आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P25-0030 · भाग 25

गुरु जी, प्रेम और मोह में क्या अंतर है?

एक में मतलब है और एक में बेमतलब है। मोह में मतलब है और प्रेम में बेमतलब है — बस यही अंतर है। मतलब में मोह है, बेमतलब में प्रेम। आजकल लोग कहते हैं मतलब में प्रेम है — मतलब में प्रेम हो ही नहीं सकता, मतलब में तो सिर्फ वासना होती है। प्रेम का मतलब — जब आपको कुछ नहीं चाहिए, उस समय आप प्रेम में होते हो, और किसी से भी मिलते हो तो उस समय उसके प्रति प्रेम रहता है, क्योंकि आपको कुछ भी नहीं चाहिए; आप उसके लिए मिल रहे हो — यही प्रेम की परिभाषा है। और यह ध्यान रखना, सामने वाला उसे महसूस भी करेगा। जब आप प्रेम में रहोगे तो यह मत समझना कि आप ही महसूस करोगे — आपके पास जो भी लोग रहेंगे, वे उसे महसूस कर पाएंगे। जैसे आप गुस्से में होते हो तो आपको बताना थोड़ी ना पड़ता है, आसपास के लोग महसूस कर लेते हैं कि आप गुस्से में हो; वैसे ही जब आप प्रेम में होते हो तो आसपास के सब लोग महसूस कर पाते हैं कि आप प्रेम में हो। और प्रेम में तभी होगे जब आपको कुछ नहीं चाहिए।

सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें

वीडियो: मोह और प्रेम गलत है या सही ? #yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान #प्रत्यक्षज्ञान #साधना · 2026-06-16