकल्प और समर्पण अलग-अलग चीजें हैं — समर्पण में तो आदमी नाव खोल देता है, जिधर जाए?

P14-0043

गुरु जी, कई बार मैं ऐसे आनंद में बैठा रहता हूं — ना कोई चमक, ना कोई विचार — पता नहीं ये कौन सी स्थिति है?

P14-0042

गुरु जी, ध्यान में निर्विचार होना — क्या ये सही है? कभी बैठते हैं तो कोई विचार नहीं, बड़ा गजब का आनंद होता है, उठने का भी मन नहीं करता।

P14-0040

गुरु जी, कुछ गुरु कहते हैं ध्यान में बैठो, अंदर प्रकाश दिखेगा या कुछ सुनाई देगा, उसमें ध्यान लगाओ, फिर बुराइयां छोड़ दो तो निर्विकार हो जाओगे — क्या ऐसा होता है?

P14-0038

गुरु जी, ध्यान में बैठे हुए क्या परमात्मा की इच्छा भी खत्म करनी है? परमात्मा का ध्यान कैसे करें?

P14-0036

गुरु जी, जैसे-जैसे ऊंचाई पर चढ़ते हैं गिरने का खतरा बढ़ता है। हम गिरें ना, इसके लिए क्या ध्यान रखें?

P14-0031

गुरु जी, जीवन में तप का महत्व क्या है? ज्यादातर हम तप, उपवास, व्रत से भागते हैं कि इसकी क्या जरूरत है।

P14-0027

गुरु जी, क्रिया योग ध्यान के बारे में मार्गदर्शन कीजिए।

P13-0147

गुरु जी, जब हम दिल से किसी की सेवा करें और वो हमें बद्दुआ दे, तो क्या वो बद्दुआ लगती है?

P13-0130

गुरुदेव, मेरे पिताजी 2 महीने पहले गुजर गए, लेकिन मुझे आज भी बहुत तकलीफ हो रही है, कहीं मन नहीं लगता है। क्या करूं? मार्ग प्रदर्शित करें।

P13-0127

क्या बिना ध्यान के हम खुद से मिल सकते हैं?

P13-0119

गुरु जी, जरूरत में जीना, मौन, और मौन में प्रयास नहीं — क्या यही सही है?

P13-0109

गुरु जी, आप बोलते हैं कि ध्यान में ध्यान करते चलो — क्या छोड़ना है?

P13-0075

मेरा ओवरऑल प्रश्न यह है कि मन, वचन और कर्म — तीनों से जो भी कर्म मेरे द्वारा हो रहा है, उसमें एक साधक के रूप में टोटल मिलाकर क्या भाव रखूं? क्या उसे साक्षी भाव से चेक करूं? और राग-द्वेष छोड़ने के अलावा अपने आप को क्या टारगेट दूं?

P13-0074

खाना खाने में, नहाने में, घर के रोजमर्रा के काम करने में — एक-एक छोटे कर्म पर मेरा क्या भाव होना चाहिए, ताकि मैं बहिर्मुखता से अंतर्मुखता की तरफ आऊं? और घर वालों के बीच बैठी हूं, तब क्या भाव बनाऊं?

P13-0067

(उड़ीसा से आए एक साधक) बाबा जी, हम कौन हैं, यह समझना है; और रोज अपने अस्तित्व की उस स्थिति में हमेशा कंटिन्यू रहना है और गहरे ध्यान में उतरना है। ध्यान क्या है, और किस तरह करना चाहिए?

P13-0063

कहते हैं ध्यान लगाओ, ध्यान लगाओ — ध्यान लगाएं कैसे? ध्यान क्या है?

P13-0062

साक्षी ध्यान भी इसी को बोलते हैं?

P13-0061

ध्यान की विधियां करने से झटके आने लगे, कान में झींगुर जैसी आवाज आती है, पीठ पर चींटी रेंगने जैसा लगता है, कंधे में कुछ रेंगता लगता है — यह सब क्या है, और इसका समाधान क्या है?

P13-0060

गुरुदेव, ध्यान में ध्यान कैसे करना है? जब से मैं यहां आया हूं और आपने मुझे बताया, तब से ध्यान में ध्यान हो नहीं पा रहा; पहले विधियां करता था, उनसे कोई लाभ नहीं मिला।

P13-0058

हम जैसे नवयुवक अभी शुरुआत में हैं; घर वालों की इच्छा है, शादी की बात चल रही है, उसमें टकराव आ जाता है। हम परमात्मा को पाना चाहते हैं — तो शादी करें या न करें? यही कंफ्यूजन है; अगर इसे छोड़ दिया और वो न मिला तो?

P13-0011

योगी जी, मैं ध्यान में तरक्की करूं, कृपया आशीर्वाद दीजिए।

P12-0159

पहले मैं ध्यान यहां-वहां सब लगाता था। अब बस बैठा रहता हूं, तो पैर पूरा सुन्न हो जाता है, कान में गुंजन सुनाई देता है — ये अनुभव मैं देखता नहीं, पर होते हैं। इनका क्या?

