आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

गुरु — 2,248 प्रश्नोत्तर

वे प्रश्नोत्तर जिनके प्रश्न या उत्तर में “गुरु” शब्द आता है — नए पहले।

मन353 उत्तरध्यान331 उत्तरगुरु2,248 उत्तरकर्म580 उत्तरअहंकार84 उत्तरमृत्यु43 उत्तरपरिवार239 उत्तरसेवा321 उत्तरडर138 उत्तरक्रोध46 उत्तर

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गुरु जी, कल 12 मार्च आपका जन्म दिवस है — क्या इसे 'प्रत्यक्ष ज्ञान दिवस' के रूप में मना सकते हैं?

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गुरु जी, अगर सिर्फ मनुष्य शरीर से ही परोपकार होता है, तो क्या हाथी वगैरह एक-दूसरे की रक्षा करके, अपने बच्चों को संस्कार देकर, या वानर आदि शोर मचाकर हिरणों को शिकार से बचाकर परोपकार नहीं करते? क्या ममता के बिना परोपकार संभव है?

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गुरु जी, आपने बताया कि टेंशन वाला काम मत करो। मैं एक डॉक्टर हूं, मेरा काम ही टेंशन वाला है — तो क्या करूं?

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गुरु जी, शंकराचार्य जी ने कहा है कि मनुष्य शरीर, उसमें भी नर शरीर श्रेष्ठ है। इसे श्रेष्ठ क्यों कहा गया?

P23-0192

गुरु जी, मोह-माया प्राचीन काल में क्या थी? उस समय तो कोई मोह-माया नहीं थी, तब भी लोग उसमें कैसे फंस जाते थे?

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गुरु जी, प्रेम और वासना में क्या भेद है?

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गुरु जी, सब कुछ परमात्मा ही है, तो क्या परमात्मा निराकार ब्रह्म है?

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गुरु जी, क्या मैं ही ब्रह्म हूं?

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गुरु जी, अहंकार को पूर्ण रूप से कैसे खत्म करें?

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गुरु जी, धर्म बड़ा या देश बड़ा?

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गुरु जी, आपने कहा कि साधना 'तेरा' में होती है, 'मेरा' में नहीं — इसका क्या मतलब है?

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गुरु जी, आपने कहा कि ईमानदारी आगे का कर्म-बंधन नहीं बंधने देगी और सत्कर्म पिछले किए हुए कर्म को खत्म कर देगा। लेकिन कर्म अच्छा हो या बुरा, फलित होता ही है — तो क्या सत्कर्म भी फलित होगा?

P23-0184

गुरु जी, मुझे सिर्फ एक बात पता करनी है — जो लोग नशा करते हैं, वे इतने दयालु क्यों होते हैं, और जो नशा नहीं करते वे वैसे नहीं होते — ऐसा क्यों?

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गुरु जी, रामचरितमानस की पंक्ति "ढोल गंवार शूद्र पशु नारी, सकल ताड़ना के अधिकारी" का अर्थ क्या है?

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गुरु जी, गुरु किसे बनाएं और गुरु की पहचान कैसे हो?

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गुरु जी, क्या सत्कर्म करने पर ईश्वर खुद अपनी शरण में ले लेते हैं? क्या हमें ईश्वर प्राप्ति की चिंता छोड़कर सिर्फ सत्कर्म करना चाहिए?

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गुरु जी, होली महापर्व के बारे में कुछ मार्गदर्शन कीजिए।

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गुरु जी, क्या हमारा अतीत और भविष्य अभी के समय में मौजूद है, या यह सब हमारे दिमाग का बनाया हुआ एक काल्पनिक विचार है? क्या समय एक भ्रांति है या एक सीधी रेखा की प्रक्रिया?

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गुरु जी, अगर हर व्यक्ति न चाहने वाला हो जाए, तो क्या अर्थव्यवस्था, अस्पताल, बाजार, गाड़ियां या तरक्की रुक जाएगी?

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गुरु जी, काम और राम दोनों में मन भागता है, उसका क्या करें? और राम में मन कैसे लगाएं?

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गुरु जी, आपने कौन-कौन सी साधना करके आत्म-अनुभूति पाई है? कृपया बताइए।

P23-0175

गुरु जी, कलयुग का सबसे बुरा कर्म क्या है और सबसे पुण्य कर्म क्या है?

P23-0174

गुरु जी, रसपान करना कैसे छूटे?

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गुरु जी, हमें आत्मज्ञान के जो रास्ते पता थे — ध्यान, नाम जाप और मंत्र जाप — आपने उन्हें गलत बता दिया, इससे प्रॉब्लम और बड़ी हो गई है, कोई रास्ता नहीं बचा। क्या अब परमात्मा को खोजना छोड़ दूं?

P23-0172

गुरु जी, उपार्जित ज्ञान और आत्मज्ञान में क्या अंतर है?

P23-0171

गुरु जी, मन को कैसे स्थिर किया जाता है?

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गुरु जी, साधक का आत्मबल न टूटे, इसके लिए कोई दृढ़ संकल्प बताइए।

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गुरु जी, जब हम अपने आप में होने के लिए बैठते हैं तो बहुत चिंता आती है, थोड़ी देर बाद बोर हो जाते हैं, कभी-कभी डर भी लगता है। क्या करें?

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गुरु जी, शारीरिक, आर्थिक और मानसिक — तीनों पीड़ा हमारे पास रहती हैं। शरीर ठीक हो तो पैसे से पीड़ित होते हैं, शरीर और पैसा दोनों सही हों तो भी मानसिक पीड़ा तो रहती है। इन तीनों के बारे में बताइए।

P23-0167

गुरु जी, नाम देने वाले कहते हैं कि नाम और नामी एक हैं। इसका क्या अर्थ है?

P23-0166

गुरु जी, कहा जाता है कि नाम के समान कुछ नहीं है, नाम से पाप छूट जाते हैं। तो क्या नाम जप ही मूल है?

P23-0165

गुरु जी, अपनों की कुटिया से जाने के बाद साधक की घर में दिनचर्या कैसी होनी चाहिए, और लोगों से व्यवहार कैसा हो?

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गुरु जी, आपका सत्संग सुनते हैं। परिस्थिति तब विपरीत हो जाती है जब हम तो सामने वाले के साथ ईमानदारी और सत्कर्म से चलते हैं, पर सामने वाला व्यक्ति न अध्यात्म को समझता है, न हमारी ईमानदारी और सत्कर्म को। ऐसी स्थिति में क्या करें?

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गुरु जी, ईमानदारी क्या है? बेईमानी क्या है?

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गुरु जी, इतने बंधन और अज्ञान बनाया ही क्यों गया कि पूरी दुनिया दुख पा रही है?

P23-0161

गुरु जी, शाश्वत शांति कहां और क्या है?

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गुरु जी, क्या समाज अज्ञान का समुद्र है?

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गुरु जी, आत्मचिंतन के लिए कैसे बैठना चाहिए?

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गुरु जी, अगर बेईमान आदमी के पास शक्ति और ताकत है, तो ईमानदार और सत्य क्या करेगा? क्या यह आपके जीवन में आजमाई हुई बात है?

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गुरु जी, आपका आशीर्वाद कैसे प्राप्त हो?

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गुरु जी, क्या यह सच है कि परमात्मा कुछ आत्माओं को चुनते हैं? और ऐसी चुनी हुई आत्माओं का जीवन बहुत कठिन होता है, उन्हें घर वाले भी पसंद नहीं करते।

P23-0155

गुरु जी, क्या आप अपनी पारिवारिक-सामाजिक पहचानों और बंधनों से मुक्त हो?

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गुरु जी, क्या संसार और अध्यात्म अलग हैं?

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गुरु जी, आपने कहा था कि उपलब्धि के पहले का जीवन देखो। लेकिन सीख तो हमें उपलब्धि के बाद ही मिलेगी ना?

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गुरु जी, ईमानदारी के परे क्या है? और अगर ईमानदारी के परे मैं हूं, तो फिर क्या मैं ब्रह्म हूं?

P23-0150

गुरु जी, किसी असमर्थ की निस्वार्थ सेवा करना और बदले में उससे कुछ न चाहकर, किसी सामर्थ्यवान से मदद की उम्मीद करना — गलत है या सही?

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गुरु जी, सारा दिन काम करके रात में सिर्फ सोने के लिए दो-तीन पैग लगाना, जिससे किसी को नुकसान नहीं, बस चुपचाप सो जाना — क्या यह भी अध्यात्म में आगे बढ़ने में बंधन है?

