प्रश्नोत्तर P25-0038 · भाग 25
गुरु जी, कहावत है समुंदर से परे समुंदर — क्या वर्तमान समय में आपसे भी आगे कोई गुरु होगा?
एक बार चित्रकूट में मुझे एक व्यक्ति मिले और उन्होंने पूछा — क्या गुरु भी छोटा-बड़ा होता है? तो हमने कहा — कोई एक बच्चे की मां है, कोई कई बच्चों की; तो क्या कई बच्चों वाली मां बड़ी हो जाएगी और एक वाली छोटी? मां तो मां है। तो गुरु ना छोटा होता है ना बड़ा; आत्मज्ञानी ना छोटा होता है ना बड़ा। अपनी-अपनी स्थिति में आके लोग ज्ञान देते हैं। जैसे मान लीजिए आपको भारत घूमना है और आप 100 साल पीछे का नक्शा उठा लो, उससे घूमो — तो घूम पाओगे? ढूंढते रह जाओगे; कुछ चीजें मिलेंगी भी तो वहां तक जाने का रास्ता नहीं मिलेगा। इसलिए अभी का नक्शा चाहिए — इसलिए कहा गया है जीवंत गुरु चाहिए। हमेशा बदलाव हो रहा है; उस देश, काल, स्थिति, परिस्थिति में रहकर जैसी भाषा की जरूरत थी, वैसा बोला गया। आज किसी को लेटर भेजना हो तो एक सेकंड लगता है, पहले हफ्तों-महीनों लगते थे, तार देना पड़ता था। 100 साल पुराने आदमी से जानकारी लोगे तो लेटर कब जाएगा, और अभी वाले से लोगे तो कहेगा — क्लिक, बताओ कहां भेजना है। इसीलिए कहा गया वर्तमान में, जीवंत गुरु चाहिए — वो देश, काल, स्थिति, परिस्थिति में आपको ज्ञान देगा कि कैसे निकल जाओ, क्योंकि पूरा माहौल बदल गया है। आप 100 साल पीछे का नक्शा लेकर घूम रहे हो, और उस नक्शे वाले ने खुद कहा था कि जीवंत गुरु की शरण में जाना — लेकिन गलती यही हो रही है, पुराने शब्द ढो रहे हैं, जीवंत गुरु नहीं ढूंढते। जीवंत मतलब जो उसमें जी रहा हो, बस शब्दों का ज्ञान ना हो — तब वह आपको जीने का तरीका बताएगा, कैसे आपका आपसे मिलना हो जाए, क्योंकि वो उसमें जी रहा है। उसे खुद का ज्ञान हो, और उससे जो निकले उसे कहते हैं सत्संग। कथा तो किसी की जीवनी सुना दो; किसी के शब्दों को, श्लोक को उठा के देना प्रवचन है; सत्संग वह है जो अपने आत्म तक पहुंचा, आत्मज्ञान — उससे आत्मिक कल्याण होगा। ऐसे गुरु को खोजो। और कहा गया है, ऐसा मिलना बड़ा दुर्लभ है — मिल जाए तो सौभाग्य।
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वीडियो: मोह और प्रेम गलत है या सही ? #yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान #प्रत्यक्षज्ञान #साधना · 2026-06-16