P12-0157

(गीता का हवाला देकर) गीता में तो भगवान ने अर्जुन को ध्यान करने की बात कही है — तो?

P12-0152

मेरे अंदर एक आवाज आती है, सपने जैसी — ध्यान में कुछ बजता हुआ सुनाई देता है। (पहले जो ध्यान करता था, वो भी अब छोड़ दिया, अब बस बैठा रहता हूं; एक बार हेडफोन लगाया तब नोटिस हुआ कि कुछ बज रहा है।) इसका क्या करूं?

P12-0151

आत्म-उत्थान के लिए हम और क्या कर सकते हैं? अपने अंदर ऐसा क्या बदलाव करूं कि मुझे उसकी एक झलक मिल जाए, या मैं ध्यान में प्रवेश कर पाऊं — मैंने अब तक बहुत प्रयास किए, पर ध्यान में प्रवेश ही नहीं होता।

P12-0148

हम बोलते हैं कि हमारे कर्म निर्धारित होते हैं — जो भगवान ने लिखा है वही होगा, हमारे हाथ में कुछ नहीं, चाहे दुख हो या सुख। तो क्या कर्म पहले से ही निर्धारित होते हैं?

P12-0146

गुरु जी, आपने जो कहा था — जो था, है और रहेगा — क्या उसको अपना लें?

P12-0143

(एक साधक जो विपासना सेंटर भी जा चुके थे) गुरु जी, ध्यान को लगाया कैसे जाए, उसे कंटिन्यू कैसे रखा जाए? मैं दिमागी शांति के लिए ध्यान करना चाहता हूं।

P12-0128

योगी जी, आप जो कह रहे हो वो समझ में आ रहा है कि हम अपने आप को स्थापित करना चाह रहे हैं। लेकिन बचपन से हमें सिखाया गया कि बांटकर खाओ, सामने वाले के मांगने से पहले ही ऑफर कर दो। तो क्या एक साधक-जिज्ञासु के रूप में मुझे ये सारे पैटर्न बदलने पड़ेंगे?

P12-0111

मुझे बचपन से यही सिखाया गया है। अगर मेरे साथ मेरा सीनियर है और उसे सामने वाले की भूख नहीं दिख रही, तो लगता है मेरा बाप या मेरा गुरु कहेगा कि तुझे क्यों नहीं दिखी, तेरे अंदर मानवता क्यों नहीं जगी? कई बार डांट भी पड़ी कि तू अकेला ही पेट भर रहा है। तो मैं कौन सा करूं, कौन सा ना करूं?

P12-0100

मैं ओशो की वीडियो सुनते-सुनते ध्यान मार्ग पर चल पड़ा और ध्यान करते-करते मुझे बहुत गहरा आनंद अनुभव हुआ। अब सबसे बड़ा कष्ट यह है कि वह आनंद मैं सबको बताना चाहता हूं, पर बता नहीं पा रहा — ताकि लोग जो आनंद नशे में खोज रहे हैं, वह योग में खोजें। मार्गदर्शन करें।

P12-0087

सेवा से समय मिलने पर अपने स्वरूप में ध्यान करना हो, तो शरीर में किस स्थान पर ध्यान करना चाहिए — हृदय, आज्ञा चक्र, सहस्रार आदि?

P12-0080

सत्कर्म-ईमानदारी करते हैं, आपके सत्संग सुनते हैं, ध्यान में बैठते हैं — तो क्या गुरु मंत्र जपना जरूरी है?

P12-0060

"ध्यान में ध्यान" का मतलब क्या होता है?

P12-0046

ध्यान में क्या अनुभव हुआ, वह याद नहीं रहता।

P12-0044

ध्यान करने और चिंतन करने में क्या अंतर है? क्या ध्यान करना लाभदायक नहीं है?

P12-0032

ध्यान करते समय मन बोलता है कि यह सब करने से क्या फायदा? यह बात सुनकर भी हम ध्यान कैसे कर सकते हैं?

P11-0199

ध्यान से आनंद की ओर कैसे बढ़ूं?

P11-0168

सब कहते हैं ध्यान में जो विचार आएं उन्हें देखो, दृष्टा बनो — पर दृष्टा बना नहीं जा रहा। 15 साल से एक बात (चोट) है जो जा ही नहीं रही; सात समुंदर पार भागा, फिर भी पीछा नहीं छोड़ा। क्या करूं?

P11-0139

(एक साधक) धन की कमी नहीं, पर पत्नी नहीं रही, बच्चे विदेश में हैं, घर भूत बंगला लगता है। अध्यात्म में भी भ्रम ही भ्रम दिखता है; जिसके पास गया, उसने लूट लिया। और बच्चे कहते हैं धन भी मत खर्च करो। जीने का आधार ही नहीं है, क्या करूं?

P11-0132

मैं अकेले में विचार देख रहा था, तो देखा कि मैं खुद ही गलत विचार कर रहा था। पता चलते ही मैंने नाम जप किया और ध्यान डायवर्ट हो गया। क्या यह नॉर्मल है?