P23-0148

गुरु जी, आत्मिक कल्याण के लिए घर के लोग ही सहयोग न करें, घर छोड़ने न दें, तो क्या करें? आप कहते हैं कि यहां आने के बाद घर पर फोन करना पड़ेगा।

P23-0147

गुरु जी, क्या मुझे आपके सिस्टम ने बाहर कर दिया?

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गुरु जी, मैं अध्यात्म में लगा हूं और मेरी पत्नी सोशल मीडिया में लगी रहती है, और वो हमसे नाराज रहती है क्योंकि हम गुरु-ज्ञान में लगे हैं। ऐसा क्यों होता है?

P23-0145

गुरु जी, हमेशा आनंद में कैसे रहें? जैसे-जैसे निर्विकार हो रहा हूं, बोरिंग लगने लगा है। प्रसन्नता कैसे बनी रहे?

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गुरु जी, आपका सत्संग सुनने के बाद जब मैं आंख बंद करती हूं तो आपकी ही तस्वीर आंखों में आती है। इसका क्या कारण है?

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गुरु जी, साधक क्यों बार-बार फिसलकर माया-नरक में गिर जाता है?

P23-0142

गुरु जी, मैं अध्यात्म में 10 साल बहुत चला और बहुत संघर्ष, उतार-चढ़ाव देखा। इसलिए अब आगे आध्यात्मिक यात्रा चलने की न हिम्मत है, न साहस है, न सामर्थ्य। क्या करूं?

P23-0141

गुरु जी, कोई दुखी हमें पुकारे और जब हम उसकी मदद करें तो खुद तकलीफ में आ जाते हैं। आगे से दूसरों की मदद कैसे करूं, ताकि उनकी तकलीफ भी मिटा सकूं और खुद भी तकलीफ में न फंसूं?

P23-0139

गुरु जी, वह परम सहजता, आराम, सुगमता और विश्राम कहां निहित है?

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गुरु जी, जब माता-पिता के भीतर संतान के लिए प्रेम न होकर केवल धन का लालच और क्रोध रह जाए, तो अपनी मानसिक शांति के लिए उनसे दूरी बनाना सही है या गलत?

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गुरु जी, उम्मीद से कैसे मुक्त हुआ जाए? आत्मज्ञान भी तो एक उम्मीद है।

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गुरु जी, दुनिया में इतने गुरु हैं। आपने उनका सहयोग करने की क्यों नहीं सोची, और अपना अलग मार्ग, अपनी अलग कुटिया क्यों खोली?

P23-0135

गुरु जी, आपके हिसाब से परम क्या है?

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गुरु जी, एक व्यक्ति का माता-पिता के प्रति और गुरु के प्रति क्या कर्तव्य हो?

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गुरु जी, ईमानदारी, सत्कर्म, सत्संग, अध्यात्म और धर्म बार-बार भार जैसे लगते हैं। ऐसा क्यों?

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गुरु जी, लोग बहुत लालची हो गए हैं, पैसों के लिए मानवता भी बेच देते हैं। जीवन है तो रोजाना कई लोगों से लेनदेन भी होता है। ऐसे लालची लोगों से स्वयं को कैसे निकालें, इस राग-द्वेष से कैसे मुक्त हों?

P23-0131

गुरु जी, क्या मौन ही परम है? क्या मौन में बैठे रहने से जीवन-मुक्ति और मोक्ष सिद्ध होगा?

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गुरु जी, तो क्या मैं रास्ते में चलते-चलते रोज अपने आप को चेक करती रहूं कि अब तुझे क्या चाहिए, ताकि 99 पर जाकर फिर "चाहिए" न बोल दूं?

P23-0129

गुरु जी, कोई साधक लंबी यात्रा करके, बहुत मशक्कत करके 99 पर पहुंचा है और वहां से भी एक कदम पीछे लौट आता है, क्योंकि उसे पता नहीं चलता कि वह कहां तक पहुंचा। गुरु तो उसी रास्ते से गुजरा है और उस पर पूरा काम कर रहा है — तो क्या 99 पर गुरु उसे संभाल नहीं सकता, थोड़ा आराम करवा दे, समझा दे, या धक्का मार दे, जैसे लोग किसी की बुरी घड़ी टलने तक उसे रोक लेते हैं?

P23-0128

गुरु जी, जैसे बच्चा टॉफी की जिद करता है और मां जानती है कि इससे उसके दांत सड़ेंगे, तो वह उसे धीरे से दूसरे ऑप्शन में लगा देती है — क्या गुरु भी ऐसे नहीं कर सकते?

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गुरु जी, यात्रा में बाहर तो सब दिखता है, पर अंदर कुछ दिखता नहीं कि कहां पहुंचे, कितना बाकी है, इसलिए लोग भाग जाते हैं। लेकिन गुरु तो देख रहा है — जब कोई एक कदम बाकी रहते भागता है तो गुरु उसे रोकता क्यों नहीं? क्या आप जीवात्मा की स्वतंत्रता नहीं छीनना चाहते?

P23-0126

गुरु जी, रात को मैं कहती हूं कि जाऊंगी और सुबह कहती हूं कि नहीं जाऊंगी — घर, सुविधाएं सब हैं, लेकिन होश में आती हूं तो कहती हूं कि वह भी नहीं चाहिए। यह द्वंद्व क्यों है? मेरे अंदर दृढ़ता क्यों नहीं आ रही, मैं बार-बार डगमगा क्यों जाती हूं?

P23-0125

गुरु जी, शरीर इतनी पीड़ा दे रहा है कि खाया-पिया भी नहीं जा रहा और काम भी अलग-अलग तरह का बहुत है, जो टाला भी नहीं जा सकता। मुझे लग रहा है कि शायद यह मेरा आखिरी कवच है जो टूटना बाकी है। अगर मैं मैदान छोड़कर घर जाकर ठीक हो जाऊं, फिर दोबारा लग जाऊं तो?

P23-0124

गुरु जी, जीवात्मा जब बहुत दुखी होती है, जैसे लू में जल रही हो, तो इस तरफ भागती है; लेकिन जैसे ही थोड़ी छाया, थोड़ी राहत मिल जाती है, उसकी दबी हुई इच्छाएं निकल आती हैं और वह फिर उन इच्छाओं में भाग जाती है — लू में जो तपा रही थी, वह भूल जाती है। यह क्या माजरा है?

P23-0123

गुरु जी, कुटिया में काम करते-करते शरीर एकदम थक गया और बीमार हो गया, तो रात को मैंने निर्णय कर लिया कि काम बीच में छोड़कर घर चली जाऊं ताकि आप मुझे बीमार देखकर और परेशान न हों; सुबह थोड़ा ठीक लगा तो निर्णय किया कि मैदान छोड़कर नहीं जाना। उस समय मेरी जीवात्मा का क्या हाल था — मैंने किसको महत्व दिया?

P23-0122

गुरु जी, बुद्ध और महावीर के तो कोई गुरु नहीं थे — फिर गुरु क्यों जरूरी है?

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गुरु जी, मैं तो नाम जाप करता हूं ताकि प्रेम मिले, क्योंकि सुना है नाम जाप से प्रेम मिलता है — पर अभी तक तो कुछ मिला नहीं।

P23-0120

गुरु जी, जीव अपने नाश होने से भी डरता है और ब्रह्म से मिलना भी चाहता है — दोनों करना चाहता है। तो क्या जीव का नाश गुरु के सानिध्य में हो जाता है?

P23-0119

गुरु जी, कल आप बोल रहे थे कि एक दिशा में योगी (खोजी) चलता है — तो वह दिशा कौन सी है?

P23-0118

गुरु जी, आप कहते हैं कुछ नहीं चाहिए में आ जाएं — तो जीवन कैसे कटेगा? आम तौर पर तो शरीर और मन की जरूरत पूरी करते-करते जीवन कट जाता है, बड़े दुख मिलते हैं।

P23-0117

गुरु जी, जैसे आंख बंद करके बैठते हैं, तो क्या इसको ध्यान नहीं बोला जा सकता? शुरुआती दौर में लोग मूर्ति का या मंत्र का सहारा लेते हैं, लेकिन एक स्थिति होती है जब किसी का सहारा नहीं लिया जाता, अपने आप में रहना होता है — उसको ध्यान बोलना ठीक नहीं रहेगा?

P23-0116

गुरु जी, जो अपने आप में रह पाते होंगे, उनको विचार नहीं आते होंगे? क्या विचार पूर्ण रूप से रोके जा सकते हैं?

P23-0115

गुरु जी, परमपिता परमेश्वर जीते-जी कैसे मिल सकते हैं?

