प्रश्नोत्तर P25-0079 · भाग 25
गुरु जी, आत्मचिंतन करते हैं तो सब ठीक लगता है, लेकिन व्यवहार में राग-द्वेष हो जाता है।
व्यवहार में राग-द्वेष तब होता है जब आप योग्यता से ज्यादा पाने की इच्छा रखते हो। तो योग्यता से ज्यादा पाने की इच्छा का त्याग करो।
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वीडियो: 33 रात अपनों की कुटिया हरियाणा यमुना तट #योगी · 2026-10-27