आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P25-0147 · भाग 25

गुरु जी, पहले के लोग बहुत सच्चे होते थे। आज झूठ और गलत में कहीं ना कहीं समाज भी तो हिस्सेदारी निभा रहा है?

समाज कौन है? हमसे समाज है कि समाज से हम हैं? एक-एक मिलके समाज बना है — हमसे समाज है, फिर जैसे हम रहेंगे वैसा हमें समाज मिलेगा। तीन प्रवृत्तियां हैं — देव प्रवृत्ति, मानव प्रवृत्ति, राक्षस प्रवृत्ति। जैसा आप कर्म करोगे वैसे लोग आपको मिलने लगेंगे, उसी टाइप के लोग इकट्ठा हो जाएंगे। भीड़ तीन जगह है — सात्विक, राजसी, तामसी; सबसे ज्यादा भीड़ इस समय तामसी में है, उसके बाद राजसी में, और सबसे कम सात्विक में। गहराई में दूसरा है ही नहीं — सिर्फ हम जिम्मेदार हैं। हम शैतान हैं तो हमें शैतान मिलेंगे, देवता हैं तो देवता मिलेंगे, मानव हैं तो मानव मिलेंगे। और इसको काटने के लिए एक ही चीज — तुरंत ईमानदारी और सत्कर्म। ईमानदारी से आगे का बंधन नहीं बचेगा, और सत्कर्म से भोगने की क्षमता मिल जाएगी — जैसे हाथ की चीर-फाड़ से पहले सुन्न करने का इंजेक्शन लगा देते हैं तो दर्द नहीं होता; सत्कर्म अपना लिया तो आप भोगोगे, लेकिन भोगने में तकलीफ नहीं होगी।

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वीडियो: समय बीत जाने के बाद समझ क्यों आती है ?#yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान #प्रत्यक्षज्ञान · 2026-06-15