P23-0114

गुरु जी, जिस जगह पर सिर्फ मांस-मछली ही खाना होता है, उनको पाप नहीं लगता?

P23-0113

गुरु जी, नाम जाप करना चाहिए या हमेशा निर्विचार रहें?

P23-0112

गुरु जी, आपका कहना है कि जरूरत में जियो। लेकिन किसी परिवार में एक व्यक्ति यह बात समझ जाता है और बाकी सदस्य नहीं समझते, उनकी जरूरत ज्यादा है — मेरी क्षमता भी ज्यादा है, पर मैं जरूरत में रहना चाहता हूं, और परिवार उससे ज्यादा में रहना चाहता है, डिमांड करता है; मैं प्रमुख हूं तो उनकी जरूरत पूरी करना मेरा कर्तव्य बनता है — इसमें संघर्ष बना रहता है। तो उनके साथ कैसे बनाकर चलें?

P23-0111

गुरु जी, हिंदू धर्म में जाति प्रथा या छुआछूत क्या सही है? यदि हां तो कैसे, और यदि नहीं तो कहां तक गलत है?

P23-0110

गुरु जी, संसार में संग का क्या महत्व है? साधु-संग क्या है? और सत मार्ग और परमार्थ में क्या अंतर है?

P23-0109

गुरु जी, अपनी योग्यता को कैसे पहचानें?

P23-0108

गुरु जी, मुझे कैसे पता चलेगा कि मैं कौन हूं? क्योंकि मैं तो निरंतर बदल रहा हूं — कभी अच्छा हूं, कभी बुरा; कभी पापी हूं, तो कभी बहुत पुण्यात्मा। वास्तव में मैं कौन हूं?

P23-0107

गुरु जी, परिवार से निमंत्रण आता है और हम जानते हैं कि वे ईमानदारी से नहीं कमाते — तो उनके यहां भोजन ग्रहण करना चाहिए या नहीं?

P23-0105

गुरु जी, दिन भर जो कार्य हमारे द्वारा होते हैं, कुछ समय जानते हुए करते हैं, कुछ अनजाने में अचानक होते रहते हैं। तो कोई ऐसी युक्ति हो, कोई सूत्र, कि 24 घंटे हम सजग रहें, जानते हुए करें — आजकल जो सजगता, अवेयरनेस की बात बताई जाती है?

P23-0104

गुरु जी, मालिकपन से सेवक बनना है — तो किनका सेवक बनना है? सेवकपन का भाव कैसे लाएं?

P23-0103

गुरु जी, एक भाषा में कहा जाए तो मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार, काम, क्रोध, लोभ — ये सब शरीर में हैं? कुछ लोग अंतःकरण चतुष्टय बताते हैं — मन, बुद्धि, चित्त और आखिर में अहंकार — कि अहंकार नष्ट किए बिना सर्वेश्वर तक नहीं पहुंचोगे।

P23-0102

गुरु जी, क्या समभाव भी एक बेईमानी है?

P23-0100

गुरु जी, यह उम्मीद रहती कहां पर है — मेरे मन में या मेरी बुद्धि में?

P23-0099

गुरु जी, सर्कस में शेर तक को सिखा देते हैं — बिना बोलने वाला जानवर सीख जाता है — हम लोग क्यों नहीं सीख रहे? इतनी बातें सब समझ में आ रही हैं, उम्र 50 पार कर गई, फिर भी उसी दुनिया में गोते लगा रहे हैं — इतना गहरा क्या है?

P23-0098

गुरु जी, इतनी आसान बात है, फिर हम लोगों का अड़ता कहां पर है? जैसे आपने मुझे डांट दिया, तो मुझे देखना चाहिए कि डांटा किस लिए — कहीं गलती है — और उसे लाइटली लेना चाहिए; पर हम लोग किसी बात को लाइटली लेते नहीं।

P23-0097

गुरु जी, आपने अभी शब्द बोला था कि मालिक बनने के चक्कर में उस मालिक से दूर हुए। यह मालिकपन का भाव कहीं पहले जन्म से तो आया होगा ना? यह इतना गहरा हो गया है कि छूट नहीं रहा।

P23-0095

गुरु जी, माया हटी मतलब अपना जो भी बनाया हुआ अस्तित्व है वह पूरा हट जाए, तो सीधा ब्रह्म से कनेक्ट हो गए?

P23-0094

गुरु जी, मुझे इसके साथ यह भी पूछना है कि हम विश्वास करें कि श्रद्धा करें? श्रद्धा और विश्वास में क्या फर्क है?

P23-0093

गुरु जी, समझ में तो आता है — शास्त्र, महापुरुषों की वाणी पढ़ते हैं, सब समझ में आ रहा है — लेकिन अपना बनाया हुआ अस्तित्व मिटा नहीं पा रहे। ऐसा क्यों? और ब्रह्म को मानें या जानें?

P23-0092

गुरु जी, मुझे यह जानना है कि जीव, माया और ब्रह्म — तीनों में अंतर क्या है, तीनों का आपस में संबंध क्या है, और हम ब्रह्म तक कैसे पहुंच सकते हैं?

P23-0091

गुरु जी, क्या आत्म तत्व ही गुरु तत्व है?

P23-0090

गुरु जी, क्या आत्मा होती है? गौतम बुद्ध कहते हैं आत्मा नहीं होती, आदि गुरु शंकराचार्य कहते हैं कि आत्मा और चेतना एक ही है, जैन भी कहते हैं कि आत्मा और चेतना एक ही है।

P23-0089

गुरु जी, मोह क्या है? और लोग जो पशु-पक्षी पाल लेते हैं, उसके सहारे जीने लगते हैं — क्या पालना चाहिए?

P23-0088

गुरु जी, यहां रहकर कभी-कभी आंतरिक परेशानी ज्यादा हो जाती है — कल पूरा दिन परेशानी रही। और आंतरिक बदलाव क्या-क्या होते हैं?

P23-0087

गुरु जी, लोग कभी-कभी चुपचाप बैठ के मंत्र जाप वगैरह करते हैं — इसका क्या प्रभाव है?

P23-0086

गुरु जी, एकांत में शांति से अपनी चटाई लेकर बैठते हैं; अभी तक तो हम ध्यान करते थे — अब ध्यान नहीं करना है, तो अब क्या करें? केवल चुपचाप बैठें? अपने आप में ही आनंद है, तो अपने आप को कैसे सोचें?

P23-0085

गुरु जी, कहते हैं कि जगह में खासियत होती है — क्या किसी स्थान में कोई शक्तियां होती हैं?

P23-0084

गुरु जी, हम यहां कुछ सेवा कर ही नहीं पाते — ना बर्तन साफ किए, ना कुछ काम कर पाए।

P23-0083

गुरु जी, आप तो निकल चुके हैं ना — लेकिन निकल गए तो वापस भी तो आ सकते हो? क्या उपलब्धि के बाद भी आदमी मुड़ सकता है?

P23-0082

गुरु जी, पहले तो पीर ही बनेगा ना, फिर बंदा पैगंबर बनेगा — धीरे-धीरे?

P23-0081

गुरु जी, आदमी तो आदत से भी चलता है — हैबिट हो गई, वह करे जा रहा है। क्या गुरु उसकी आदत को तोड़ सकता है? और जो काम गुरु नौ महीने में कर सकता है, वह नौ दिन में भी तो कर सकता है?

P23-0080

गुरु जी, मान लीजिए एक बंदा शैतान है और वह गुरु के पास आ गया — तो फिर उस गुरु का क्या रोल है?

P23-0079

गुरु जी, एक चीज और समझ में नहीं आ रही — कहते हैं परमात्मा ने, खुदा ने आपको बिल्कुल फ्री हैंड छोड़ दिया, जो करना चाहो करो, सही करो या गलत; लेकिन दूसरे हाथ में पकड़ भी रखा है — ऐसा कानून बनाया है जो सीबीआई से भी ज्यादा पावरफुल है, थोड़ी सी गलती की तो सजा मिलेगी। यह कैसे?

P23-0078

गुरु जी, मैंने ऐसा सुना था कि जहां अच्छे गुरु पैदा होते हैं वहां पर गलत लोग पैदा नहीं हो सकते — क्या यह बात सही है?

P23-0077

गुरु जी, आप जो रास्ता दिखा रहे हैं वह तो पहले से हमारे ग्रंथों में लिखा है — अहिंसा, सत्य, अस्तेय, अपरिग्रह; अपरिग्रह का अर्थ है आवश्यकता से अधिक वस्तु का संग्रह ना करें। पहले इतने ईमानदार लोग थे — फिर हमारे देश में लोग इतने भ्रष्ट कैसे हो गए? शिक्षा में हमारी कमी रही, या हमने आवश्यकता से अधिक चाहा?

