आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P25-0001 · भाग 25

गुरु जी, मैं फंसी हुई हूं क्योंकि मैं यह सोचती हूं कि लोग क्या कहेंगे। इस समाज में लड़कियों की स्थिति आज भी खराब है, और मां-बाप भी अच्छे नहीं हैं। क्या करूं?

देखो, ना कोई अच्छा है ना कोई बुरा है। कमी कहीं ना कहीं आप में है — आप कहीं ना कहीं सामर्थ्यवान नहीं हो। जब आपकी कमजोरी है तो आपको कोई स्वीकार नहीं करता। आप देखो, हमेशा मजबूत चीजों को ढूंढते हो, मजबूत को स्वीकार करते हो, कमजोर को अस्वीकार करते हो। कोई वस्तु भी लेने गए हो तो अपनी योग्यता के अनुसार मजबूत चीज खोजते हो, कमजोर को हटा देते हो। तो चाहे मां-बाप हैं, चाहे भाई-बहन हैं, समाज का कोई व्यक्ति है — अगर आपको स्वीकार नहीं कर रहा है तो इसका मतलब कहीं ना कहीं आप कमजोर हो। यह कहने से ज्यादा अच्छा है कि आप अपनी स्थिति को बदलो। यह मत कहो कि ये बुरे हैं, मेरे मां-बाप ठीक नहीं हैं। सब ठीक हैं, तुम ठीक नहीं हो — गड़बड़ी अपने अंदर है। पानी में पानी मिला दो, स्वीकार कर लेता है; पानी में तेल मिलाओ, स्वीकार नहीं करता, क्योंकि दोनों विपरीत हो गए। तो आपको यह देखना है कि मुझे स्वीकार क्यों नहीं किया जा रहा है — क्या मेरे कर्म ऐसे हैं? अगर अच्छे कर्म इतने हैं कि बुरे लोग स्वीकार नहीं कर पा रहे, तो उस जगह को छोड़ दो, अपनी अच्छाई जहां स्वीकार करें वहां फैलाओ। और अगर लोग अच्छे हैं और आप बुरा काम कर रहे हो, तो अपनी बुराई छोड़ के अच्छाई अपना लो। आप अपने आप को कब देखोगे? बस दुनिया को देखते हो — ये बुरा, ये अच्छा। अपनी स्थिति देखो कि आपके द्वारा क्या हो रहा है, आपके जीवन में कैसे बदलाव आएगा — उसके लिए काम करना पड़ेगा। अगर आप चाहते हो कि कोई स्वीकार करे, तो वह जैसा चाहता है वैसा आपको होना पड़ेगा। इस बात को गहराई से समझो, अपने आप को सामर्थ्यवान बनाओ और अपने जीवन में आगे बढ़ो।

सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें

वीडियो: 32 सुबह अपनों की कुटिया हरियाणा यमुना तट #योगी · 2026-10-25