आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

सत्संग PV03-0023 · भाग 3

परेशानी आती नहीं है, परेशानी के लिए हम काम करते हैं — योग्यता देख के आगे बढ़ो, और निंदा से भागिए मत

7 मार्च 2026 · हमारी परेशानियों का समाधान कैसे होगा ? आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

चैनल: Aadhyatmik Pratyaksh Gyan

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मुख्य बातें

तकलीफ कब होती है

देखो, तकलीफ कब होती है? जब हम जीवन में जरूरत से ज्यादा चाहते हैं, मान के लिए हम काम करते हैं। किसी से लेके-देके जब हम काम कर लेते हैं और बाद में लोग हमारे यहां मांगने आ जाते हैं, तो हमें आ जाती है तकलीफ। आप जितना आपका दायरा है, जितना आपका अधिकार है, जितनी आपकी योग्यता है, सामर्थ्य है, वो देख के काम करो ना। आप मान के लिए, कुछ सम्मान पाने के लिए अपनी योग्यता से ज्यादा काम करोगे, तो आप अपने आप पछताओगे। पछताना ही पड़ेगा, क्योंकि आपने अपनी योग्यता से ज्यादा कर दिया है। आप भरपाई कहां से करोगे?

अपनी इनकम से ज्यादा आपने काम कर दिया, और जब भरने की बारी आई तो परेशान हो गए। परेशान तो हो जाओगे ना? आप अपनी सामर्थ्य, अपनी योग्यता को देख के आगे बढ़ो। आपकी जितनी सामर्थ्य है, आप उतना काम करो। आप क्या करते हो? सामर्थ्य से अधिक काम कर लेते हो, लोगों का सपोर्ट लेके। लेकिन लोगों ने सपोर्ट वापस लेने के लिए किया है।

परेशानी के लिए हम स्वयं काम करते हैं

कुछ समय बाद जब वो मांगने लगते हैं, तो आप कहते हो लोग परेशान कर रहे हैं। परेशान कोई नहीं कर रहा है। देना भी तो पड़ेगा। आप लेते वक्त तो यही कहे थे ना कि लौटा दूंगा कुछ दिनों में। लेकिन आपने कईयों से ले लिया। कईयों ने यही समझ के दिया कि दे देंगे। लेकिन क्या हुआ? आपका इनकम तो कम है और आपने ले ज्यादा लिया, तो उस परेशानी का कारण आप स्वयं हो। आप परेशानी खड़ी करते हो। परेशान होने के लिए आप स्वयं काम करते हो।

परेशानी आती नहीं है। परेशानी के लिए हम काम करते हैं। जो भी हमारे जीवन में आ रहा है, उसके लिए हम काम करते हैं। ऐसे ही थोड़ी ना आ रहा है। तो आप सोच-समझ के काम करिए।

कोई विघ्न डाल रहा है तो पहले देखिए

और अगर आपको ऐसा लगता है कि कोई आपके कार्य में विघ्न डाल रहा है, तो जरूर आप उसे भी देखिए — कहीं ऐसा तो नहीं जो मैं कार्य कर रहा हूं, उससे उसको तकलीफ हो रही है? अगर सच में तकलीफ का कारण है, वो कार्य कुछ उसके अधिकार में आता है, आप जबरदस्ती कर रहे हो, तो वो तो आपके काम को रुकावट डालेगा। और अगर उसके अधिकार में नहीं होगा, उसका कुछ दायरा नहीं होगा जो आप कार्य कर रहे हो, तो कितना भी विघ्न डाले, डाल ही नहीं सकता। वो प्रयास करेगा, हो थोड़ी ना पाएगा; किसी भी तरीके से वो सफल नहीं हो पाएगा।

