प्रश्नोत्तर P25-0095 · भाग 25
गुरु जी, मैं समझ से पैसे और बिजनेस से मुक्त हो गया हूं, अब उसमें मेरा कोई अटैचमेंट नहीं रहा। उससे जो भी पैसा आ रहा है, मुझे वह नहीं चाहिए। क्या फिर भी कोई भरपाई बाकी है?
अभी बाहर से मुक्त हो गए, लेकिन जितना किया है उसकी भरपाई कौन करेगा? काम-धाम में जो भी किया है, उसकी भरपाई कौन करेगा? आपका अटैचमेंट अब नहीं रहा, क्योंकि आपने सब बसा दिया, सबको व्यवस्थित कर दिया। लेकिन उस व्यवस्था करने में कितनों की व्यवस्था टूटी, बिगड़ी, क्या-क्या हुआ — उसका भुगतान कौन करेगा? फल तो आपने ले लिया ना। अब नहीं चाहिए, लेकिन उससे परिवार को तो बसा दिया, मेंटेन कर दिया। अब नया नहीं तैयार कर रहे हो, लेकिन पुराना हिसाब तो क्लियर करना पड़ेगा। जो उस कर्म में आपने अपनाया है, उसकी भरपाई तो करनी पड़ेगी। वह प्रकृति लेगी। कोई अपराध करता है तो जज के सामने जाता है; जज उसके साथ वैसा ही बर्ताव नहीं करता जैसा उसने किया था — पता नहीं कितने साल की सजा देगा। वैसे ही प्रकृति हिसाब-किताब लेगी। कोई नहीं बता सकता कि आपके साथ क्या होगा, किस तरीके से वह लेगी। भीष्म पितामह जब बाणों की शैया पे सोए थे, उन्होंने कृष्ण से पूछा कि मैंने पूरा जीवन ब्रह्मचर्य का पालन किया, कोई बुरा काम नहीं किया, यह किस कर्म का परिणाम है? 20 जन्म तक देखा, वहां कुछ नहीं मिला। तब 21वें जन्म में ले गए — वे राजकुमार थे, सर्प ने रास्ता काटा तो उन्होंने तीर मारा; वह बेर के पेड़ की कांटेदार डालियों पे गिरा और कांटे चुभ-चुभ के तड़प-तड़प के मरा। प्रकृति ने 21वें जन्म में हिसाब किया — कितने महीने उन्हें शैया पे रहना पड़ा, जबकि सर्प तो एक ही दिन में खत्म हो गया होगा। जब आप ज्ञान की तरफ बढ़ते हो, तब प्रकृति कहती है — अब हिसाब करो। रामकृष्ण परमहंस को ज्ञान होने के बाद भी, जब मोक्ष होने वाला था, कैंसर का भोग भोग के जाना पड़ा। प्रकृति कुछ छोड़ेगी नहीं। हिसाब-किताब बिना किए आप यहां से निकल नहीं सकते। जितने सालों तक धन कमाया, वह परिवार में, अपनों में लगाया। अब आगे नहीं कर रहे हो, लेकिन पिछला जैसे-जैसे किया है उसका भुगतान प्रकृति लेगी, तभी छोड़ेगी। उसके लिए पश्चाताप होगा, ग्लानि होगी। जैसे-जैसे इसमें आगे बढ़ना चाहोगे, सब कर्म आपको दिखेंगे — जो भूल गए थे, वो भी दिखने लगेंगे। आप कहते हो मेरा मन भटक रहा है — कहां जाता है? आपके कर्म ही तो दिखा रहा है।
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वीडियो: मोह और प्रेम गलत है या सही ? #yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान #प्रत्यक्षज्ञान #साधना · 2026-06-16