आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P25-0153 · भाग 25

गुरु जी, शरीर की पीड़ा सहते हुए "कुछ नहीं चाहिए" कैसे हो? वो तो पहले से पीड़ा में है, तो मन शांत होगा नहीं।

पीड़ा किसमें है, ये देखिए — शरीर में पीड़ा है। आपसे कहा जाता है कहां चोट लगी, तो कहते हो ना "मेरे पैर में"? तो पैर किसका है? तुम्हारा — तो तुम उससे अलग हुए ना? तुम कहोगे ये तो बात की बात है — अरे, बातों में ही तो ज्ञान छिपा हुआ है। अब मैं आपको बीज दे दूं और बोलूं इसमें पेड़ है, तो तुम कहोगे तुरंत काट के दिखाओ कहां पेड़ है — कैसे? मैं प्रोसेस बता रहा हूं कि इसे कैसे लगाना है। उम्मीद छोड़ दो, बस। पीड़ा भोग के उम्मीद छोड़ देना — उसके लिए धैर्य बनाना पड़ेगा। जब तक पीड़ा हो रही है होने दो; जब पीड़ा खत्म होगी तब देखेंगे — इंतजार करते रहो, कभी ना कभी पीड़ा कम होगी।

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वीडियो: समय बीत जाने के बाद समझ क्यों आती है ?#yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान #प्रत्यक्षज्ञान · 2026-06-15