आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P26-0072 · भाग 26

गुरु जी, कई बार हम एक तरफा डिसीजन लेकर आगे बढ़ जाते हैं, फिर सफलता नहीं मिलती तो विचार आता है कि वह राह पकड़ी होती तो ज्यादा अच्छा रहता। क्या यह अपने प्रारब्ध के हिसाब से होता है?

आपकी समझ आपको लेकर जाती है। आपका प्रारब्ध तो आपके कर्म से बनता है; आपकी समझ आपको लेकर जाती है। यहां सबको उसके कर्म का परिणाम मिल रहा है। (कई बार हम अति उत्साह में, आवेश-जज्बात में गलत डिसीजन लेते हैं —) आवेश-जज्बात में नहीं आना चाहिए।

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वीडियो: अपनों की कुटिया में रहने के नियम साधक के लिए सबसे जरूरी बात क्या है ? / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-12-31