तो आप अपने कार्य को ईमानदारी से करिए, और यह ध्यान दीजिए कि जो मैं कार्य कर रहा हूं, ऐसा तो नहीं उस कार्य से अनेक लोगों को दुख पहुंच रहा है, क्षति पहुंच रही है, नुकसान पहुंच रहा है — तो वह कार्य मत करिए। किसी को दुखी करके आप भी कार्य मत करिए। अगर इतना नियत आपका सही है, तो कोई आपके कार्य में विघ्न डाल ही नहीं सकता। आप अगर कुछ नहीं किए हैं, तो आप पे आरोप लगाया जा सकता है, सिद्ध नहीं किया जा सकता। रोक तब पाएगा जब उसका भी कुछ अधिकार उसमें होगा और आप उससे छीन रहे होंगे।

जलन रहने दो, आप अपना कार्य करो

कोई किसी को कार्य से रोक नहीं सकता। कुछ लोगों में जलन रहती है — वो रहने दो ना। आपको क्या करना है? उससे क्या मतलब है? आप अपना कार्य करो ना। उस पे ध्यान मत दो। वो अपना कार्य कर रहा है, तुम अपना काम करो। आपको भी आपकी मजबूती का पता चलेगा — आप कितने मजबूत हो, कितने सामर्थ्यवान हो। भाई, आप युद्ध करने जाओगे तो लोग आपको हराने तो आएंगे ना। सबको जीतना है यहां। जीत सबको चाहिए; हारना किसे है?

कुछ लोग बिना परिश्रम के जीत को हासिल करना चाहते हैं, तो करने दो, उनका कार्य है। बिना जीत के इनाम मिल सकता है क्या? अगर कोई चिल्लाने लगे आके कि मैं भारत का सर्वश्रेष्ठ आदमी हूं, दुनिया का सर्वश्रेष्ठ आदमी हूं, तो क्या हो जाएगा? कर्म से आदमी श्रेष्ठ होता है। ऐसे तो नहीं सबसे श्रेष्ठ हो जाएगा; उसके लिए उसको काम करना पड़ेगा। चिल्लाने से, बोलने से कुछ नहीं हो जाएगा। कोई कहे मैं यह बन गया, तो क्या बन जाएगा? नहीं बनेगा। जब योग्यता होगी और उसे डिग्री मिलेगी, तब बनेगा ना।

कमजोर सिद्ध करता है, महान का कर्म बताता है

बोलने के लिए कोई कुछ भी बोल सकता है। आप अगर बोलने पे जाओगे, तो इसका मतलब आप सही तरीके से अपना कार्य नहीं कर रहे हो; आप बस लोगों पे ध्यान दिए हो कि लोग मेरे बारे में क्या बातें करते हैं। जो कमजोर आदमी होता है ना, वो हमेशा यही सब बातों पे ध्यान देता है। जो मजबूत आदमी होता है, वो अपना कार्य सही तरीके से करता है। जो महान लोग होते हैं, उनको लोग कितना उल्टा-सीधा बोलें, वो पलट के जवाब नहीं देते। जो कमजोर होते हैं, वो सबको जवाब ही देते फिरते रहते हैं; उनको हमेशा सिद्ध करना है कुछ होने का। और जो महान होते हैं, उनका कर्म के द्वारा सिद्ध हो जाता है कि ये महान है।

जो कमजोर लोग होते हैं, वो जीवन भर बस सिद्ध करना चाहते हैं कि मैं कैसे लोगों को बता दूं कि मैं कुछ हूं। वो कर नहीं पाते हैं, बस बोलते रहते हैं, और लोग उन पे हंसते रहते हैं, खिल्ली उड़ाते रहते हैं — क्योंकि सबको सब पता है। कोई हांकता है, आपको पता है फेंक रहा है, फिर भी आप हां-हां कर देते हो — हां भाई ठीक है, चल तू इसी में खुश रह।

करने वाले जो होते हैं, बोलते नहीं हैं। उनका काम बताता है कि वो कुछ हैं, और वो अपने आप को कुछ नहीं मानते। वो कहते हैं, नहीं, ये तो मेरा काम था; यह तो मेरी मानवता थी, यह तो मेरा कर्तव्य था, दायित्व था। मनुष्य का जन्म हुआ है तो हमें कुछ करना है, हमें लोगों की मदद करना है — हमसे लेके हमारे परिवार से लेके समाज के लिए। वो यह नहीं सिद्ध करते मैं कुछ कर रहा हूं; वो करते हैं।

