प्रश्नोत्तर P25-0104 · भाग 25
गुरु जी, गुरु और शिष्य की बातचीत में कोई बात हमें समझ में न भी आए, फिर भी क्या गुरु-शिष्य के बीच शब्दों के अलावा भी कुछ होता है, जिससे विचार बदलते हैं?
आंतरिक ऊर्जा होती है। आप सिर्फ शब्द नहीं सुन रहे हो — शब्दों में ऊर्जा है। इसीलिए कहा जाता है ना, जीवंत गुरु ढूंढ। क्या ये शब्द उपनिषद, वेद, वेदांत, गीता में नहीं हैं? पर जीवंत गुरु के शब्दों में ऊर्जा होती है। जीवंत गुरु के सामने आपकी कामनाएं काम नहीं करतीं। वो सीधा आपसे बात करता है, सीधा आत्मा तक पहुंच जाता है, सीधा आत्मिक बात करता है। उसके सामने इंद्रियां वगैरह काम करना बंद कर देती हैं। इसलिए आपके तीन-तीन घंटे बीत जाते हैं, आपको पता नहीं चलता — कहीं एक घंटा नहीं बैठ सकते, यहां तीन-तीन, चार-चार घंटे बैठ जाते हो, क्योंकि आत्मिक सुकून मिल रहा है, आत्मिक शांति मिल रही है। मेरे पास बच्चे आते थे, रात 2-3 बजे तक बैठते थे; बोलते थे कि हम कभी इतना बैठ नहीं पाते, जाने की इच्छा एकदम नहीं है, पर सुबह काम पे जाना है। तो जीवंत गुरु जो आत्मज्ञानी होता है, वो सीधा आपसे बात करता है। वहां पे आपकी कामनाएं, राग-द्वेष कुछ काम नहीं करते, सब शिथिल हो जाता है। ऊर्जा भी रहती है, समझ में भी आता है सबको, एहसास भी होता है।
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वीडियो: मोह और प्रेम गलत है या सही ? #yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान #प्रत्यक्षज्ञान #साधना · 2026-06-16