आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P25-0126 · भाग 25

गुरु जी, बार-बार प्रेजेंट मोमेंट से वृत्तियों में चला जाता हूं — क्या करूं?

कोई बात नहीं। वृत्तियों में कभी जिए हो, तभी तो जा रहे हो; ऐसे तो जाओगे नहीं। हमें वही लोग याद आते हैं, वही पता याद आता है, जिस पे मैं कभी जिया हूं। आने दो, लेकिन आगे ऐसे कुछ काम मत करो जिससे आपको पश्चाताप हो, घुटन हो, बेचैनी हो। पिछली तो सताएंगी — सताने दो, कोई बात नहीं। उसके लिए पश्चाताप करो, आंसू बहाओ, क्षमा मांगो; एकांत में बैठोगे तो घुटन होगी, बेचैनी होगी, आंसू आएंगे — आने दो। लेकिन आगे ऐसा ना करना, पिछला खत्म हो जाएगा। ये प्रकृति का नियम है कि आप बस छोड़ दो, देखते रहो, उसका नाश हो जाएगा। कितनी काई लगी है, कितना मैल तगड़ा है — कोई मैल तुरंत पानी में डालते ही छूट जाता है, कोई मैल तो कपड़े को भी फाड़ देता है; हल्का होता है, लेकिन छूटता है। तो देख, कैसा मैल तूने अपने अंदर चढ़ाया है। लगाते वक्त तो नहीं सोचा कि किसको क्या बोल रहे हैं, किसके साथ क्या कर रहे हैं; जब उसका परिणाम आएगा तब पता चलेगा। और याद रखना, अगर पता नहीं है तो दोष नहीं लगेगा, तू फंसेगा नहीं; पता होने के बाद जब मैं वो कार्य करता हूं, उसी का अफसोस है। तो पिछले वाले के लिए पश्चाताप कर, आगे कुछ ऐसा ना करना, और आगे सत्कर्म कर — जरूरतमंद की सेवा।

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