P11-0084

बचपन की कई बातें बड़े होकर भूल जाते हैं, पर कुछ चीजें 15-20 साल बाद भी नहीं निकलतीं; कहीं दिख जाएं तो और ज्यादा होता है। वे कब खत्म होंगी?

P11-0024

मैंने घर वालों से कहा है कि मेरे लिए किसी प्लॉट में एक कुटिया बनवा दो, उसमें रहकर साधना करूंगी।

P10-0191

गुरु जी, आज्ञा चक्र जागृत होने की स्थिति में मुझे क्या सावधानी बरतनी चाहिए और किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए?

P10-0190

गुरुदेव, मैं एक महीने से नियमित साधना और ध्यान कर रहा हूं। इस दौरान मेरी रीढ़ की हड्डी में बिजली जैसी गर्माहट और शरीर में चींटियां चलने का निरंतर अनुभव हो रहा है। कृपया मार्गदर्शन करें।

P10-0179

गुरु जी, मैं तीन साल से ध्यान करती हूं, परंतु फिर भी दुखी हूं। घर से निकल नहीं पाती। मैं इस दलदल से निकलना चाहती हूं। कृपया मार्गदर्शन करें।

P10-0160

क्या आपके भरण-पोषण का ध्यान भगवान रखते हैं?

P10-0088

गुरुदेव, डॉक्टर ने कहा कि हकलाहट कम करने के लिए बोलना शुरू करना होगा। क्या मैं लोगों के विचारों पर तर्क-वितर्क कर सकता हूं, ताकि वे मुझे गुस्से में हकला कहें और धीरे-धीरे मेरी हकलाहट खत्म हो जाए?

P10-0079

गुरुवर, जो पैसे वाली घटना आपने बताई थी, वह मेरे साथ परसों हुई। मुझे लगा कि कम पैसे करने वाली बात गलत है और मैंने पूरे पैसे उसको दे दिए।

P10-0035

कुछ छोटे-छोटे प्रयोग बता दीजिए, जिससे ध्यान प्रकट हो जाए।

P10-0029

मुझे आप जैसा मेहनती बनना है। ध्यान इधर-उधर जाएगा। क्या मन एक समय सिर्फ एक काम कर सकता है? मन पांच इंद्रियों से जुड़ा है, इसलिए क्या धारणा भी एक साथ कई हो सकती है?

P10-0012

साक्षी की स्थिति सदा नहीं रहती। कभी-कभी आती है, कभी नहीं। मन चाहता है सब ओर भागना। उसे बार-बार थामने से साधना में भी ऊब पैदा होती है। यह क्या है? कैसे छुटकारा हो? एक तरफ ध्यान नहीं हो पा रहा हूं। क्या करूं?

P9-0180

जिन गुरु ने आरंभ में ध्यान का मार्गदर्शन दिया था, उन्होंने कहा था कि न आत्मा का ध्यान करना है, न परमात्मा का ध्यान करना है। यह बात क्लियर नहीं हुई। ऋषिकेश, गंगोत्री, फिर कोरोना, वेदांत श्रवण के बीच साधना बिगड़ गई। पहले तीन-तीन घंटे एक आसन में बैठ लेता था, पद्मासन भी सिद्ध हो गया, फिर मन डिस्टर्ब हो गया। ना आत्मा का ध्यान, ना परमात्मा का ध्यान, इसका क्या अर्थ है? और आसन सिद्ध करने से क्या होता है?

P9-0176

गुरु जी, मैं नेपाल से हूं। क्या मैं कुछ हफ्ते अपनी वैयक्तिक समस्या सुलझाने आपके सानिध्य में आकर गहन साधना और ध्यान में रह सकता हूं?

P9-0130

गुरुदेव, गृहस्थ में रहते हुए साधना कैसे की जाए? ध्यान और साधना कैसे करें?

P9-0077

अगर कोई मुझे खुद छोड़कर आगे बढ़ना चाहता है, तो जब वह मुझे छोड़ रहा है, मैं उसे क्यों नहीं छोड़ पा रहा हूं? मैं उसे क्यों पुकार रहा हूं?

P9-0074

यदि व्यक्ति भोग, भोजन, बेईमानी और दुष्कर्म में ही अपना जीवन खत्म कर दे, तो क्या अगला शरीर उसे पशु का मिलेगा?

P9-0046

आपने प्रत्यक्ष ज्ञान पर पुस्तक लिखी। अहिंसा कब लिखेंगे, सहनता कब लिखेंगे?

P8-0196

क्या ध्यान ही दृष्टा है?

P8-0190

धारणा, ध्यान और समाधि। धारणा, ध्यान, समाधि, तुम और ब्रह्म। इसका क्या अर्थ है? आत्मज्ञान और ब्रह्मज्ञान में क्या फर्क है?

P8-0189

ध्यान में बहुत ताकत हो तो ध्यान में क्या करना चाहिए? कहते हैं गौतम बुद्ध ने ध्यान लगाया तो तर गए, हनुमान जी ने ध्यान लगाया तो तर गए। ध्यान में क्या होना चाहिए?

