आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

गुरु जी की जीवन यात्रा

सत्संग वीडियो से वे प्रसंग जिनमें गुरु जी स्वयं अपने जीवन की घटनाएं और अपनी खोज की यात्रा सुनाते हैं — उन्हीं के शब्दों में, हर प्रसंग के साथ वीडियो का वह समय जहां से वे बताना शुरू करते हैं।

आरंभ

बचपन से संन्यास तक — कामाख्या की इच्छा, व्यापार, ज्योतिष और मलाड का आश्रम

JY-0016 · 15 जून 2026

बचपन से कामाख्या की तंत्र विद्या के बारे में सुनते थे, वहां जाने की इच्छा थी; समाज के लिए कुछ करने का जज्बा था।

मां और परिवार — योग्यता से मानते हैं, और आखिर में मां का सबसे प्यारा

JY-0017 · 15 जून 2026

परिवार में अनेक भाई थे; मां का लगाव उस बेटे से ज्यादा था जो गाने और रामायण पढ़ने में अच्छा था।

बचपन की इच्छा, ज्योतिष और फिर संन्यास

JY-0001 · 25 अगस्त 2024

जन्मभूमि उत्तर प्रदेश रही; बचपन से समाज के लिए कुछ करने की इच्छा थी।

2011 जन्माष्टमी की दीक्षा — “गोविंद दास” नाम, और तीन गुरु

JY-0018 · 19 जुलाई 2026

2011 में कृष्ण जन्माष्टमी को मलाड के बागेश्वरी आश्रम (उदासीन बड़ा अखाड़ा) के महंत से दीक्षा ली; नाम पड़ा गोविंद दास।

गुरु से बात नहीं जमी — “41 दिन का पक्का कौन करेगा?”

JY-0002 · 25 अगस्त 2024

गुरु से कहा कि कुछ समझ में नहीं आ रहा; उत्तर मिला — धीरे-धीरे होगा।

खोज

ब्रह्मचर्य की आग और गुरु से झगड़ा — “इसी जन्म में चाहिए”

JY-0019 · 15 जून 2026

25-27 की उम्र, शरीर में बहुत ऊर्जा — ब्रह्मचर्य रुक नहीं रहा था; स्वामी विवेकानंद की तस्वीर से प्रेरणा मिलती थी।

“मैंने कुछ नहीं छोड़ा” — घर, मां और शादी का प्रश्न

JY-0020 · 25 अगस्त 2024

घर नहीं छोड़ा, मां से मिलते रहे, आज भी जाते हैं — “लोगों ने मुझे छोड़ दिया, क्योंकि मैं बेकाम का हो गया।”

नया-नया संन्यासी — सोमनाथ, जूनागढ़ और ट्रेन वाले महाराज जी

JY-0004 · 3 सितंबर 2026

सोमनाथ में रात को एक महाराज जी मिले; जूनागढ़ स्टेशन पर फिर मुलाकात हुई और एक ही ट्रेन में साथ बैठे।

12 ज्योतिर्लिंग, चार धाम और गंगासागर की यात्रा

JY-0003 · 25 अगस्त 2024

जितनी सामर्थ्य थी — 12 ज्योतिर्लिंग, चार धाम, गंगासागर की यात्रा की; संशय वाले दो स्थान भी करके 14 किए।

भगवान के लिए कर्ज — पूरा पर्स खाली कर देना

JY-0021 · 15 जून 2026

12 ज्योतिर्लिंग, चार धाम, गंगासागर, शक्तिपीठ — “जितनी मेरी सामर्थ्य है, जाऊंगा।”

हवन का धुआं, सवा लाख जप — “मुझे बस पहुंचना था”

JY-0022 · 25 अगस्त 2024

निकलने के बाद से आज तक सोना-उठना, कहां जाना — कुछ तय नहीं; रात-दिन नहीं देखा।

कपड़े बदलकर देखा — आवरण का अनुभव

JY-0023 · 15 जून 2026

गेरुआ, फिर टी-शर्ट-ट्राउजर, फिर कई साल कुर्ता-पजामा, फटे कपड़े — “मैंने सब आवरण का उपयोग करके देखा।”

