प्रश्नोत्तर P25-0047 · भाग 25
गुरु जी, कर्म का सिद्धांत भी विस्तार से समझाने की कृपा करें।
जो हम करते हैं वही हमें मिलता है — सीधी-सीधी बात। कर्म का सिद्धांत है कि आप चाहे अच्छा करो, चाहे बुरा करो, चाहे सत्कर्म करो — कई गुना मिलता है। आप ये मत सोचना कि जितना किया उतना मिलेगा। एक बीज बोए तो कितना मिलता है? कई गुना मिलता है ना। तो सेवा बीज की तरह है — बीज या तो खाओ या तो लगाओ। लेकिन सत्कर्म फल की तरह है — खा भी लो, लगाओ भी, और कई सालों तक वो देता है। फल का पेड़ देखो, कई सालों तक देता है; बीज एक बार देता है और फिर बाद में देना बंद हो जाता है, लेकिन फल कई वर्षों तक, पुश्तों तक देता है। बीज या तो खाओगे या लगाओगे, दोनों तो नहीं कर सकते ना; और फल खा भी लोगे और उसका बीज बो भी दोगे। इसलिए जीवन में सत्कर्म करो — सत्कर्म फल की तरह है।
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वीडियो: मोह और प्रेम गलत है या सही ? #yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान #प्रत्यक्षज्ञान #साधना · 2026-06-16