आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P25-0137 · भाग 25

गुरु जी, अन्नमय से आनंदमय कोश — ये पांच कोश हैं ना, थोड़ा इनके बारे में बता दीजिए।

हमने इनका अध्ययन ही नहीं किया, तो क्या बताएं — मैं उस सब में गया ही नहीं, जिससे मेरा कोई मतलब ही नहीं था; मुझे तो सीधा-सीधा निकलना था। मैंने देखा कि सात चक्र हैं, तो सोचा मेन कौन है — बस इसको खोल लो, बाकी अपने आप खुल जाएंगे। इतना समय नहीं था कि एक-एक को खोलें। एक राज्य पर कब्जा करना है तो राजा को पकड़ लो, कौन सैनिकों को ढूंढे — सैनिक बड़े हैवी होते हैं, जल्दी बस में आएंगे नहीं। तो मैं सहस्रार के पीछे पड़ा। फालतू एक-एक चक्र खोलो, ये करो, वो करो, ये योगा करो — हमसे ये सब नहीं होगा। ये कैसे खुलेगा? तब पता चला कि बस आप इच्छा-अपेक्षा से मुक्त हो जाओ, उम्मीद छोड़ दो, खुल जाएगा। जब सब ज्ञान आत्मा में है, आत्मा से ज्ञान है, तो इसको खोलकर आत्मज्ञान करा लो, सब ज्ञान बाहर आएगा; जब सब ज्ञान अंदर है तो हम काहे को बाहर घूमें, भटकें। समय किसी के पास नहीं है। हार्ट कैसे काम करता है, किडनी कैसे काम करती है — आप जानो ना जानो, काम तो करेगा; मैं हार्ट सर्जन बनने वाला नहीं हूं, जिस दिन जरूरत पड़ी उस दिन चले जाना। जितने में मेरा काम चल जाए उतना जानो और निकल लो — सदुपयोग करो, जरूरत में जियो, निकल लो। हर विषय में एक्सपर्ट होना जरूरी नहीं। ₹200 की टोपी सिर पर पहनी है, तो उसे बनाना सीखने जाओगे या पैसे देकर ले आओगे? बेमतलब की बातों में उलझकर समय खराब नहीं करना चाहिए।

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वीडियो: साधना में आसन की शुद्धता का क्या महत्व है ? #yogijikasatsang #प्रत्यक्षज्ञान #साधना #आध्यात्म · 2026-09-08