ज्योतिष के पुराने यजमान का पैसा — “आज लालच को मार दिया”

JY-0024 · 2 सितंबर 2025

मुंबई में ज्योतिष के कारण बहुत लोग जुड़े थे; एक दिन पैसे की जरूरत हुई तो एक पुराने यजमान को फोन किया।

विरार की बरसाती रात — जब मृत्यु को स्वीकार किया

JY-0005 · 25 अगस्त 2024

साधना के दिनों में खाने और दवा तक का पैसा नहीं रहा; एक स्टेशन दूर बहन रहती थी, पर कोई विकल्प इस्तेमाल नहीं किया।

काल भैरव मंदिर की रात — शराबी का पैसा पुजारी को, और ट्रेन में भूख

JY-0025 · 6 जुलाई 2026

भोजन करें तो मुंबई का किराया नहीं, किराया दें तो भोजन नहीं — ज्योतिष से पैसा कमा सकते थे, पर नहीं किया।

इंदापुर के फलाहारी महाराज और गाड़ी वाले महाराज — जब उत्तर नहीं मिला

JY-0026 · 10 अप्रैल 2024

पुणे के पास इंदापुर में 40 साल से फलाहारी एक प्रसिद्ध महाराज से रोते हुए मार्ग पूछा — “जिस लिए आप आए हो, मैं वह काम नहीं करता।”

सड़े पांव, वाराणसी और केदारनाथ की पैदल चढ़ाई

JY-0006 · 25 अगस्त 2024

गांव में नवरात्रि में तीन अखंड ज्योति संभालते-संभालते पांव सड़ गए; फिर भी दवा न लगाने का संकल्प था।

बद्रीनाथ के अनाम महात्मा — जो बस के पीछे दौड़े

JY-0007 · 25 अगस्त 2024

पैरों से खून टपक रहा था; एक बुजुर्ग महात्मा ने गर्म कुंड में पांव धुलवाए और बिना पैसे दर्शन कराए।

ओंकारेश्वर की ठंडी रात — “लगेज नहीं तो कमरा नहीं”

JY-0008 · 25 अगस्त 2024

खोज में लालच भी आता है, जरूरत भी — शरीर को बिस्तर भी चाहिए।

ओंकारेश्वर का आश्रम छोड़कर नर्मदा तट पर ठंडी रात

JY-0027 · 20 जुलाई 2026

किसी ने भेजा कि ओंकारेश्वर के एक आश्रम के महाराज कुछ बताएंगे; वे नहीं थे — कोठारी ने कहा, खाओ, आराम से रहो।

फटे कपड़े, वेटिंग रूम और चुपचाप सहे अपमान

JY-0009 · 25 अगस्त 2024

दिल्ली में ट्रेन लेट थी — फटे कपड़े देखकर वेटिंग रूम में जाने से रोका; टिकट दिखाया तो सॉरी।

परिक्रमा मार्ग में नदी में गिरे — “मैं परिक्रमावासी नहीं हूं”

JY-0028 · 19 अप्रैल 2025

एक बार जाते हुए नदी में गिर गए, उंगली पत्थर से कट गई, खून बह रहा था, जेब में एक रुपया नहीं।

2019 — नर्मदा तट पर जब एक महात्मा ने मारा

JY-0010 · 25 अगस्त 2024

सत्संग सुनने गए, “नर्मदे हर” कहा तो एक महात्मा ने सीने पर तीन बार मारा — फटे कपड़ों के कारण।

उपलब्धि

आखिरी समय — “परमात्मा, मैं आखिर करूं क्या?”

JY-0011 · 25 अगस्त 2024

“मुझे कुछ नहीं चाहिए” — यह फैसला 2011 में ही कर लिया था।

परिक्रमा वाले महाराज जी, “एक करोड़” का प्रस्ताव, और 2020 में अपने आप हो जाना

JY-0012 · 25 अगस्त 2024

भूखे थे, एटीएम से पैसा नहीं निकला; नर्मदा परिक्रमा वाले एक महाराज जी के साथ चल दिए।

नर्मदा तट पर अंतिम खोज — “भोजन तो कुत्ते को भी मिलता है”

JY-0030 · 16 फरवरी 2025

रावेरखेड़ी लौटे; एक ब्रह्मचारी ने कहा, नर्मदा तट पर रहो, खाओ-पियो — “भोजन के लिए निकला हूं तो मुझमें और कुत्ते में क्या फर्क?”

