आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P25-0120 · भाग 25

गुरु जी, आपने कहा कि इंद्रियों से जो रस ले रहे हैं, वो भटकाव छूट जाएगा तो जीव का नाश हो जाएगा। तो जीव के नाश का मतलब — क्या मैं मर जाऊंगी?

नहीं, मरने से मुक्त हो जाएगी। जन्म-मरण तभी तक है जब तक इच्छा है। जीव मतलब जिंदा इंसान नहीं — जीव मतलब बंधन में है। आत्मा ही इच्छा-अपेक्षा में जीव हो गई। जैसे कोई सामान्य व्यक्ति अपराध कर दे तो वो कैदी हो गया; जैसे ही कैदी जेल से बाहर आया, कैदी भी खत्म हो गया। जैसे पानी से बर्फ बना फ्रिज में जाने के बाद — आत्मा जब इस शरीर में आई तो आनंद में थी, फिर समाज में आई, लालच में, इच्छा-अपेक्षा में, वो जीवात्मा हो गई, जैसे पानी बर्फ बन गया। अब उसे मूल में लाना है, तो फ्रिज का कनेक्शन काट दो, बर्फ धीरे-धीरे पिघल जाएगा। बर्फ का क्या हुआ? नाश हुआ। बर्फ कहां गया, पता नहीं; मूल पानी में आ गया। वैसे ही जब इच्छा-अपेक्षा छूटी, जीव कहां गया पता नहीं — वो अपने मूल में आ जाएगा। रूप का नाश हुआ है, तत्व का नहीं। वो एक बदला हुआ रूप था, किसी कारण से था; जब वो कारण हटा तो उस रूप का नाश हो गया। इसीलिए कहा गया जगत मिथ्या है, क्योंकि जगत को हम रूप में देख रहे हैं।

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वीडियो: अंतर्मुखी कैसे हो ?अंतर्मुखी होने का रहस्य । #yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान · 2026-05-27