प्रश्नोत्तर P25-0009 · भाग 25
गुरु जी, यहां नियमों के साथ रहना पड़ता है — मोबाइल बंद, व्यवहारिक बातें नहीं — तो कभी-कभी घुटन सी होती है। क्या ये नियम हैं?
मैं आप लोगों से पूछ रहा हूं कि क्या ये नियम है? आप यहां आए हो अपने आत्मिक कल्याण के लिए, आत्मिक चिंतन के लिए, साधना के लिए — तो मोबाइल स्विच ऑफ और व्यवहारिक बातें नहीं, ये नियम ही नहीं है। अब कोई क्लास में टीचर लेक्चर दे रहा है और बच्चे मोबाइल से बात करें, तो फिर लेक्चर देने का क्या मतलब? टीचर कहे फोन स्विच ऑफ कर दो, तो बच्चे बोलें ये तो नियम है — नियम कहां है? आप कुछ ले रहे हो, कुछ भर रहे हो। एक जगह से भरोगे तो पूरी तरह भर पाओगे; इधर से भर रहे हो और उधर से भरने लगे तो इधर का छूट जाएगा, फिर आने का क्या मतलब? जहां पे भी गए हो, जिस उद्देश्य से गए हो उसको तो पूरा करना पड़ेगा। मिलिट्री की भर्ती में जाकर कहो हम दौड़ नहीं पाते, तो भर्ती होगी? हर विभाग का एक सिस्टम बनाया गया है कि ऐसे-ऐसे करोगे तो इस पद पर आ सकते हो; कोई कहे ऐसे नहीं करूंगा, सीधा पद पर बैठा दो, तो उसे भगा दिया जाएगा, क्योंकि लाइन लगी है। जहां कुछ लेने जा रहे हो वहां का एक सिस्टम है, उस सिस्टम को पार करना ही पड़ेगा, तभी तो वह पाओगे। आप कहो ये सिस्टम बदलो, तो सिस्टम तुम्हारे लिए थोड़ी ना बदलेगा, क्योंकि सिस्टम ऐसे नहीं बन जाता — सिस्टम बनाने के लिए उस योग्यता, उस काबिलियत को हासिल करना पड़ता है। और समझ के अपनाओ तो उसमें आनंद मिलेगा।
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