खोज

चिलम वाले बाबा — “इससे परमात्मा मिलेगा तो दोनों हाथ से पिऊंगा”

JY-0029 · 15 जून 2026

घूमते हुए एक बाबा मिले जो बहुत चिलम पीते थे — “मैं तुम्हें बताऊंगा।”

उपलब्धि

बहन के घर का अनुभव — “जब तक काम का था, भगवान था”

JY-0031 · 20 जुलाई 2026

बहन के यहां रहते थे; जब तक पूजा-पाठ, तंत्र-मंत्र से उन्हें लाभ होता था, वे फोटो लगाकर पूजा करते थे।

“यह ज्ञान सीखा हुआ है, मेरा नहीं” — और मिलने के बाद

JY-0032 · 12 जुलाई 2026

उपलब्धि से पहले लोग कहते, आपको ज्ञान है — “यह बाहर से सीखा है, मेरा नहीं; मैं इसके लिए नहीं निकला।”

सेवा

2020 के बाद — रावेरखेड़ी का सत्संग, गांव-गांव, और मां नर्मदा का प्रेम

JY-0033 · 16 फरवरी 2025

मुंबई के कमरे में फरवरी से 1 जुलाई तक रहे, फिर गुजरात; “कब प्रश्न हट गए, उत्तर हो गए, पता नहीं चला।”

गांव-गांव सत्संग और अपनों की कुटिया का भाव

JY-0013 · 25 अगस्त 2024

आत्मज्ञान के बाद गांव-गांव घूमकर लोगों को ज्ञान देने लगे।

“न बाबा बनना था, न साधु — मुझे सिर्फ काम करना था”

JY-0034 · 16 अक्टूबर 2026

जीवन में बस यह चाहा कि अपने आप को उस लायक बनाऊं कि समाज के लिए कुछ कर सकूं — “और वह मैं कर रहा हूं।”

जयेश भाई के दो लाख और सहयोग राशि से गाड़ी नहीं

JY-0014 · 3 सितंबर 2026

अमेरिका से आए जयेश भाई के दो लाख नकद सुरक्षित रखवाए और जाते वक्त लौटा दिए।

पिल्ले का इलाज — कर्ज लेकर, किसी का पैसा लिए बिना

JY-0015 · 3 सितंबर 2026

पिल्ले के पैर टूटे तो पैसे नहीं थे; जयेश भाई ने खर्च देने को कहा, पर साधक से नहीं लिया।

गुरु जी के जीवन से जुड़े प्रश्नोत्तर (47)

जब जिज्ञासुओं ने गुरु जी से उनके अपने जीवन के बारे में पूछा।

P18-0007

गुरु जी, आपका संक्षिप्त परिचय दीजिए — आपकी यात्रा कहां से और कैसे शुरू हुई?

P19-0132

गुरु जी, आपके गुरु कौन हैं? आपको दीक्षा कैसे मिली, और उन्होंने आपको सद्गुरु ढूंढने क्यों भेजा?

P8-0084

संप्रदाय का नाम क्या है? आपके गुरुदेव कौन हैं? कृपया बताइए।

P4-0190

(वही साधिका) आपने अपनी यात्रा कैसे की — आप पहले क्या करते थे, और फिर एकदम से ऐसा जीवन कैसे बना लिया? पैसे की चिंता कैसे नहीं हुई?

P18-0037

गुरु जी, वह चिलम वाली घटना क्या थी?

P18-0014

गुरु जी, साधना के दौरान जब खाने और दवा तक का अभाव हो गया, तब आपने क्या किया?

