प्रश्नोत्तर P25-0136 · भाग 25
गुरु जी, ईश्वर तो एक है ना, फिर लोगों ने धर्म के नाम पर उनका विभाजन क्यों कर दिया?
लोग धर्म के नाम पर कुछ भी कर देंगे; आपको क्या करना है, वो देखो। लोगों ने तो बहुत कुछ कहा — क्या सब मानते हो? यहां दो तरह के लोग बात करने वाले हैं: एक कहते हैं ईश्वर एक है, एक कहते हैं अनेक हैं। तो आप किसकी बात मानोगे? जो खोजी रहता है, वह ना कहता है एक है ना दो है; वो कहता है मैं अपना काम करूंगा और निकल लूंगा — ईश्वर होगा तो मिल लेगा; दो होंगे तो भी देख लेंगे, एक होगा तो भी देख लेंगे। जिस भाव से आप यात्रा कर रहे हो वही है। अभी यहां जितने लोग आए हैं, यहां से निकलेंगे तो सब अलग-अलग रास्तों से जाएंगे, लेकिन पहुंचेंगे अपने-अपने घर। अब यह कहे तुम मेरे पते पर चले जाओ — तो इनको इनके ही पते पे खड़ा किया जाएगा; कोई कहे "सब एक ही तो है", तो क्या दूसरे के पते पे एंट्री मिलेगी? नहीं मिलेगी। तो तू अपनी खोज कर ले। बच्चों को संस्कार सिखाइए, कर्म सिखाइए, ईमानदारी सिखाइए, सत्कर्म सिखाइए, बोलने का तरीका, उठने-बैठने का तरीका, मर्यादा में जीना सिखाइए, उनसे प्रत्यक्ष करवाइए — संस्कारी बनाइए, यह जरूरी है।
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वीडियो: साधना में आसन की शुद्धता का क्या महत्व है ? #yogijikasatsang #प्रत्यक्षज्ञान #साधना #आध्यात्म · 2026-09-08