आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P25-0096 · भाग 25

गुरु जी, समझ से मैं पैसे और बिजनेस से मुक्त हो गया — ना कोई अटैचमेंट है, ना कोई जरूरत। पर शारीरिक संबंधों में, काम वासना में या बच्चों के मोह में यह चीज सिर्फ समझ से पूरी नहीं हो रही। क्या करूं?

देखिए, यह शरीर भोग से आया है, योग से तो आया नहीं। इसे चाहिए भोग। और भोग आपके पास है भी — विवाहित जीवन। तो बस इसे ईमानदारी से दो। "कुछ नहीं चाहिए" — यह भाव रखो, और अपने तरीके से जो "चाहिए" है उसका त्याग करो। बस धीरे-धीरे आप निकलने लगोगे। पहले अपने लिए कर रहे थे, अब उनके लिए करना चालू कर दो — अपने आप छूटने लगोगे। चाहे वह शारीरिक संबंध हो, चाहे बच्चों के लिए कुछ करना हो। यह वैवाहिक जीवन है। अब आप छूटना चाहते हो, जरूरी नहीं कि पत्नी भी इससे छूटना चाहे। तो आपका कर्तव्य यह है कि बिना बताए — पहले अपने लिए कर रहे थे, अब उनके लिए करो। उन लोगों के लिए जीना चालू करो, फिर धीरे-धीरे देखो, आप मानसिक रूप से छूटते जाओगे। भाव में ईश्वर का वास है — भाव प्रबल करते जाओ कि बस अब मुझे तो कुछ नहीं चाहिए, लेकिन चलो, मैं इनके लिए कर रहा हूं। पहले मैं अपने लिए इनके साथ जीता था, अब इनके लिए इनके साथ जिऊंगा। इस भाव से जीना चालू करो, धीरे-धीरे आपको समझ में आने लगेगा।

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वीडियो: मोह और प्रेम गलत है या सही ? #yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान #प्रत्यक्षज्ञान #साधना · 2026-06-16