P8-0186

ध्यान करता हूं, लेकिन ध्यान में जी नहीं लगता। पूजा-भक्ति में भी जी नहीं लगता। अच्छा कर्म करने में जी लगता है। तो इससे क्या आत्मज्ञान हो जाएगा?

P8-0165

ध्यान करने का मन होता है। एक अजीब भाव रहता है। कहते हैं करो, लेकिन चुनाव करते समय कर्ता फिर खड़ा हो जाता है। कर्ता का भाव कैसे न रहे?

P8-0156

ध्यान करने का मन होता है, पर एक अजीब सा भय बना रहता है, लगता है कोई है, सर्प है। क्या करें?

P8-0124

आप लोग कौन सा ध्यान करते हो? बैठकर जो किया जाता है, क्या वही ध्यान है?

P8-0117

आप कौन सा ध्यान करते हो?

P8-0095

साधना को ईमानदारी से करना भी तो ईमानदारी है न? और क्या किसी पर भरोसा करके मार्ग पर चलना चाहिए, जबकि बताने वाला खुद नहीं पहुंचा?

P8-0091

शिष्य का गुरु के प्रति जितना समर्पण होता है, क्या गुरु का समय और ध्यान भी उसके प्रति उतना अधिक हो जाता है? ऐसे में अन्य साधक, जो गुरु के प्रति कम लगाव रखते हैं, उनके मन में ऐसी भावना पैदा हो जाती है।

P8-0024

बैठे-बैठे आत्मचिंतन करने पर ऐसी स्थिति भी होती है कि खुद का ध्यान ही नहीं कर पाते। क्या करें?

P8-0020

ध्यान करता हूं। मेरा आज्ञा चक्र पकड़ जाता है। क्या करूं?

P7-0188

आपका सत्संग सुनता हूं, तो आत्मज्ञान का अनुभव होने लगा है। आपके बताए अनुसार ध्यान में कुछ समय बैठने के बाद अलग-अलग क्रियाएं धीरे-धीरे खुलने लगती हैं। तब क्या करें? अगर बर्दाश्त नहीं हो रहा, तो?

P7-0185

ध्यान में क्या रखना चाहिए? हम बैठे-बैठे सोचते नहीं। आत्मिक चिंतन किसे कहें?

P7-0180

हमारे अंदर जो छुपा हुआ है, उसे पूरी तरह कैसे छोड़ें?

P7-0172

उनसे नाराज होकर दुखी होता हूं। समझ नहीं आ रहा। क्या ऐसे आध्यात्मिक मार्ग में नीचे गिर जाएंगे?

P7-0161

मैं इस कुटिया को अपनी मानता हूं। छोटी-छोटी बिगड़ने वाली चीजें, जो औरों को नहीं दिखतीं, उन पर ध्यान रखता हूं। पहले लगता था लोग मेरे तरीके से नहीं कर रहे, गलत लगता था। अब समझ आया कि सबकी समझ अपनी है। खाना बनाने में मन लगता है। सारा छोड़ दूं तो कमजोरी आ जाएगी, इसलिए अपना काम भी करता रहता हूं। बोलचाल में गलती हो जाती है। यह कुटिया किसकी है, और यहां कैसे रहें?

P7-0155

कभी-कभी ध्यान होता है, तो कोई कहती है कि आंख खोल लेती हूं तो अपनी ऊर्जा बाहर निकल जाती है। क्या ध्यान में आंख खुलने से ऊर्जा चली जाती है?

P7-0153

चिंतन क्या होता है, यह मैं बीच में पूछना चाहता था। आप किसी और से बात कर रहे थे, तब पूछ लिया। अभी पूछ लें क्या?

P7-0152

अहम भाव को पूरी तरह कैसे खत्म करें? आपने कहा था कि दूसरों से अपने हिसाब से काम लेने की उम्मीद छोड़ दो, उससे आधी समस्या हल हुई। पूरी तरह अहम कैसे मिटे? काम, क्रोध, मद, लोभ, मोह में काम किसे कहते हैं, कामना को या वासना को? मोह और लोभ किस स्थिति में होते हैं? इन्हीं दो पर सबसे ज्यादा संदेह रहता है।

P7-0113

गुरु जी, क्या अवधूत की स्थिति आने से पहले मुझे मालूम पड़ जाए? अगर हाँ, तो उस समय क्या करें?

P7-0104

मैं शिक्षक रही, बाहर से जीवन में कमी नहीं रही। अब बहू बेटे को देखती हूं। उनकी जिंदगी अच्छी है, पर कंप्रोमाइज बहुत कम है। हमने नीचे से मेहनत की, उन्हें बिना मेहनत सब मिल गया। क्या करें? बहू कहती है हम भी चलेंगे। उन्हें यहां लाना चाहिए था क्या? घर पर समय कैसे दें, जब बात नहीं सुनते और दूरियां बढ़ जाती हैं?

P7-0093

शरीर को कैसे स्वस्थ रखें, ताकि जहां धन नहीं, शारीरिक बल चाहिए, वहां सेवा कर सकें? दिनचर्या और खानपान कैसा हो? जोड़ों का दर्द उम्र के साथ हो रहा है। और कहीं सहयोग दें तो क्या देखें? पारदर्शिता कहां हो?

