प्रश्नोत्तर P25-0194 · भाग 25
लेनदेन में राग-द्वेष से कैसे बचें?
कोई भी लेनदेन कर रहे हो, तो उसमें ईमानदार रहो — बस बात खत्म। जहां भी आपको कर्म करने का मौका मिला, आप लेनदेन कर रहे हो — चाहे शब्दों का लेनदेन हो, चाहे पैसों का लेनदेन हो, चाहे व्यवस्थाओं का लेनदेन हो — बस उसमें ईमानदार रहो।
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