प्रश्नोत्तर P25-0134 · भाग 25
गुरुदेव, अंदर की यात्रा का एक प्रश्न है — आत्मज्ञान के बाद क्या ब्रह्म को जाना जा सकता है?
ब्रह्म खुद चाहे तो आपको जना सकता है, आप उसे नहीं जान सकते। ब्रह्म की बात छोड़ो, मैं इंसान की बात कर रहा हूं — इस देश में एक प्राइम मिनिस्टर से मिलना हो तो आपका कर्तव्य क्या है? एक एप्लीकेशन देना। वो जब चाहे आपसे मिल सकता है, जहां से चाहे आपको बुलवा सकता है, आपका परिवार नहीं रोक सकता; लेकिन आप उससे नहीं मिल सकते। आप एप्लीकेशन दोगे तो वो देखेगा कि क्यों मिलना चाहते हो, मिलने लायक हो कि नहीं, समाज में ऐसा कुछ काम किया कि लाखों-करोड़ों का कल्याण हुआ। एक इंसान का यह हाल है, तो परमात्मा चाहे जिसको भी अपने आपको जना सकता है कि देखो ये मैं हूं; आप उसे नहीं जान सकते। योग्यता आपको लानी पड़ेगी — वो देगा तो सबको देता ना। जो भी व्यक्ति उस योग्य होता है, वो उसे जना देता है। हम केवल योग्य हो सकते हैं, अपनी योग्यता बना सकते हैं। योग्य हो जाओगे तो एक समय ऐसा आएगा कि आप उसे देखोगे और वो आपको देखेगा; तुम कहोगे मैंने देख लिया — नहीं, उसने दिखा दिया, तुम्हारी देखने की ताकत नहीं थी। सोचिए, एक प्राइम मिनिस्टर से ऐसे मिलने के लिए कि वो पूछे "आप वही व्यक्ति हो?" — आपको कितने साल लग रहे हैं, और वो भी पक्का नहीं; पहले भी हो सकता है, बाद में भी, और ना भी हो। एक देश का एक प्रधानमंत्री, विश्व में कितने देश, फिर अनंत ब्रह्मांड — और उन अनंत ब्रह्मांडों के मालिक से मिलने की यात्रा कर रहे हो, शाम को आए और सुबह कह रहे हो कुछ हुआ नहीं! केवल उतावलेपन से कुछ नहीं होगा, कुछ करना पड़ेगा।
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