P23-0076

गुरु जी, मतलब जो जरूरत से ज्यादा है वह दूसरों को दे देना चाहिए — यही कहने का मतलब है?

P23-0075

गुरु जी, जरूरत से ज्यादा बनाना-रखना तो प्रगति है ना? इसे प्रगति क्यों ना कहें?

P23-0074

गुरु जी, जरूरत में जीने का मतलब समझ में नहीं आ रहा। हर आदमी ने तो अपनी-अपनी जरूरत बनाई हुई है — तो कैसे तय करें कि इतनी जरूरत है?

P23-0073

गुरु जी, अपने तरीके से चाहिए का त्याग करने से कर्ता भाव भी नष्ट हो जाएगा क्या?

P23-0072

गुरु जी, अभेद होते हुए भी भेद क्यों लगता है? अभेद का मतलब एक जैसा, भेद का मतलब अलग-अलग — तो अंदर से सब एक जैसा है, लेकिन बाहर से तो अलग-अलग है ही?

P23-0070

गुरु जी, क्या सिमरन और ध्यान एक हैं? हम जिस गुरु की शरण में हैं उन्होंने ध्यान करने से मना किया है, केवल सिमरन बताया है — क्या यह सही है?

P23-0069

गुरु जी, जीवन को कैसे जिएं जिससे कि अंत में राग-मोह ना हो?

P23-0068

गुरु जी, अगर जैसे कोई डॉक्टर है — वह उस सिस्टम में काम ना करे जो लोगों ने बना दिया है, जो गलत है, तो क्या करे?

P23-0067

गुरु जी, जैसे आपने कहा कि अपनी इच्छा के अनुसार कोई चीज नहीं मिलती तो हमें गुस्सा आता है। अब एक परिवार में जैसे पांच लोग हैं, उसका जो मुखिया होगा वह तो चाहेगा ही कि मेरे हिसाब से काम हो — जरूरी भी है, क्योंकि कुछ काम उसके हिसाब से ही सही होते हैं। नहीं होगा तो उसे गुस्सा आएगा। इस परिस्थिति में क्या करें?

P23-0066

गुरु जी, कुंडलिनी जागरण जैसी कोई चीज है या नहीं?

P23-0065

गुरु जी, अहम को हटाना, मान की इच्छा का त्याग करना इतना कठिन है — अगर किसी परिस्थिति में वह भाव इंसान में आ भी जाता है तो क्या करें?

P23-0063

गुरु जी, विकारों से बचें कैसे? जैसे किसी का ड्रिंक करने का मन हो रहा है, स्मोक करने का मन हो रहा है — यह एक विकार है, अब वह उसके दिमाग में आया तो उससे वह कैसे बचेगा? इसके लिए तो सेल्फ कॉन्फिडेंस, विल पावर होना जरूरी है?

P23-0062

गुरु जी, विकारों को दृष्टा बनके कैसे देखें?

P23-0061

गुरु जी, जैसे हम ड्राइव कर रहे हैं, गाड़ी चला रहे हैं, यात्रा में जा रहे हैं — उस समय इंसान का दिमाग प्रेजेंट में ना होकर या तो पास्ट में जो हो चुका उसमें होता है, या फ्यूचर के सपनों में। तो इस मोमेंट में स्थिर होकर काम कैसे करें?

P23-0060

गुरु जी, वर्तमान में कैसे जिएं?

P23-0059

गुरु जी, क्या आत्मज्ञान ही सही ज्ञान है?

P23-0058

गुरु जी, क्या एकांत में हम सत्संग सुन सकते हैं? या एकांत में बस सत्संग ही होना चाहिए?

P23-0057

गुरु जी, क्या हमारे जीवन में जो भी घटित होता है वह पहले से निश्चित होता है?

P23-0056

गुरु जी, घर पर रहकर एकांत कैसे संभव करें?

P23-0055

गुरु जी, आपने कहा था कि किसी का साथ दो तो अंत तक निभाओ। शादी में हम साथ-साथ का वचन लेते हैं — तो आध्यात्म में आने के लिए घर वालों को कैसे छोड़ें?

P23-0054

गुरु जी, कपड़े का धंधा है, उसमें झूठ तो बोलना ही पड़ता है। कृपया मार्गदर्शन करें।

P23-0053

गुरु जी, किसी की बातों से और व्यवहार से दुख पहुंचता है, और वह पद में मुझसे बड़े हैं और रोज उनके साथ काम भी करना है — ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए?

P23-0052

गुरु जी, गृहस्थ में रहकर मुक्ति पाने के लिए कोई सरल उपाय बताइए।

P23-0051

गुरु जी, ब्रह्मचर्य के जीवन में क्या-क्या फायदे हैं?

P23-0050

गुरु जी, एकांत में खान-पान का भी विशेष ध्यान देना पड़ता है क्या? क्या पेट भर भोजन नहीं करना चाहिए?

P23-0049

गुरु जी, एकांत वास कितने समय तक करना चाहिए? और उपलब्धि का मतलब क्या है?

P23-0048

गुरु जी, जैसे आपने बोला कि पुरुष आंखों से भोग करता है — महिलाओं का क्या? महिलाएं किसका भोग करती हैं?

P23-0047

गुरु जी, कर्मों की बेईमानियां तो समझ में आईं कि कर्मों में कहां-कहां बेईमानियां होती हैं, कैसे होती हैं; पर हमारी जो पांच इंद्रियां हैं, उनसे हम जो बेईमानियां करते हैं वे कौन-कौन सी होती हैं? जरा उस पर विस्तार से बताइए।

P23-0046

गुरु जी, पहले भाव बनता है कि एकांत में जाएं, वहां हम अपनी साधना अच्छी तरह से कर पाएंगे; लेकिन जब एकांत मिलता है, सानिध्य मिलता है, तो वहां व्याकुलता होती है, भागने का मन होता है। ऐसा क्यों? हम एकांत को बर्दाश्त क्यों नहीं कर पाते?

P23-0045

गुरु जी, चक्रों पर केंद्रित होना है या नहीं?

P23-0044

गुरु जी, खत्म क्यों करना है अपने आपको? इस जन्म में आया हूं, तो कर्म के बिना तो रह नहीं सकते।

P23-0043

गुरु जी, मैंने एक हिंदू लड़के से प्रेम किया था; उसने मेरा धर्म परिवर्तन करके मुझे छोड़ दिया और चला गया। अब मैं क्या करूं? मेरा मार्गदर्शन करें।

P23-0042

गुरु जी, सत्य क्या है?

P23-0041

गुरु जी, अगर एक संन्यासी को अपना मातृ ऋण चुकाना हो, तो कैसे चुकाए?

P23-0040

गुरु जी, जब 'कुछ नहीं चाहिए' में आना है, तो फिर जो चाहिए उसके लिए काम कैसे करें? फिर से हम 'कुछ चाहिए' में आ जाएंगे।

P23-0039

गुरु जी, क्या वैराग्य के लिए घर वालों की अनुमति आवश्यक है?

P23-0038

गुरु जी, शरीर के नौ दरवाजे कौन से हैं? विस्तार से बताइए।

P23-0037

गुरु जी, ब्रह्मचर्य कैसे लाऊं? उम्र में आपसे बड़ा हूं, 46 साल का हूं, लेकिन आपसे बहुत छोटी सोच महसूस करता हूं।

P23-0036

गुरु जी, शाश्वत क्या है — यह जानना है, और उस भाव में टिके रहना है।

P23-0035

गुरु जी, परिवार के लोग बेईमानी करें तो उनसे कैसे व्यवहार करें?

P23-0034

गुरु जी, जीवन का उद्देश्य क्या होना चाहिए? क्या स्वामी विवेकानंद जैसा संन्यासी होना चाहिए?

P23-0032

गुरु जी, 'कुछ नहीं चाहिए' में कैसे आएं? अपने आप में कैसे रहें, ज्ञान कैसे हो? और पार कैसे होंगे?

P23-0031

गुरु जी प्रणाम, मिट्टी का घड़ा जब तक अग्नि में नहीं तपता, तब तक पक्का नहीं होता। क्या मनुष्य बिना त्याग-तपस्या किए ज्ञान प्राप्त कर लेगा?

P23-0030

गुरु जी, क्या जीवन में गुरु दीक्षा एक बार ही लेनी चाहिए, एक बार ही गुरु मंत्र लेना चाहिए?

