आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P25-0148 · भाग 25

गुरु जी, ऐसा देखा गया है कि जिन्होंने बहुत ज्यादा पाप किया, उन्होंने छोड़ा भी तो तुरंत और पूरी तरह छोड़ा — जैसे अंगुलिमाल?

अंगुलिमाल जब भिक्षु बनकर गया तो गांव वालों ने उसे पत्थर मारे — सिर फूट गया, कई जगह चोट लगी, खून निकल रहा था। जिस अंगुलिमाल के नाम से लोग डरते थे, उस रास्ते से कोई जाता नहीं था, उसी को लोगों ने पत्थर मारकर अपना आक्रोश निकाला, लेकिन वो किसी से कुछ नहीं बोला — जब छोड़ा तो पूरी तरह छोड़ा। मेन यही है कि छोड़ना है तो पूरा ही छोड़ना, परसेंटेज में नहीं। एक नाव में एक छेद है, एक में 99 — परिणाम दोनों का एक ही आएगा। तुम हंस रहे हो कि मेरे में एक ही बचा है और तुम में 99 हैं; नहीं, गलती कर रहे हो — समाज में तुलना में तुम्हें लग रहा है कि मैं आगे हूं, लेकिन दोनों एक ही जगह जाओगे। जिसमें एक छेद है वो धीरे-धीरे डूबेगा, जिसमें 100 हैं वो तुरंत डूब जाएगा। मैं तो यही कहूंगा — भैया, पूरी तरह अपना लो; अभी भी समझ है, समय है। ईमानदारी-सत्कर्म सबसे आसान है जिंदगी में — तुम भी खुश, समाज भी खुश। बेईमानी-दुष्कर्म से तुम भी दुखी, परिवार भी दुखी, समाज भी दुखी, और पकड़े जाने का हमेशा डर — कब पोल ना खुल जाए।

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वीडियो: समय बीत जाने के बाद समझ क्यों आती है ?#yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान #प्रत्यक्षज्ञान · 2026-06-15