आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P26-0175 · भाग 26

गुरु जी, क्या शरीर में होना ही बंधन है? और कर्म का भोग क्या आत्मा भोगती है?

नहीं — किसी और में, इच्छा-अपेक्षा में लिप्त रहना बंधन है। (कर्म का भोग —) जीवात्मा भोगती है।

सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें

वीडियो: सत्संग में बैठते समय अपने शरीर को कैसे नियंत्रित करें ?#yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान · 2026-06-14