निंदा उसी की होती है जो कुछ करता है

आप लोगों पे ध्यान मत दो कि लोग आपके बारे में क्या बात करें। देखिए, बातें उसी के बारे में होती हैं जो कुछ करता रहता है। कुछ उसमें आलोचना करेंगे, कुछ निंदा करेंगे और कुछ आपकी बड़ाई करेंगे। अब आपको ये जांचना है कि मैं आलोचना वाला कार्य कर रहा हूं या बड़ाई वाला कार्य कर रहा हूं। अगर आलोचना वाला कार्य कर रहे हो, अपने आप को जांच लो, तो उसका त्याग कर दो; बड़ाई वाला काम करो। लेकिन स्वयं जांचो।

और आप जीवन में देखो — कुछ मत करो। पागल की बुराई कोई करता है क्या? गांव में, क्षेत्र में पागल घूमता होगा, उसकी कोई निंदा करता है? कोई नहीं करता। वो चाहे किसी को पत्थर मार दे, लोग उसे कहेंगे कि तुम उसके सामने क्यों गए? वो तो पागल है। पागल की निंदा नहीं होती। जीवन में जिसने कुछ नहीं किया है, उसकी निंदा नहीं होगी। जब तुम जीवन में सच में कुछ करोगे समाज के लिए, तो निंदा आपकी होगी। जब भी आप कुछ अलग करोगे, तो निंदा से नहीं बच सकते। निंदा तो आपको सुननी ही पड़ेगी, अपमानित तो होना ही पड़ेगा, क्योंकि आप कुछ नया कर रहे हो, अलग कर रहे हो।

निंदा से, गालियों से भागिए मत

और लोग आपका फिर बैकग्राउंड जांचेंगे, और जब पाएंगे कि यार बैकग्राउंड में तो कुछ नहीं था, तो यह कैसे कर ले — और शक करेंगे और आपको गालियां देंगे और आपकी निंदा करेंगे। लेकिन आप निंदा से, गालियों से भागिए मत। आप अगर निंदा से, गालियों से, आलोचना से भाग गए, तो आप समाज में कुछ कर नहीं पाओगे। देने दो गालियां, कम से कम दे तो रहे हैं। आप बस करिए — और ऐसा कुछ करिए कि वो जो गाली दे रहे हैं, वो भी इसका लाभ लें; आने वाले समय में उनको भी गलती का एहसास हो कि इस व्यक्ति की मैंने निंदा किया, यह इस लायक नहीं था। वो आकर खुद आपसे बोलें कि मैं आपको समझ नहीं पाया, समझने में गलती हो गई; आप जब शुरुआत किए थे तो मैं आपको समझ नहीं पाया। उनको खुद पश्चाताप हो।

लेकिन आप जा के लोगों को पकड़-पकड़ के सिद्ध करोगे कि मेरे बारे में क्यों निंदा करते हो, तो कुछ मतलब नहीं; फिर आप काम नहीं कर रहे हो। आप बस अपने कार्य पे ध्यान दो। होने दो निंदा, होने दो आलोचना। आलोचना-निंदा हो रहा है, इसका मतलब तुम कुछ कर रहे हो। अब क्या कर रहे हो, वो आपको देखना है — ऐसा तो नहीं सच में निंदा वाला काम कर रहा हूं? तो त्याग कर दो, सत्कर्म करो। और यह आप ही को जांचना है। किसी से सिद्ध मत करवाओ कि तुम अच्छा काम कर रहे हो कि बुरा काम कर रहे हो; आप देखो कि आप सच में क्या कर रहे हो।

तो निंदा-आलोचना हो रही है तो होने दो। व्यक्ति विशेष को मत पकड़ो, समाज को लेके चलो। समाज के लिए काम करना है, देश के लिए काम करना है, इस प्रकृति के लिए कुछ काम करना है। हमें व्यक्ति विशेष को नहीं देखना है।