P23-0029

गुरु जी, क्या बिना संन्यास के भी आत्मा का परमात्मा से मिलन हो सकता है? अगर हो सकता है तो कैसे? कृपया विस्तार से बताएं।

P23-0027

गुरु जी, एक सवाल है — मेरी मंगेतर पूरे जीवन आध्यात्मिकता की राह पर पवित्र रिश्ता निभाना चाहती है, मैं भी यही चाहता हूं, मगर अपनी भीतरी वासना से ऊपर कैसे उठ पाऊं?

P23-0026

प्रणाम प्रभु जी, मैं और मेरी पत्नी आपके यहां आने के लिए मुंबई से निकलेंगे। मेरी पत्नी का सवाल है — पीरियड के समय अपनों की कुटिया में क्या नियम से रहना होगा?

P23-0024

गुरु जी, नारायण को हम परमात्मा कह सकते हैं, और राम और कृष्ण परमात्मा का अवतार नहीं हैं?

P23-0023

गुरु जी, ये साधनाएं, विधियां तो स्वयं को जानने के लिए करते हैं — मूल प्रश्न तो यही रहता है कि स्वयं को जानें।

P23-0022

गुरु जी, उपलब्धि के बाद भी लोगों ने भोजन मांगा — भूख लगी, भूख का विचार आया, तभी भोजन मांगा। तो विचार से मुक्त कैसे होते हैं?

P23-0020

गुरु जी, मैं कामनाओं से मुक्त होना चाहता हूं, उसके लिए क्या करना है?

P23-0018

गुरु जी, माया किसे कहते हैं?

P23-0017

प्रणाम गुरु जी, पाप-पुण्य सब जानते हैं, लेकिन पाप क्रिया लोग बार-बार क्यों करते हैं?

P23-0016

गुरु जी प्रणाम, मेरा सवाल यह है कि हम अपने इष्ट देव को कैसे पहचानें?

P23-0015

गुरु जी, कर्म का सिद्धांत क्या होता है — पिछला कैसे खत्म होता है और अगला कब बनता है?

P23-0014

प्रणाम गुरु जी, उपनिषद के हिसाब से अपने शरीर के प्रति मनुष्य का कर्तव्य क्या है?

P23-0013

गुरु जी, आप साधक को समझाकर कहां पर पहुंचाना चाहते हो?

P23-0012

गुरु जी, अपना शुद्ध स्वरूप क्या है?

P23-0011

गुरु जी, 'कुछ नहीं चाहिए' के भाव में — जैसे कोई मजदूर है, उसकी रोजी-रोटी, आय — उसमें भाव नहीं होना चाहिए? और परिवार में, घर-गृहस्थी में रहते हुए एकदम 'कुछ नहीं चाहिए' की स्थिति तो नहीं हो सकती।

P23-0010

गुरु जी, यह जो बात कही जा रही है, वह बहुत ही हाई लेवल पर कही जा रही है। जैसे विद्यालय में टीचर बच्चों को बोलता रहे कि सच बोलो, तुम्हारा सब भला हो जाएगा — तो कितने बच्चे सच बोलने वाले होंगे? उनको सच तक पहुंचाने के लिए बहुत कुछ समझाना, एक्टिविटी करवाना पड़ता है, वह एक लंबा प्रोसेस होता है। एक छोटा सा मैसेज देकर छोड़ने से शायद ज्यादा बात बनने वाली नहीं। तो जो यहां आएगा, क्या आप उसकी स्थिति के हिसाब से उसको गाइड करते हैं?

P23-0009

गुरु जी, अभी माता जी की बात पर आपने कहा कि जब हम कभी पहली बार आए होंगे तो उस समय हमको ज्ञान था, और फिर अज्ञान उत्पन्न हो गया और हम फिर से आ गए — क्या ये आपने सिर्फ समझाने के लिए कहा है?

P23-0006

तो गुरु जी, यह विश्वास की बात हुई?

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गुरु जी, जब बात शुरू हो रही थी तो मुझे लगा था कि आप साधना आदि का पूरी तरह निषेध कर रहे हैं, लेकिन अब लग रहा है कि निषेध सिर्फ इसलिए था कि अपरिपक्व व्यक्ति वैसा ना करे। दूसरा, आपने ध्यान का उदाहरण लेकर कहा था कि ध्यान करने वाला और जिसका ध्यान किया जा रहा है, वह बाहरी चीज हो गई; लेकिन वाल्मीकि जी 'मरा मरा' के रूप में ध्यान तो कर ही रहे थे — तो सहायता के लिए उसका उपयोग किया जा सकता है?

P23-0004

गुरु जी, थोड़ी देर पहले आपने कहा था कि गुरु बारह बरस तक परीक्षण करते थे और उसके बाद मंत्र देते थे; तो ये आपकी ही बात का खंडन हो गया?

P23-0003

गुरु जी, वैसे तो जो बातें मैं उठा रहा हूं, वे संशय की श्रेणी में ही आती हैं।

P22-0200

महाराज जी, अपने सुधार के लिए जो परिवर्तन है, वो अपने भीतर ही, छोड़-छोड़ के ही करना पड़ेगा। लेकिन साधना आदि की बात इसलिए उठती है कि व्यवहार जगत में परिवर्तन वाले रास्ते में व्यक्ति को समझ में नहीं आता कि यह रास्ता कितना लंबा होगा, जबकि साधना वाले तरीके एक प्रॉमिस देते हैं कि आप उसको फास्ट कर सकते हैं, जो भीतर है उसको खत्म कर सकते हैं।

P22-0198

गुरु जी, समझ के काम करना तो जीवन के हर छोटे-छोटे पहलू से जुड़ा ही हुआ है। और इस दृष्टि से तो, स्वामी जी, यह समझने वाला भी सदा नहीं है।

P22-0196

गुरु जी, खोजी अगर खत्म हो जाएगा तो फिर ब्रह्म की यात्रा कौन करेगा?

P22-0195

गुरु जी, दर्शन का एक अर्थ यह भी आता है कि किसी कॉन्सेप्ट के पीछे, किसी चीज के पीछे उसकी जो गहराई है, उसका जो तत्व है, उसको जानना-समझना।

P22-0194

गुरु जी, ज्योतिर्लिंग के दर्शन की भी क्या वही बात होगी जो आप अभी कह रहे थे?

P22-0192

गुरु जी, आप कहते हैं आत्मज्ञानी में काम-क्रोध होता है — क्रोध का अर्थ तो समझ में आया, पर काम का अर्थ समझ में नहीं आया।

P22-0191

गुरु जी, प्यार क्या है? क्या हम किसी को बिना चाहे प्यार कर सकते हैं?

P22-0190

गुरु जी, जो भी घटित हो रहा है सब यूनिवर्स से ही हो रहा है, साक्षी भाव पक्का है — बट व्हाट नेक्स्ट? मार्गदर्शन दीजिए।

P22-0189

गुरु जी, ससुराल वाले हमसे सेवा नहीं करवाते, साथ भी नहीं रखते, अलग कर दिया है, फिर भी कलह खत्म नहीं होता — रिश्तेदार आते हैं और बुराई करते हैं; दुख कैसे खत्म करें?

P22-0188

गुरु जी, क्या हमारी कृपा हम पर ही काम करती है — अगर हम अच्छे काम करते हैं तो अच्छा होगा, बुरे काम करते हैं तो बुरा होगा?

P22-0187

गुरु जी, क्या आत्मज्ञानी को कोई भी प्रश्न नहीं होते? अगर होते हैं तो उनके उत्तर कौन देता है?

P22-0186

गुरु जी, आत्म-चिंतन कैसे किया जाए?

P22-0185

गुरु जी, भगवान के चरणों में भक्ति कैसे करें?

P22-0184

गुरु जी, क्या काम-क्रिया को बिना राग-द्वेष के किया जा सकता है?

P22-0183

गुरु जी, आत्मज्ञानी क्यों चाहते हैं कि सभी सुधर जाएं, जबकि भगवान नहीं चाहते कि सभी सुधरें — क्योंकि फिर उनके कर्मों का दंड कैसे मिलेगा?

P22-0182

गुरु जी, अट्रैक्शन प्राकृतिक है या मेरा बनाया हुआ?

P22-0181

गुरु जी, आपने एस्ट्रोलॉजी में करियर शुरू किया था, उसमें नाम और पैसा था — उसका भ्रम आपने कैसे छोड़ा? क्या ग्रह-नक्षत्र के प्रभाव बदले नहीं जा सकते?

