प्रश्नोत्तर P25-0021 · भाग 25
गुरु जी, सेवा और सत्कर्म के बीच अभी भी क्लैरिटी नहीं समझ पा रहा हूं, कहीं द्वंद है।
देखिए, सेवा एक होता है कि जिम्मेदारी है, दायित्व है, कर्तव्य है — हम अपने मां-बाप की सेवा कर रहे हैं, तो वह सेवा है। सत्कर्म मतलब जरूरतमंद की कर रहे हैं, वो चाहे कोई भी हो — अपने सामर्थ्य के अनुसार। तो यह सत्कर्म है।
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