P6-0081

साधना काल में ऐसी कौन सी परीक्षाएं आती हैं, जिनका पहले से अनुमान नहीं हो सकता? जगह से निकाल दिया जाए, तौलिया चुराने का इल्जाम लग जाए, या धन और आश्रम का लालच दिया जाए, तब साधक कैसे रहे?

P20-0106

गुरु जी, आपकी साधना काल में परीक्षाएं कैसी हुईं?

P18-0017

गुरु जी, आपकी इष्ट मां काली रहीं — आपका देवी साधना से क्या संबंध है?

P18-0015

गुरु जी, केदारनाथ की पैदल यात्रा में डर और दर्द के बीच आपने क्या समझा?

P18-0016

गुरु जी, बद्रीनाथ में मिले उन अनाम महात्मा का क्या प्रसंग है?

P21-0137

गुरु जी, जब आप हमारी तरह साधक थे, तब क्या आपको लगता था कि आपको आत्मज्ञान हो जाएगा?

P18-0008

गुरु जी, खोज के दौरान जब लोगों ने आपको मारा, गाली दी या फटे कपड़ों के कारण अपमान किया, तब आपने क्या किया और क्या समझा?

P18-0009

गुरु जी, आप यहां तक कैसे पहुंचे — आखिरी समय कैसा था और आत्मज्ञान कैसे हुआ?

P12-0161

आपको 2020 में (उपलब्धि) घटित हुई थी। उससे पहले की आपकी कहानी थोड़ी सुनाएंगे? जो भटकाव आपके जीवन में था, वो अब हमारे जीवन में आया है — तो उससे हमारा थोड़ा मार्गदर्शन हो सके, हम अपने आप को उससे जोड़ पाएं।

P3-0116

आपको आत्मज्ञान (उपलब्धि) कब हुआ — क्या उसकी कोई तारीख है? उससे पहले क्या स्थिति थी?

P12-0009

आपने आत्मज्ञान के लिए अथक परिश्रम किया; पर जिस क्षण आत्मज्ञान हुआ, क्या उससे एक क्षण पहले आपको पता चला था कि वह होने वाला है, या वह चमत्कार की तरह घटित हुआ?

P4-0140

(कुटिया में सन्यासी महाराज जी) गुरु जी, कल आप सिद्धेश्वर गए, वीडियो में देखा। आपने कहा था कि आपकी खोज की आखिरी जगह वहां थी — क्या उपलब्धि उस स्थान पर हुई? क्या वह स्थान उस पल का साक्षी है?

P8-0059

आपको आत्मज्ञान के लिए बारह साल लग गए?

P18-0010

गुरु जी, "अपनों की कुटिया" बनाने का भाव क्या है?

P22-0150

गुरु जी, आपको कैसे लगा कि कुटिया यहीं बनानी है, यही वह जगह है?

P2-0139

योगी जी, अब आपके जीवन का अंतिम लक्ष्य क्या है, जो आपको आगे जीने के लिए प्रेरित करता है?

P23-0158

गुरु जी, अगर बेईमान आदमी के पास शक्ति और ताकत है, तो ईमानदार और सत्य क्या करेगा? क्या यह आपके जीवन में आजमाई हुई बात है?

P7-0112

एक कुत्ता मर गया था। उस रात आप चैन से सो नहीं पाए, सुबह भी बेचैन रहे। चेहरे पर थकान के साथ ऐसा दुख था, जो हमारे दुख जैसा नहीं। एक कुत्ते के लिए अंदर से इतना प्रेम और तड़प है, तो यहाँ रहने वालों के लिए अंदर से कितना गहरा प्रेम रहा होगा? हम समझ नहीं पाते। गलतियाँ समझ के साथ और बिना समझे होती रहती हैं। कुछ भी हो, हाथ पकड़कर रखिए।

P18-0036

गुरु जी, आपकी साधना का क्रम क्या था — कितने घंटे, कौन-सी साधना, कोई अनुशासन या क्रम था?

P18-0038

गुरु जी, क्या आपने घर-परिवार छोड़ दिया? परमात्मा की खोज और सामने वाले व्यक्ति में आप किसे प्राथमिकता देते थे?