P7-0090

निवेदन है। ध्यान में आपका प्रवचन सरस होता है, फिर यहां से वहां अचानक पैर पड़ता है, खड़ा नहीं रहा जाता। जब ध्यान में बैठते हैं, तो क्या श्वास के साथ ओम की ध्वनि करनी चाहिए? क्या मानसिक ओम जाप करना चाहिए? और ये पैर पड़ना किस कारण हो रहा है, पहले नहीं पड़ता था?

P7-0084

चक्कर आ रहा है, इसलिए बैठ गए। थक गए थे। देखभाल करना आपकी जवाबदारी है। अगर कुछ हो गया, तो देखभाल करना कर्तव्य है। फिर भी जब सब खड़े हों, तो क्या बैठना ठीक है?

P7-0080

अच्छा कर्म करना है, ऐसा कहा गया। कर्म भी अच्छा और बुरा होता है, ये बात समझ में आ रही है। लेकिन धर्म और अधर्म क्या होता है? रास्ते में किसी को खाना दे दिया, तो धर्म लग रहा है। अनदेखा कर दिया, तो अधर्म। अगर उसे अच्छा या बुरा मान लिया, तो अटैचमेंट हो जाएगा, फिर मोह हो जाएगा। क्या उसे अपना कर्तव्य मानकर करना चाहिए, न अच्छा मानें न बुरा, ताकि फंसें नहीं? भाव ये है कि अच्छा-अच्छा कहते हुए मैं भोग में न फंस जाऊं। मुझे मुक्ति का मार्ग चाहिए, बंधन नहीं। मैं मानवता और कर्तव्य से काम करूं, पर अच्छा कहकर वहीं न अटक जाऊं।

P7-0073

किसी को सुधारने के लिए सुधारक को कितनी मेहनत करनी पड़ती है? जब लगता है कि कोई गलत काम कर रहा है, उसका जीवन भी खराब हो रहा है, रिजल्ट नहीं आ रहे, और वो काम अननेसेसरी है, जबकि उसे लगता है कि वो बहुत मेहनत कर रहा है, और हम ऊर्जा और समय देकर सलाह देते हैं, तो वो कह देता है कि सलाह की जरूरत नहीं। वो और बिगड़ जाता है, कई बार लड़ाई हो जाती है। सुधारक का स्वभाव है कि वो बोलता रहता है, पूरा दम लगाता है। उसे खुद कुछ नहीं चाहिए। वो ये देख रहा है कि अगर काम इस ढंग से हो जाए तो बहुत अच्छे रिजल्ट आ जाएंगे, पर सामने वाला समझ नहीं पा रहा। आदत शुरू में किसी कारण से बनी होगी, जैसे उस समय गर्मी हो या ऑफिस जाना हो, इसलिए लगा लिया। पर दो प्रश्न आने चाहिए, मैंने ये क्यों किया, और वो कारण हट जाए तो ये क्यों नहीं हटेगा? जैसे हेमंत खुद गाड़ी चला रहा है, टायर में हवा कम है, ये फील भी हो रहा है, पेट्रोल पंप पर तेल भरवा लिया, और हवा भरवाना भूल गया। जब खुद दिक्कत महसूस हो रही हो, हल भी पता हो, और कोई बता भी रहा हो, तब भी व्यक्ति हल क्यों नहीं करना चाहता? इसका क्या कारण है?

P7-0063

कोई कह रहा था कि आपके पास जाने से भटक जाओगे, कुछ नहीं मिलेगा, फालतू में जा रहे हो। पाइपलाइन के विवाद और गालियों की बात भी हुई। लाइव में गालियाँ मिलती हैं, क्या करें? क्या उसकी बात सही थी?

P7-0048

नाम जप एक प्रकार का ध्यान ही है। इसे क्यों करना चाहिए?

P7-0010

आप ध्यान को छोड़ने के लिए कहते हो। बिना किसी विधि के कैसे आगे बढ़ सकते हैं?

P7-0003

किस साधना से आत्मसाक्षात्कार हुआ? क्या ध्यान किया है? बताइए। गुरु से ज्ञान लो और आगे बढ़ो, इसका मतलब क्या है?

P6-0197

आदित्य डेनमार्क से पूछते हैं, ध्यान करने के लिए सिद्धासन में बैठना जरूरी है क्या? काफी कमर दर्द है, और लंबे समय तक बैठना नहीं होता।

P6-0188

प्रियंका गुप्ता पूछती हैं, जब आपने ज्ञान पाया तो क्या ध्यान और साधना की थी? कारोबार में सौ प्रतिशत झूठ बोलना पड़ता है, सत्कर्म नहीं हो पाता। क्या ध्यान परमात्मा को पाने का मार्ग नहीं है?

P6-0170

शिवाजी पूछते हैं, जीवन में सफल होने के लिए ध्यान करें या नाम स्मरण?

