आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P25-0101 · भाग 25

गुरु जी, शिष्य को गुरु की खोज में निकलना चाहिए या गुरु को शिष्य की खोज करनी चाहिए? क्या गुरु की भी तमन्ना नहीं होती कि शिष्य को खोज करके उसका सफर आसान कराए?

शिष्य को गुरु की खोज करनी चाहिए। जब शिष्य की खोज होती है तो गुरु मिल जाता है, आसान कराने के लिए। अगर खोज ही नहीं है तो गुरु मिल भी जाए तो करोगे क्या? तलाश एक तरफ से होगी तो दूसरा मिल जाएगा। जैसे इस संसार में प्रकृति में — नर हमेशा तैयार है, लेकिन मादा का समय होता है गर्भधारण का; मादा तैयार नहीं तो कितने भी नर ला दो, करेंगे क्या, चले जाएंगे। और तैयार है तो आप भगाओ भी तो नहीं भागेंगे। तो तैयारी आपको करनी पड़ेगी, जो चाहिए फिर आपको मिल जाएगा, प्रकृति भेज देगी। प्रकृति स्वयं गुरु है। आप शिष्य तो बनिए, वो खुद किसी न किसी गुरु को भेज के करवा देगी। शिष्य आपको बनना पड़ेगा, गुरु मिल जाएगा — जैसी आपकी योग्यता होगी, वैसा मिल जाएगा। और आप योग्य ही नहीं हो तो कितने भी गुरु आ जाएं, फिर करेंगे क्या? आप अगर तैयार हो गए तो गुरु दरवाजा तोड़ के आ जाएगा, बोलेगा — चल। जैसे रामकृष्ण परमहंस तैयार हो गए तो उनके पास तोतापुरी आ गए। तो तैयार आप हो जाइए, बस बात खत्म। शिष्य ही तैयार नहीं हो तो गुरु आके करेगा क्या? गुरु तो एकदम तैयार है।

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वीडियो: मोह और प्रेम गलत है या सही ? #yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान #प्रत्यक्षज्ञान #साधना · 2026-06-16