प्रश्नोत्तर P26-0037 · भाग 26
गुरु जी, ओशो, कबीर जी, रामकृष्ण परमहंस, जे. कृष्णमूर्ति, रमण महर्षि, स्वामी विवेकानंद जैसे महापुरुषों के बारे में आप क्या कहेंगे?
जितने लोग भी समाज के लिए काम किए हैं, चाहे वो कोई भी हो — चाहे ओसो हो, चाहे कबीर जी हो, चाहे रामकृष्ण परमहंस हो, जे. कृष्णमूर्ति हो, रमण महर्षि हो, स्वामी विवेकानंद हो — सबको मैं तहे दिल से प्रणाम करता हूं। जब मैं व्यक्तिगत उनसे नहीं मिला हूं तो मैं उनके बारे में क्या बोल सकता हूं? जितना आपको उनके बारे में पता है, उतना मुझे पता है। लेकिन मैंने उनका कर्म देखा। 2020 के पहले मुझसे जहां तक हो सकता था — किताबों से लेकर वीडियो सुनना — मैंने किया। 2020 के बाद जब मुझे हुआ तो मुझे फिर उसकी जरूरत नहीं पड़ी। लेकिन उसके पहले आधार तो इतिहास ही है ना। आज अगर हम चल रहे हैं तो इतिहास को लेकर ही तो आगे बढ़ रहे हैं। अगर महापुरुषों ने काम किया है तो उसी इतिहास को लेकर मैं आगे बढ़ रहा हूं। एक विद्यार्थी को शिक्षक पढ़ा रहा है, तभी तो वह पढ़कर किसी और को पढ़ा रहा है; अगर पढ़ाने वाला उसको नहीं मिलता तो वह किसी चौराहे पर अनपढ़ की तरह बैठा रहता। तो आज अगर मैं इस स्थिति में हूं, आपको ज्ञान दे पा रहा हूं, तो इतिहास ही मेरा सहायक है। इसलिए इतिहास को मैं प्रणाम करता हूं।
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