P6-0159

रिश्तेदार हमेशा हमारे परिवार की बर्बादी की सोचते हैं। मैं तेईस साल का हूँ। उनकी नकारात्मकता से कैसे बचकर रहूँ? क्या योग और ध्यान काफी है?

P6-0146

ध्यान में जब हम आंख बंद करते हैं, तो अंधेरा हो जाता है। उस समय क्या होगा? जहां हम ध्यान करें, वहां क्या रखना चाहिए?

P6-0125

विचार, चित्त और चेतना में क्या फर्क है? और साधना में हमें क्या प्रधानता देनी है?

P6-0102

नागपुर से आई मां पूछती हैं, घर का कमरा छोटा है, सब लोग उसी में रहते हैं, नीचे बैठने की जगह नहीं। क्या पलंग पर बैठकर ध्यान कर सकती हूं? घर पर मौन भी नहीं हो पाता।

P6-0088

हमें अपनी जमीन के लिए लड़ना चाहिए या नहीं लड़ना चाहिए? क्योंकि आत्मकल्याण करना है। नहीं लड़े तो ध्यान उसी जमीन में ही रहेगा।

P6-0079

अगर एक व्यक्ति केवल फोटो लगाकर माला जपे और दूसरा काम में हाथ बंटाए, तो प्रसन्नता किस पर होगी? शरीर मिल जाने से ही क्या मनुष्य हो गए? मानव और जानवर में क्या अंतर है, और बेईमानी से फंसे हुए को छुटकारा कैसे मिलता है?

P6-0078

मेरे अंदर अब संकल्प नहीं चलता। जहां होती हूं, वहीं उपस्थित होती हूं। यह कौन सी स्थिति है, आगे कितना बढ़ना है, और बैठते समय क्या करना चाहिए? तीन दिन तक आंख का दृश्य रहा, रीढ़ की हड्डी से रोशनी ऊपर चढ़ी, सहस्रार पर शिव दिखे, फिर आज्ञा चक्र से देवी-देवता निकलते रहे, और शरीर में ऊर्जा घूमती है। इनका क्या अर्थ है? क्या फिर से विराट स्वरूप वाली पुरानी स्थिति में लौटना चाहिए?

P6-0077

जो परिवार छोड़कर केवल ध्यान लगाता है, आकाशवृत्ति से रहता है, धन नहीं जोड़ता, उसे गाली और मार भी मिलती है। उसका क्या होता है? कृष्ण ने अर्जुन को आत्मभाव में टिकने के लिए भी कहा था, तो कर्म का सिद्धांत क्यों बताया? अर्जुन आत्म तत्व में कैसे स्थिर हुए? और क्या मैं शुद्ध आत्मा हूं कहना भी एक विधि है, जिससे कल्याण नहीं होता?

P6-0076

आज्ञा चक्र पर अंतरचक्षु से अपने को देखकर यह भाव बनाया जाता है कि मैं एक आत्मा हूं, और उसी भाव में टिके रहने की कोशिश की जाती है, ताकि आत्मदर्शन हो। क्या यह तरीका ठीक है? क्या विराट रूप आत्मा के अंदर समा सकता है? और क्या मैं शुद्ध आत्मा हूं, मैं पवित्र आत्मा हूं, ऐसा कहते रहने से मनुष्य पवित्र हो जाता है?

P6-0066

बाबा का प्रश्न है कि आत्मिक बल कैसे बढ़ाएं? उन्हें पहले एक साल का समय दिया गया था।

P6-0062

जब साधक आत्मचिंतन के लिए बैठता है, तो क्या चिंतन करे, क्या मनन करे, क्या सोच-विचार करे, जिससे आत्मचिंतन हो, आगे उन्नति हो, आत्मकल्याण हो और तत्व का अनुभव हो जाए? वीडियो बीच में कट जाते हैं, इसलिए जो सोलह बातें बताई जाती हैं, उनका एक छोटा पैंफलेट या पुस्तक हो, जिसे जेब में रखकर बार-बार देख सकूं, तो ज्यादा लाभ हो। मैं झुंझुनू के पास से आया हूं। आज सोलहवां दिन है। ग्रंथों में पढ़ा है कि आत्मा है, पूर्ण है, पर वह ज्ञान अनुभव में कैसे उतरे? घर और संबंधों का चिंतन चलता रहता है। बैठकर ऐसा क्या सोचूं, क्या मनन करूं, कि मूल की ओर बढ़ूं और अनुभव हो जाए?

