प्रश्नोत्तर P25-0150 · भाग 25
गुरु जी, आत्मज्ञानी पुरुष को भी पिछले किए कर्म का फल तो भोगना ही पड़ेगा — तो भोगते समय क्या उसे शारीरिक पीड़ा होती है?
शरीर को होती है, उसे नहीं — उसे दुख नहीं होता। ना दुख, ना सुख, ना पीड़ा — बस देखेगा। जैसे हम दूसरे की पीड़ा देखते हैं, वैसे ही वो अपनी पीड़ा भी देखेगा। और जैसे आप मानवता के वश दूसरे को बचाते हैं, वैसे वो अपनी पीड़ा को भी घटाएगा, क्योंकि शरीर से काम करना है। ये अलग होना आत्मज्ञान के बाद ही होता है, पहले कैसे होगा? घी तभी दूध से निकलेगा जब दूध मिट जाएगा।
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वीडियो: समय बीत जाने के बाद समझ क्यों आती है ?#yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान #प्रत्यक्षज्ञान · 2026-06-15