P22-0180

गुरु जी, आप इतनी अच्छी लाइफ जीते हुए सब कुछ कैसे छोड़ दिए? क्या हम भी छोड़ सकते हैं?

P22-0179

गुरु जी, आकर्षण क्या है, आकर्षण क्यों होता है?

P22-0178

गुरु जी, धरती पर आत्मज्ञानी बड़ा है या परमात्मा?

P22-0177

गुरु जी, अध्यात्म को अपने दैनिक जीवन में कैसे जोड़ें?

P22-0176

गुरु जी, आत्मज्ञान आखिर है क्या?

P22-0175

गुरु जी, अधिकारी पैसों के बिना काम नहीं करता और नहीं दूंगा तो काम बिगाड़ देगा — तो पैसा देकर काम करवा लूं तो क्या बेईमानी होगी?

P22-0174

गुरु जी, पुराने दर्द को कैसे मिटाएं और आगे कैसे बढ़ें?

P22-0173

गुरु जी, साधना का कोई रूप होता है?

P22-0172

गुरु जी, राम बड़ा या काम?

P22-0171

गुरु जी, आपसे दीक्षा कैसे लें?

P22-0170

गुरु जी, आप कहते हैं कि माता-पिता और गुरु का ऋण नहीं होता; लेकिन एक साधक या परिक्रमा करने वाला जब मार्ग में किसी से ठहरने और भोजन की व्यवस्था स्वीकार करता है, तो क्या ये ऋण नहीं है?

P22-0169

गुरु जी, एक चीज और बता दें — मानवता, ईमानदारी और सत्कर्म ये सब अलग हैं या एक?

P22-0168

गुरु जी, हम तो आपसे ये उम्मीद लगाए बैठे हैं कि आप हमें बाहर निकाल देंगे।

P22-0167

गुरु जी, उम्मीद तो वही व्यक्ति लगाता है जिससे हमने कुछ लिया है — उनकी उम्मीद का क्या करें?

P22-0166

गुरु जी, तो उम्मीद छोड़ने का तरीका क्या है?

P22-0165

गुरु जी, ध्यान के बारे में मेरा प्रश्न है — जैसे गौतम बुद्ध ने ध्यान की विधि की और उस विधि से तर गए; और बैठते हैं तो विचार ही चलते रहते हैं।

P22-0164

गुरु जी, हमने किसी गुरु से मंत्र लिया है और अब हम खाली होना चाहते हैं, सब छोड़ना चाहते हैं; लेकिन मंत्र ऑटोमेटिक चालू हो जाता है — सोते समय, चलते समय, बहुत दिन का अभ्यास है। मंत्र छोड़ने से हमें दोष तो नहीं लगेगा?

P22-0163

गुरु जी, आप कहते हैं अपने आप में आओ; पर अपने आप में बैठते हैं तो वहां कुछ नहीं है, बेचैनी और घबराहट होती है, फिर हम सहारे की तरफ भागते हैं।

P22-0162

गुरु जी, आत्मा ही लेती है तो जानने वाला ही आत्मा है? क्या आत्मा अलग है और जानने वाला अलग है?

P22-0161

गुरु जी, रात को ऑफिस से आए तो ऑटो वाला भी यहां तक आने में डर रहा था कि वापस कैसे जाएगा; हमें भी उसके प्रति अजीब लगा, हमने कहा "भैया, ध्यान से जाना" — क्या इसे भी राग कहेंगे?

P22-0160

गुरु जी, वहां और भी पत्थर होंगे — सिर्फ वही पत्थर क्यों बोला? बाकी पत्थरों का क्या?

P22-0159

गुरु जी, मेरा प्रश्न है — चेतन और जड़ क्या है?

P22-0158

गुरु जी, कहते हैं आत्मज्ञानी की प्रकृति मदद करती है — क्या ऐसा है? और अगर कोई बवंडर, बारिश आ गई तो क्या उसे फर्क पड़ेगा, तकलीफ नहीं होगी?

P22-0157

गुरु जी, आप कहते हैं "कर्म प्रधान विश्व करि राखा, जो जस करहि सो तस फल चाखा" और "होइहि सोइ जो राम रचि राखा" — क्या इन दोनों में विरोधाभास है?

P22-0156

गुरु जी, अक्सर लोग कहते हैं कि भगवान की कृपा से, या दर्शन करने की वजह से मेरा ये काम हो गया — सच में ईश्वर की कृपा से होता है या अपने कर्म से?

P22-0155

गुरु जी, डर फेक है कि रियल? रात को डर लगता है तो मेरे लिए तो रियल है।

P22-0154

गुरु जी, आप जैसे अनेक पिंडों से निकलकर एक पिंड में आ गए; हम सभी अनेक पिंडों में फंसे हुए हैं, उसी के कारण हमारे लाखों-हजारों साल हो गए। कोई एक शब्द ऐसा बता दो जिससे हम इस चक्कर से निकल जाएं।

P22-0153

गुरु जी, इसीलिए कहते हैं कि अपने साथ प्यार करना?

P22-0152

गुरु जी, बहुत लोग अकेले होने से डरते हैं — काम के बाद, वीकेंड पर भी फुर्सत नहीं; गैजेट्स की स्लेवरी बन गए हैं, किसी घर में चार-पांच कंप्यूटर, काम का फोन, पर्सनल फोन...

P22-0151

गुरु जी, लोग गर्लफ्रेंड-बॉयफ्रेंड, शादी, सारे रिलेशन इसलिए बनाते हैं क्योंकि वे अकेले नहीं जी सकते।

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गुरु जी, आपको कैसे लगा कि कुटिया यहीं बनानी है, यही वह जगह है?

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गुरु जी, परमात्मा है कहां?

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गुरु जी, वह अनुभव टुकड़ों में आता है और फिर लगता है और चाहिए, और चाहिए — वह रिपीट नहीं होता क्योंकि हम फिर कुछ एक्सपेक्ट कर रहे होते हैं। बैठते हैं तो देखते हैं कि वे क्षण क्यों नहीं आ रहे, वह एहसास क्यों नहीं हो रहा। आंखें बंद करके देर तक बैठती हूं तो कुछ कॉन्स्टेंट होता है, फिर निकल जाता है।

P22-0147

गुरु जी, कभी-कभी झलकियां आती हैं — अपने आप में होते हैं तो आंखों से आंसू आ जाते हैं, सब कुछ अच्छा लगता है, कुछ नहीं चाहिए, लगता है सब छोड़ने को तैयार हूं। पर वह फीलिंग टुकड़ों में आती है, कंटिन्यूस नहीं रहती। जैसे नर्मदा जी पर अकेले जाती हूं तो वह भाव होता है, लौट आती हूं तो वहां से हट जाती हूं — तो क्या मैं वहीं रहूं?

P22-0146

गुरु जी, तो अभी हम मूल में पहुंचने के लिए छुड़ाने की तैयारी करें — और छुड़ाते ही मूल में पहुंच जाएंगे?

P22-0145

गुरु जी, लेकिन हमारी आत्मज्ञान की यात्रा तो शुरू हो चुकी है — क्या ऐसा कह सकते हैं?

P22-0144

गुरु जी, आपने बोला कि हम अभी तक निकलने की, छुड़ाने की प्लानिंग कर रहे हैं, यात्रा अभी शुरू नहीं हुई — तो यात्रा शुरू कब होगी? क्या जब हम जरूरतमंद की सेवा करेंगे और सत्कर्म-ईमानदारी अपनाएंगे, तब मानेंगे कि यात्रा शुरू हुई?

P22-0143

गुरु जी, यह समझ कि "शरीर है और मैं हूं" टिकी क्यों नहीं रहती, फिसल क्यों जाती है?

P22-0142

गुरु जी, मेरा अनुभव है कि परमात्मा, परम शक्ति — कोई भी नाम दें — किसी की प्रार्थना या विश को इंकार नहीं करता, जो मांगो दे देता है। तो हम उससे क्या मांगें?

P22-0141

गुरु जी, थोड़ा और समझाइए — ये पांच इंद्रियों का सब बाहरी है: खाना बन रहा है तो स्मेल आ रही है, देखने से (जैसे आम का उदाहरण), सुनने से भी मन में वैसा दिखने लगता है। मैं पहले सोच रही थी कि सब मन से हो रहा है। ये समझ में आने के बाद हमें क्या करना है?

P22-0140

गुरु जी, भारत में आज के समय भी कई मंदिर हैं जहां जीव की बलि दी जाती है — इस बारे में क्या कहेंगे?