P6-0054

योगी जी नमन। पंजाब से एक बहन है, छह महीने पहले शादी हुई। डेढ़ साल पहले भाई को वीडियो मिली, उनकी रुचि थी, बहन का यह मार्ग नहीं था। कुटिया आने से पहले बहन कहती थी कि मैं बहुत बातें करती हूं, मैं यहां रह नहीं पाऊंगी। फिर भी नियम ऐसे सहज स्वीकार हो गए कि नियम लगे ही नहीं। बैठने का कोई काम नहीं, फिर भी पूरे समय सहज बैठी रहती है, किसी को देखती नहीं। भाई की ओवरथिंकिंग छूट गई, बहन वीडियो कम सुनती है, और दोनों निरंतर नियम में हैं। जिज्ञासा यह है कि एक जीवात्मा अपनी यात्रा के लिए इतनी उत्सुक कैसे हो जाती है? किस मोड़ से अपने आप को निकालना चाहती है? प्रत्यक्ष ज्ञान निमित्त बना, शादी हुई, और ऐसी जगह आना जैसे यह बहुत आवश्यक हो। यह संभव कैसे हो पाया? क्या वह कोरे कागज की तरह समझ रही है? और जो पहले कुछ पढ़कर या कोई प्रक्रिया करके आता है, उसका मन तुलना में लग जाता है, यहां ऐसा क्यों नहीं, वैसा क्यों नहीं, कुछ हो नहीं रहा, इतने दिन हो गए, तो क्या पिछला छोड़कर यहीं समझना चाहिए?

P6-0052

प्रश्न पूछते पूछते जब उत्तर मिल चुके तो ध्यान एक पत्ते पर चला गया। हाथ पत्ता छूने लगा। लगा कि प्रकृति ने यह उदाहरण खुद खड़ा कर दिया, नहीं तो यह समझ पैदा ही नहीं होती। उस समय विचार नहीं उठा, आंख ने देखा और हाथ उधर चला गया। प्रतिदिन खाना खाते समय भी हाथ का निवाला अपने आप मुंह तक चला जाता है, शरीर से अपने आप। क्या बिना विचार के यह क्रिया हो जाती है?

P6-0048

आपने एक संकल्प कहा है कि निर्विकार होना है। निर्विकार कैसे होऊंगा, और विकार बन कैसे रहे हैं? बेईमानी छोड़ दूं तो आगे बनना बंद होगा, पर पिछला जो जमा किया है वह कैसे खटेगा? बेईमानी से श्राप मिला, तो सत्कर्म और जरूरतमंद की सेवा से क्या मिलेगा? प्रतिदिन जो विकार हो रहे हैं, उन पर हर क्षण कैसे ध्यान रखूं? प्रश्न पर प्रश्न मन उठाता रहता है, उन्हें ज्यादा नहीं उठने देना है या नहीं?

P6-0045

स्वप्न, जागृत और सुषुप्ति ये तीन अवस्थाएं हैं। जो आत्मज्ञानी पुरुष हैं, क्या उन्हें भी वैसे ही स्वप्न आते हैं जैसे हमें दिन भर की क्रियाओं से, या पहले कभी हुई बातों से आते हैं? किसी और के सानिध्य में सुना है कि स्वप्न आते ही नहीं। यहां आने से पहले मैं किसी और से जुड़ा था, अभी भी जुड़ा हूं, और उनका कहना यही है। तुलना करता घूम रहा हूं। ध्यान और साधना का मार्ग वे बताते हैं, विचार जहां फंसे हैं वहां टीवी स्क्रीन की तरह चित्र चलता है। इस प्रश्न का उत्तर चाहिए, नहीं तो भीतर प्रश्नचिह्न बना रहता है।

P6-0043

समझ बढ़ाने की बात हुई, पर समझ अपने हाथ में है ही नहीं। हाथ में होती तो कब का विकसित कर लिया होता। जिज्ञासा भी भीतर से अपने आप उपजती है, विचार अपने आप उठता है, और किसी समय कोई विचार आता ही नहीं। फिर तो चाहत हो गई, और चाहतों में फंस जाएंगे। एक संकल्प छोड़ने के लिए क्या करना है?

P6-0041

जीवात्मा का नाम इसलिए पड़ गया कि आत्मा ने जीव शरीर ग्रहण किया। कोई हृदय चक्र को आत्मा का निवास कहता है, कोई और जगह ध्यान करवाता है, कोई कपाल में बताता है। एक योगी का प्रैक्टिकल यह था कि आत्मा का शरीर में निवास स्थान नहीं है, सूरज की किरण की तरह केवल एक किरण पड़ रही है और शरीर क्रिया कर रहा है, आत्मा शरीर में है ही नहीं। इतनी बातें सुनकर उथल पुथल मचती है। असल में आत्मा कहां है? जब नाम ही नहीं दिया जा सकता तो मान लो क्यों कहा जाता है? मानना और जानना में मैं किस प्रक्रिया में हूं? मानने की अवधि कितनी है, और मांग के हिसाब से समय कितना लगता है?

P6-0023

घंटों ध्यान बैठने से आचरण बदलेगा? कर्म तो कर ही रहे हैं।

P6-0014

पांचवां वेद गुरु को बताया — गुरु की महिमा कैसे समझें?

P5-0199

ध्यान लगने लगे तो क्या-क्या बदलाव नजर आते हैं?

P5-0174

आंतरिक शक्ति घर में ध्यान से बढ़ाई जा सकती है? कुंडलिनी कैसे दिखती है?

P5-0171

ध्यान-शाकाहारी की बात पर लोग मजाक बनाएं तो क्या उन्हें त्याग दें?

P5-0170

पवित्र कैसे करें?

