आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P25-0199 · भाग 25

गुरुदेव, जीवन में कहीं पर भी बंधन तो है नहीं, एकांत में भी रहती हूं — लेकिन सूक्ष्म बंधन को कैसे जानें? मार्गदर्शन कीजिए।

बंधन तो है। अगर बंधन नहीं होता तो आप उस स्थिति में होते। आप ये समझने का प्रयास करिए — अगर आपकी स्थिति भी नहीं है, और आप स्वीकार कर लिए कि कोई बंधन भी नहीं है, राग-द्वेष, मोह, आसक्ति, इच्छा, अपेक्षा, मेरा, कर्ता का भाव भी नहीं है, कहीं मान की इच्छा भी नहीं है — तो फिर एक तो स्थिति नहीं है। मशीन बनी नहीं, तो कहीं ना कहीं बिगड़ी है, नहीं तो बन जाती। अब उसका परिणाम भी नहीं आ रहा है, और आप कह रहे हो कि कहीं बिगड़ी भी नहीं है — दोनों बातें नहीं हो सकती। तो आप उस परम स्थिति पर नहीं हो, तो इसका मतलब कहीं ना कहीं उलझे हो। उस उलझन को दूर करो। बोलने से बात नहीं होगी। ऐसे समय आपका चला जाएगा, धीरे-धीरे समय बर्बाद हो जाएगा।

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