P22-0139

गुरु जी, भगवान तक तो समझ में आया — पर "भगवान परमात्मा की यात्रा करता है" इसका क्या अर्थ है?

P22-0138

गुरु जी, भाव बहुत ज्यादा हो तो क्या भगवान ऐसे शरीर में, साकार रूप में आ जाते हैं?

P22-0137

गुरु जी, मूर्ति में प्राण प्रतिष्ठा की जाती है — तो क्या उसमें ताकत आ जाती है? हम प्रार्थना करते हैं तो क्या वे सुनते हैं? या अपनी श्रद्धा में ताकत रहती है?

P22-0136

गुरु जी, सभी धर्मों में अपने-अपने मंदिर-मस्जिद हैं, सब बोलते हैं दर्शन करने जाना — असल में दर्शन का क्या मतलब है? इसका कोई आध्यात्मिक महत्व है?

P22-0135

गुरु जी, इसी से एक प्रश्न और निकला — कोई सामान हमारे काम का नहीं, वह हम किसी को दे दें; पर नचिकेता के पिता ऐसी गायें दान करते थे जो बिना काम की थीं। तो जो चीज मेरे काम की नहीं, उसे देना ठीक है?

P22-0134

गुरु जी, मैं पूजा करती हूं, माला जपती हूं, कॉपी में पेन से राम-राम लिखती हूं — क्या ये लिखना सही है?

P22-0133

गुरु जी, जब साधक अपने आप में जाता है तो एक साथ तो घटना घटती नहीं होगी — थोड़ा अंदर गया, फिर बाहर आ गया, झलक आती है। तो जब वह थोड़े क्षण के लिए भी अंदर जाता है तो उस वक्त क्या फीलिंग होती है? और वह क्षण भर ही क्यों रहता है — क्या उस टाइम को बढ़ाया जा सकता है?

P22-0132

गुरु जी, सांस सत्य है या सांस लेने वाला सत्य है? वीडियो में बताया गया था पर मैं समझ नहीं पाया।

P22-0131

गुरु जी, अगर कोई जरूरतमंद की सेवा ना करके मानवतावश करता है — जैसे डॉक्टर ने माता जी का इलाज किया, माता जी पैसे तो दे सकती थीं, फिर भी उन्होंने नहीं लिया?

P22-0130

गुरु जी, एक डॉक्टर यहां आते हैं, उन्होंने कहा था कभी भी जरूरत हो तो फोन करना। एक माता जी को चोट लगी तो उन्हें बुलाया; बाद में मैंने साइड में कहा कि डॉक्टर साहब कुछ फीस ले लिया करो, तो बोले "नहीं, आपका आशीर्वाद बहुत है।" फिर मैंने कुछ नहीं बोला। मैंने अपनी बात रख दी, अब मुझे संकोच नहीं लगता — इसे कैसे समझें?

P22-0129

गुरु जी, अगर वे फ्री में देंगे तो लोग भी फ्री में ही लेंगे ना?

P22-0128

गुरु जी, बहुत सारे हॉस्पिटल फ्री में इलाज करते हैं — उसे क्या समझें?

P22-0127

गुरु जी, आप कहते हैं ईमानदारी और सत्कर्म करो; लोग कोशिश कर रहे हैं पर पूरी तरह नहीं आ पाए। जो चीज हमें सिखाई जाती है, मन उसे ना करके दूसरी तरफ जाता है — जैसे बच्चे को बोल दिया कि वहां नहीं जाना है तो उसे वहां का पता ही दे दिया। तो क्या समाज इस कारण खराब हो रहा है कि उसे अच्छा बनाने की कोशिश की गई?

P22-0126

गुरु जी, तो क्या अच्छाई करने के चक्कर में बुराई है? बचपन में एक समय ऐसा था जब हमें कुछ भी नहीं मालूम था, फिर एकदम से अच्छाई बताई गई — ऐसा क्यों?

P22-0125

गुरु जी, पहले तो बुराई देख ही नहीं पा रहे थे; बिना बुराई को जाने अच्छाई धारण कैसे करें, कैसे पता चलेगा कि अच्छाई है? तो क्या बुराई का आना जरूरी था? जैसे बाजार में पहले दुकानदार पर भरोसा करके ले लेते थे, फटके खाने के बाद परखने की शक्ति डेवलप हुई और अब छांट-छांट कर ले पाती हूं।

P22-0124

गुरु जी, क्या हमारे अंदर जितनी अच्छाई है उतनी ही बुराई है? पिछले महीनों में मैंने समझा कि जैसे-जैसे समझ बढ़ती है, बुराई देखने की क्षमता भी बढ़ती जाती है — जो पहले नहीं दिखता था वह दिखने लगा, और लगता है कि अपने आसपास लिमिट्स, रेस्ट्रिक्शन डालने पड़ेंगे, नहीं तो लोग बर्बाद कर देंगे। अब एक चीज के दोनों पहलू दिखते हैं — तो क्या अच्छाई और बुराई दोनों मुझ में ही हैं? इस पर विस्तार करेंगे।

P22-0123

गुरु जी, अनुशासन और दबाव में फर्क है कि नहीं?

P22-0122

गुरु जी, आपने बताया था कि न किसी इंसान के प्रभाव में आओ, न किसी को अपने प्रभाव से प्रभावित करो। हम प्रभाव में नहीं आ रहे, लेकिन अगर सामने वाला हमसे प्रभावित है और हम चाहते हैं कि वह न आए — तो उसे कैसे हटाएं?

P22-0121

गुरु जी, रावण भी आत्मज्ञानी था, फिर उसमें अहंकार कैसे आया और वह भगवान राम को क्यों नहीं जान पाया? क्या इसका मतलब हम लोग भी आत्मज्ञान के बाद दोबारा रावण जैसी हरकत करने लगेंगे?

P22-0120

गुरु जी, साधु बनने की शुरुआत में चार चीजें मुख्य बताई जाती हैं — आसन, बासन, सोटा और कमंडल; डंडे को 'कोतवाल' भी कहते हैं, कहते हैं इसे हमेशा हाथ में रखना जरूरी है, इससे पहचान होती है। लेकिन फंसाव भी हो जाता है कि मन कमंडल में ही बस जाता है कि कहीं कोई ले न जाए — क्या इसीलिए आपने सब कुछ खत्म कर दिया?

P22-0119

गुरु जी, जब आप लोगों को परखने के लिए फटे-पुराने कपड़ों में सब जगह घूमते थे, तो गली-गली में कुत्ते भी होते थे — क्या वे आप पर भौंकते या पीछा नहीं करते थे? क्या आप उस समय अपने साथ कोई छोटा डंडा या लठ रखते थे?

P22-0118

गुरु जी, भृकुटी के बीच में खिंचाव रहता है और अलग-अलग अनुभव होते हैं — यह क्या है?

P22-0117

गुरु जी, अल्टीमेट तो ध्यान से भी मुक्त होना है, लेकिन हर काम के लिए ध्यान जरूरी है — तो यह कैसे होगा?

P22-0116

गुरु जी, क्या हमें दूध पीना चाहिए, जब उसी दूध के लिए गायों और भैंसों को जंजीरों में बांधकर उनका शोषण किया जाता है, और दूध निकालने के बाद जब वही पशु अर्थहीन हो जाते हैं तो कसाईखानों में भेज दिए जाते हैं? भारत गौ-सेवा के लिए जाना जाता था और आज बड़ा बीफ निर्यातक बन चुका है — यह हमारी प्रगति है या पाप?

P22-0115

गुरु जी, आपने भोजन का पहला कौर उठाते ही याद आने पर हाथ धोकर पहले पिल्लों को खिचड़ी दी — वह कर्म था या सेवा? और लोग यह भी सिखाते हैं कि खाते समय उठना नहीं चाहिए।

P22-0114

गुरु जी, आत्मिक सेवा क्या होती है, जरा समझाइए — क्या वह की जा सकती है या अपने आप होती है?

P22-0113

गुरु जी, बुरा मत मानिए, बस प्रश्न है — क्या आपको कभी सेवा करवाने की जरूरत पड़ती है? अगर कोई कहे कि मैं गुरु हूं, मेरी सेवा करो, तो क्या यह बात सही है?

P22-0112

गुरु जी, अपने बड़ों की देह शांत होने के बाद हमें उन्हें किस विधि से याद करना चाहिए, क्योंकि उन्होंने अपने जीवन का बहुत कुछ हमें दिया है?

P22-0111

गुरु जी, क्या स्वर्ग-नरक होता है? कहते हैं नरक कुछ होता ही नहीं, सुख विशेष में स्वर्ग और दुख विशेष में नरक है — क्या यह ठीक है? लोग स्वर्ग-नरक की बातें करते हैं, शायद यह भ्रम है?

