आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P25-0017 · भाग 25

गुरु जी, आपका वेशभूषा नहीं है तो कहीं-कहीं आपका अनादर होता है — हम गुरु का अनादर होते हुए नहीं देख सकते, क्या करें?

होने दो, क्या फर्क पड़ता है। वो अज्ञानी व्यक्ति है, अनादर कर रहा है तो करने दो — गुरु को फर्क नहीं पड़ता। शिष्य अभी उस अवस्था में नहीं पहुंचा, तो शिष्य उस अवस्था में पहुंच जाए। अगर काम करना है तो अनादर तो मुझे सहना पड़ेगा; आप लोग उस स्थिति में होके दिखाओ। जब मेरे काम का परिणाम आएगा तो अनादर करने वालों को भी शर्म आएगी। एक शिक्षक जिसको पढ़ा रहा है, समाज को वही जवाब दे सकता है, शिक्षक नहीं दे सकता; और अगर उसका पढ़ाया हर विद्यार्थी फेल ही हो रहा है तो उसे अपमान सहना ही पड़ेगा। रामकृष्ण परमहंस को कौन जानता था? स्वामी विवेकानंद के द्वारा ही वे पूरे विश्व में जाने गए — शिष्य के द्वारा। तो अगर मुझे मेरे गुरु से प्रेम है और समाज को जवाब देना है, तो मैं एक ही काम करके जवाब दूंगा — जिस लक्ष्य के लिए वो मार्ग बता रहा है, वहां पहुंचकर उस लक्ष्य से मैं बोलूं। किसी को वाणी से जवाब मत दो, कर्म से जवाब दो।

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