आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P26-0017 · भाग 26

गुरुदेव, मैं अपनी सामर्थ्य से इस मार्ग पर हूं, परंतु फिर भी यदि मैं निकल लिया (शरीर छूट गया) और आत्मज्ञान नहीं हुआ, तो क्या होगा?

हां, जैसे आप सफर पर निकल गए, तो रात को जहां आपने विश्राम किया, सुबह वहीं से यात्रा की शुरुआत होगी। जब भी आप चलोगे, तो यात्रा की शुरुआत वहीं से होगी। तो अब देखना है कि जैसी मति वैसी गति। अगर आखिरी में आप वापस जाते हुए शरीर छूटा है — ऐसा तो नहीं कि लक्ष्य से आप भाग गए, तब शरीर छूटा है — तब तो बहुत दुविधा में आपका जन्म होगा। और अगर आपने लक्ष्य की तरफ ही मुंह करके शरीर को छोड़ा है, लक्ष्य को पाने में ही शरीर छोड़ा है, तो आपका जन्म होगा और जब आप समझने लायक होंगे, तो वहीं से यात्रा की शुरुआत हो जाएगी।

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