P22-0110

गुरु जी, शांति का मार्ग क्या है?

P22-0109

गुरु जी, कम से कम कितने दिन आपके पास रहना चाहिए?

P22-0108

गुरु जी, क्या अपना कर्म अपने बच्चों को भोगना पड़ता है?

P22-0107

गुरु जी, माता-पिता शादी करके खुद परेशान रहते हैं, और बाद में बच्चों की शादी करके उन्हें भी परेशान करते हैं — पता है कि शादी के बाद दुख है, फिर भी जानबूझकर ऐसा क्यों?

P22-0106

गुरु जी, मातृ देवो भव, पितृ देवो भव, आचार्य देवो भव — मां हमेशा ज्यादा खिलाती है; गुरु के पास कोई कमी नहीं, फिर भी वह भरपेट खाने नहीं देता, एक थाली में कम देता है, जबकि उसके यहां जानवर भरपेट खाते हैं — ऐसा क्यों?

P22-0105

गुरु जी, अगर कोई 9 महीने यहां आकर रहे, तो जिसके पास पैसा है, उसे खाने-पीने का खर्च तो देना चाहिए?

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गुरु जी, शनिवार-रविवार की छुट्टी रहती है — उसमें एक बार अपने लिए (साधना) कर लें?

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गुरु जी, आपने हफ्ते में एक दिन मनपसंद खाने की छूट दी — अभी तक मैं ऐसा करती थी पर गिल्ट फीलिंग आती थी; अब बिना अपराध-बोध के एंजॉय करूं?

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गुरु जी, मैं रोज ब्लैक कॉफी पीती थी, पर यहां चाय-कॉफी छूट गई, उसका विचार भी नहीं आया — यह मुझे चमत्कार लग रहा है।

P22-0101

गुरु जी, बचपन से हमें सिखाया गया है कि नाश्ता राजा जैसा, दोपहर का भोजन रानी जैसा और रात का भोजन भिखारी जैसा करो; कहा जाता है कि नाश्ता भारी करना चाहिए ताकि दिन भर काम करने की ऊर्जा मिले। यह तो उल्टा है?

P22-0100

गुरु जी, हमें सिखाया गया कि रात का भोजन भारी पड़ता है, इसलिए हम दिन में ठीक-ठाक खाते हैं और रात को हल्का — क्या यह सही है?

P22-0099

गुरु जी, मेरी कमजोरी खाना है। मैं हेल्दी खाती हूं — रोज मूंग दाल खिचड़ी, सुबह दही और फल — लेकिन कभी-कभी समोसा, मिठाई जैसा कुछ खाने का बहुत मन करता है और मैं खा लेती हूं; एक महीना ठीक रहता है, फिर वही। इसे कैसे रेगुलेट करूं?

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गुरु जी, कभी जीवन में किसी को जीवन खत्म करने का विचार आ जाए, तो क्या करे?

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गुरु जी, परिवार में जो बड़ा होता है, वह पत्नी, बच्चे, पोते-पोतियों से प्राणिक रिश्ते से जुड़ा रहता है। बेटा हजार किलोमीटर दूर है, उसकी कोई परेशानी का फोन आता है — मैं जानता हूं मैं वहां कुछ नहीं कर सकता, जो करना है वहां उसी को करना है — फिर भी वह दुख क्यों होता है?

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गुरु जी, यहां से घर जाने के बाद हमारी दिनचर्या कैसी होनी चाहिए — कम खाना, भोजन, ध्यान, घर पे क्या करना है? थोड़ा इस पर भी प्रकाश डालिए।

P22-0095

गुरु जी, दुर्योधन को स्वर्ग की प्राप्ति हुई थी — पर पांडवों ने दुर्योधन को स्वर्ग में बैठे क्यों देखा?

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गुरु जी, क्या आत्म-साक्षात्कार (एनलाइटनमेंट) के बाद भी अगर किसी के सिर पर एक्सीडेंट या चोट लगे, तो वह कोमा में जा सकता है या पागल हो सकता है?

P22-0093

गुरु जी, सीधे शब्दों में बताइए — असल में जरूरतमंद कौन है, उसका लक्षण क्या है? मुझे भी जानना है।

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गुरु जी, दुनिया में कई चतुर लोग हमें मूर्ख बनाकर लूट लेते हैं, जैसे सीता माता के साथ रावण ने किया, और उसका भुगतान हमें दुख और अशांति से करना पड़ता है। इसे कैसे समझें — क्या यह दया भाव का नुकसान है?

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गुरु जी, महाराज जी, आप ही मुझे बतला दीजिए — मैं स्वयं असल में कौन हूं?

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गुरु जी, चुप रहने से क्या लाभ है? साधना में इस पर प्रकाश डालें।

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गुरु जी, योग्यता से ज्यादा — एक को 99% पर और एक को 30% पर आरक्षण के कारण स्थान मिलता है; क्या यह सही है या गलत? मार्गदर्शन करें।

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गुरु जी, रावण ने तपस्या करके ब्रह्मा जी और शिव जी से अपनी जरूरत की चीजें ले लीं, बाद में बहुत ताकतवर होकर बहुत पाप किए — पर ब्रह्मा जी और शिव जी को कोई दोष नहीं लगा। उन्होंने तो सेवा कर दी, उपयोग रावण ने गलत किया — तो क्या देने वाले पूरी तरह छूट गए?

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गुरु जी, मेरे साथ भी ऐसा हुआ — आठ-दस अंधे लोगों की टोली 'हरे कृष्ण हरे राम' गाते हुए आई, उन्होंने हरिद्वार पैदल जाने के लिए सबके लिए नए धोती-कुर्ते मांगे। मैं मदद करने लगी, पर उनमें से एक बार-बार अलग नाम बता रहा था और धर्म को लेकर झूठ बोल रहा था। मैंने कहा मैं सीधे 100 नंबर पर फोन करूंगी, तो वे भाग गए। मैंने सही किया या गलत?

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गुरु जी, अगर ऑनलाइन किसी की कॉल आई, सेवा भाव भी है, लेकिन मन में शंका है और जांच-परख नहीं पा रहे — तो क्या मना कर दें? मना कर दिया और वह सच में जरूरतमंद हुआ तो भी पछतावा होगा।

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गुरु जी, मैं दो-तीन ऑथेंटिक एनजीओ से जुड़ी हूं और हर महीने योगदान देती हूं, लेकिन पता नहीं कैसे मेरा नंबर दूसरे एनजीओ के पास चला गया — वहां से कॉल आती हैं कि बच्चे की हालत बहुत खराब है, जो हो सके दे दो। मुंबई, नासिक, उत्तराखंड से कॉल आती हैं, हम हैदराबाद से वहां जा नहीं पाते। अगर पैसे दान कर दिए और वे दुरुपयोग करें तो क्या उसका दोष हमें भी लगेगा?

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गुरु जी, अनुभव यह भी है कि कुछ लोग जबरदस्ती गरीब दिखना चाहते हैं — हमने किसी को कंबल दिया, तो दूसरे दिन फिर वह उसी हालत में था, उसने बेच दिया। ऐसे में क्या करें?

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गुरु जी, आपने जीवन जीने के मूल सिद्धांत बताए — ईमानदारी और सत्कर्म, और सत्कर्म में जरूरतमंद की सेवा। लेकिन जरूरतमंद की पहचान कैसे करें? हैदराबाद में एक परिवार ने कहा मालिक ने निकाल दिया, घर जाना है, भूख लगी है — खाना मत खिलाओ, पैसे दे दो। तभी दो लोग आकर बोले इनका रोज का यही काम है, तो हम आगे निकल गए। एक बच्ची ने 5 किलो आटा मांगा तो दुकान वाला बोला यह इसे यहीं बेच आएगी। ऐसे में विश्वास कैसे करें?

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गुरु जी, जिसका कोई पर्पज ही ना हो, क्या वह भी आपके पास आ सकता है?

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गुरु जी, गुस्से पर कंट्रोल कैसे करें?

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गुरु जी, पहले मैं नेचर में सिर्फ फन के लिए जाती थी; अब अगर मिट्टी का काम ना करूं तो रेस्टलेस फील करती हूं, अजीब लगता है। मिट्टी और आदमी का रिलेशन क्या है?

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गुरु जी, पेड़-पौधे लगाना सेवा है या सत्कर्म?

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गुरु जी, ईमानदारी और सत्कर्म की अंतिम सीमा क्या है?

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