P5-0156

ध्यान में सूक्ष्म शरीर बाहर निकलता है, दिल की धड़कन बढ़ती है, ऊंचाई से डर लगता है, आंखें खुल जाती हैं — मिटने का भय है। क्या करें?

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ध्यान के लिए शरीर की पवित्रता जरूरी है?

P5-0143

प्रपंच में रहकर प्रत्यक्ष ज्ञान/आत्मज्ञान कैसे? पुस्तक है? नाम-दम लिया पर आपका सत्संग अच्छा — रास्ता? सांस/मंत्र ही ध्यान?

P5-0141

संत नाम-दान देते हैं, गीता/आप कर्म कहते हो — माला-चैटिंग क्या करूं?

P5-0140

भोग की इच्छा भी है और भोग से मुक्ति की भी — कौन सा रास्ता? शादी करूं या नहीं?

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विचार आते हैं — गलत-सही क्या? उनके साथ क्या करें?

P5-0132

आत्मिक कल्याण चाहने वालों को विशेष क्या ध्यान देना चाहिए?

P5-0130

ध्यान में ध्यान कैसे? रात को ध्यान? झटके लगते हैं? ईश्वर की परिभाषा?

P5-0124

युवा उम्र में ध्यान जाना चाहिए? पैसे के साथ साधना कैसे? आलस साधना में कैसे रुकावट?

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ध्यान में धारणा किसकी? ईमानदारी विस्तृत में क्या है?

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मन पर नियंत्रण कैसे हो?

P5-0117

आत्मज्ञान के बाद भी कर्म/पाप-पुण्य भोग बाकी रहता है क्या? ईमानदारी क्या है कैसे करें? साधना कैसे करें? योग्यता से अधिक का मतलब?

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कुटिया के नियम क्या हैं — मोबाइल, भोजन, साधना?

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ईमानदारी से चल रहे हैं पर अड़चनें आती हैं, मन अशांत — क्या करें? निगेटिव थॉट्स आते रहते हैं।

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यहां व्यवस्था में क्या कमी है? एडजस्ट करना पड़ता है क्या?

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साधक के लिए सबसे जरूरी बात क्या है? अपनों की कुटिया में रहने के नियम क्या हैं?

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जब घुटन-बेचैनी हो और कुछ करने का मन न हो — रुकना है; पर काम करना ही पड़ता है तो क्या?

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(गुरुद्वारा सेवक) अरदास में बीमारी-शादी आदि के लिए प्रार्थना करनी पड़ती है — ड्यूटी है। क्या करें?

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गुरु के पास क्यों जाना चाहिए, और गुरु साधक की धारणाओं के साथ कैसे व्यवहार करता है?

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क्या हर इच्छा को जाँचना ही ध्यान है? कैसे पता करें हम ध्यान में हैं?

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ध्यान में ध्यान का क्या मतलब? मंदबुद्धि को कैसे समझाएँ?

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कर्म सेटलमेंट नहीं भी हुआ तो क्या आत्मज्ञान हो सकता है? पेंडिंग कर्म बाद में?

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(लाइव/कुटिया) आत्मज्ञान के बाद प्रश्न हट गए — फिर भी कुछ पूछना रहता है? इस जन्म में हर कोई प्रयास कर सकता है?

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नॉनवेज खाने वाले अच्छे सत्कर्म वाले व्यक्ति को क्या केवल मांस के कारण परमात्मा नहीं मिलेगा? वेज ऑप्शन हो तो क्या?

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(कुटिया में साधिका) गलतियाँ होती रहेंगी — हम गिरे ही हुए हैं; यहाँ आकर गलतियाँ ज्यादा निकलती हैं। अगर आप हमारे लिए दरवाजा बंद कर दोगे तो ठिकाना नहीं रहेगा। अपराधी की तरह अंतिम विकल्प भी तो होना चाहिए — क्या दंड काटकर फिर आने का अधिकार नहीं?

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(वही साधिका) ऐसी जगह रहने का मन करता है, पर ये भी रहता है कि अपनी जगह हो। क्या यहां रह सकते हैं? और दूसरों के यहां जाओ तो कुछ बंधन होते हैं, उनके नियम के अनुसार चलना पड़ता है।

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(वही साधिका) बहुत से थॉट्स आते हैं — कुछ बनना है, कुछ करना है — तो फैमिली का थॉट आता है कि इन्हें छोड़कर जाएंगे तो पीछे इनका ध्यान कौन रखेगा; बाहर निकल भी जाते हैं तो लगता है वहां ठीक नहीं चल रहा, और टारगेट रुक-रुक जाता है। मदर का केयर करना मेरी प्रायोरिटी है, पर फिर आवाज आती है कि आत्मा की भूख का क्या हुआ। जिम्मेदारी लेना चाहते हैं पर हैंड-ओवर नहीं की जा रही, और जो (परिवार का) शिप चला रहा है वो अच्छे से नहीं चला रहा — तो क्या किया जाए?

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(वही साधिका) आप जब खोज करते थे, तो आत्म-चिंतन से करते थे या किताबों से? और गिरना-उठना मन की स्थिति से पता चलता है?

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