P18-0040

गुरु जी, क्या आपको मां का प्रत्यक्ष दर्शन हुआ?

P20-0113

क्या आप हर दिन संकल्प करके निकलते थे कि आज खाना या पैसा नहीं लेना? साधना में आपने कौन से नियम बनाए?

P15-0059

आपको आत्मज्ञान कैसे हुआ? आपके जीवित गुरु कौन हैं?

P16-0055

गुरु जी, आपके जीवन का वह पॉइंट बताइए जहां से आप आध्यात्म से जुड़े; आध्यात्म से पहले और बाद आपकी क्या स्थिति रही, और आपके आत्मज्ञान का अनुभव क्या है?

P16-0087

एक समय में आप वैक्सीन लाइन में थे — क्या वह भी आपके जीवन में आत्मज्ञान की स्थिति थी?

P16-0091

गुरुदेव, आपके जीवन की कोई ऐसी सीख बताइए जो साधकों को राह दिखाए।

P16-0151

गुरु जी, आपको 12 साल भटकने के बाद, इतने कष्ट झेलने के बाद आत्मज्ञान हुआ। तो क्या हर आदमी को उसी प्रकार आत्मज्ञान होगा?

P3-0181

(कुटिया में साधक) आप तो भगवान के पद को प्राप्त हुए; आपने वीडियो में बताया कि उस स्थिति में आने के लिए आपने कितनी मेहनत की। बाकी सबने वेदों के पठन आदि से ज्ञान लिया, पर आपके यहां तो खाली प्रत्यक्ष ज्ञान का मूल — ईमानदारी, सत्कर्म और सत्संग — है। क्या इतने से हो जाएगा, और जीवन में गुरु की कितनी जरूरत है?

P5-0037

क्या आपको कोई आत्मज्ञानी मिला? तीन अद्भुत लोगों की घटना क्या है?

P10-0143

गुरु जी, आप में डर, डाउट या चिंता नहीं है — क्या यह आत्मज्ञान की वजह से है, या आप पहले भी ऐसे ही थे?

P21-0026

गुरु जी, इस सुनसान पहाड़ी के प्राचीन मंदिर पर आप कब से आ रहे हैं, यहां की क्या विशेषता है?

P23-0176

गुरु जी, आपने कौन-कौन सी साधना करके आत्म-अनुभूति पाई है? कृपया बताइए।

P2-0029

क्या आपने कभी नर्मदा जी की परिक्रमा की है? अपने अनुभव बताइए।

P2-0086

आप कहां से हैं?

P5-0002

(वही साधिका) आप जब खोज करते थे, तो आत्म-चिंतन से करते थे या किताबों से? और गिरना-उठना मन की स्थिति से पता चलता है?

P9-0009

कल आपने कहा कि आपको कभी खुद में कमी महसूस नहीं हुई। लेकिन अगर कमी नहीं थी, तो कुछ चाहिए का भाव क्यों था, जिसके कारण किसी की गाली महीनों तक पीड़ा देती रही?

P13-0136

गुरु जी, आपकी माताजी जब बीमार थीं, अंतिम समय में आप उनके पास क्यों नहीं थे? क्या उनको आपको याद करके दुख होगा?

P16-0165

(लाइव) गुरु जी, जैसे रामकृष्ण परमहंस को महाकाली साक्षात दर्शन देती थीं, वैसे ही क्या मां ने आपको कभी साक्षात दर्शन दिए?

P19-0113

गुरु जी, आप कहते हो कि आपने कभी किसी के दरवाजे जाकर भोजन तक नहीं मांगा। क्या यह अहंकार की बात नहीं हुई?

P19-0133

गुरु जी, आपकी बात पर एक व्यक्ति ने मजाक-मजाक में आपको गहरा घाव कर दिया था। उस घटना से आपने क्या सीखा?

P22-0181

गुरु जी, आपने एस्ट्रोलॉजी में करियर शुरू किया था, उसमें नाम और पैसा था — उसका भ्रम आपने कैसे छोड़ा? क्या ग्रह-नक्षत्र के प्रभाव बदले नहीं जा सकते?