आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P25-0031 · भाग 25

गुरु जी, क्या ईमानदारी और सत्कर्म से हम मोक्ष, परमात्मा तक अवश्य पहुंच जाएंगे, या साधना में चलते-चलते धीरे-धीरे पता चलेगा? कृपया विस्तार से समझाएं।

ईमानदारी अपना के सत्कर्म करके इतना पक्का हो ही जाएगा आपको कि आत्मदर्शन पक्का होगा, और उसके बाद परमात्मा की यात्रा होगी। यह पक्का परमात्मा तक पहुंचाएगा — जरा सा भी संशय नहीं। आज तक जितने भी महापुरुषों ने बोला है, इसी के लिए बोला है; पृथ्वी पर अभी तक जितनी भी किताबें लिखी गईं, इतने के लिए लिखी गईं — ईमानदारी अपना के सत्कर्म करो। जितनी भी साधनाएं बताई गईं, सब आपको यहीं लाने के लिए हैं — या तो आप सीधा आ जाओ, या घूम-घूम के आओ, आना यहीं है। आप पक्का समझ लीजिए, इसके बिना आत्म-कल्याण हो ही नहीं सकता — ईमानदारी और सत्कर्म आपको अपनाना ही पड़ेगा; शुरुआत भी यहीं से, आखिरी भी यहीं से। या तो अभी समय है, कर लो; नहीं तो कई सालों के बाद या कई जन्म के बाद आओगे, आना आपको यहीं पड़ेगा। आपके पास समय है तो भटक लो, फिर आराम से आना; अगर समय नहीं है तो सीधा-सीधा आ जाओ। चाहे साधना करके आ जाओ, चाहे आराधना करके, चाहे भक्ति करके, चाहे नाम जप से, चाहे कुछ भी करो — आपको आना यहीं, ईमानदारी और सत्कर्म में ही पड़ेगा, और कोई रास्ता भी नहीं है। ये पहला और आखिरी रास्ता है। इसलिए समझ लो, समय बर्बाद मत करो — सीधे तरीके से आ जाओ।

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वीडियो: मोह और प्रेम गलत है या सही ? #yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान #प्रत्यक्षज्ञान #साधना · 2026-06-16