प्रश्नोत्तर P25-0099 · भाग 25
गुरु जी, बौद्धिक तौर पे तो यह चीज समझ में आ जाती है, लेकिन जहां सुख होता है वहां आदमी चाहता है कि जो आज सुख मिला है, वह कल भी मिले।
बौद्धिक स्तर पे समझ में आई; जब यह जीने लगोगे तो प्रैक्टिकल भी होने लगेगा। जब आप जियोगे, तब समझ में भी आने लगेगी। उसमें जीना चालू करो कि अब मुझे इन लोगों के लिए जीना है — अभी तक मैं अपने सुख के लिए इनके साथ रहा, अब मैं इनके सुख के लिए इनके साथ रहूंगा। इस भाव से रहना चालू करो, देखो जीवन बदल जाएगा, मानसिक रूप से आप छूटते चले जाओगे। लेकिन भाव बनाना पड़ेगा, भाव प्रबल होना चाहिए। रास्ते का पता मिल गया कि यहां से ऐसे जाओ — लेकिन जब जाएंगे तभी यात्रा होगी ना। तो जैसे मैंने बताया, आप बस उस भाव से करो, धीरे-धीरे छूटने लगोगे।
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वीडियो: मोह और प्रेम गलत है या सही ? #yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान #प्रत्यक्षज्ञान #साधना · 2026-06-16