प्रश्नोत्तर P25-0032 · भाग 25
गुरु जी, अभी कुछ अनुभव तो है नहीं और आपने बोला कि ईमानदारी और सत्कर्म के रास्ते से चलो — तो उसमें प्रभु या परमात्मा को बीच में लाने की जरूरत है क्या?
नहीं, कोई जरूरत नहीं है। वो आना होगा तो आ जाएगा, हमें लाने की जरूरत नहीं है। लेकिन दुनिया में अगर खोजोगे कि इस समाज में, पूरे ब्रह्मांड में सबसे सही काम क्या है — तो ईमानदारी और सत्कर्म। क्यों ना हम इसी को अपना लें? सबसे श्रेष्ठ यही है, सब इसके नीचे हैं। यही मुझे परम सत्ता तक ले जा सकता है। बताओ, इस जगत में ईमानदारी से जीवन जीते हुए सत्कर्म करने से श्रेष्ठ कोई काम है? सब इसके नीचे हैं, तो क्यों ना फाइनली इसी को पकड़ लिया जाए। उसे बीच में लाने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि वो बीच में आता ही नहीं — वो तो फाइनली में मिलता है; बीच में लाओगे तो भी नहीं आएगा। तो आप ये करते रहो — आत्मदर्शन के लिए, अपने स्वयं के लिए, किसी और के लिए नहीं, निर्विकार होने के लिए। जब तक जीवन है, कुछ ना कुछ तो करना ही पड़ेगा, तो सत्कर्म में लग जाओ और ईमानदारी से जीवन जियो। आपसे आपका मिलना हो जाएगा, और आपसे आपका मिलना हो गया तो फिर उससे मिलना आप करा लोगे, क्योंकि आपके अंदर ही तो उसका पता है। एकदम सीधा-सीधा है।
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वीडियो: मोह और प्रेम गलत है या सही ? #yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान #प्रत्यक्षज्ञान #साधना · 2026-06-16