प्रश्नोत्तर P26-0186 · भाग 26
गुरु जी, सिद्ध पुरुष, साधु-संत दो घंटा सोते हैं और 18-20 घंटे काम कर लेते हैं — दो घंटे में वो इतनी ऊर्जा कैसे पा लेते हैं जो आम इंसान 10 घंटे में भी नहीं पाता?
आप अपने लिए जी रहे हो, वो लोगों के लिए जीते हैं। जब आप अपने लिए जीते हो तो आपकी ऊर्जा का एक दायरा है; और जब आप समाज के लिए जीते हो, तो आपको खूब ऊर्जा मिलती है। जैसे संविधान में जो कुर्सी पर है, वो कहीं भी जाए, उसके साथ पूरी व्यवस्था रहेगी; साधारण आदमी को वो व्यवस्था नहीं मिलेगी। वैसे ही जो व्यक्ति समाज के लिए जीने लगा, उसका दायरा छूट गया — उसको खूब ऊर्जा आती है। आप अभी दायरे में हो, इसलिए आपको खूब सोना पड़ता है। समाज के लिए जब करते हो तो जितने लोगों का आपके द्वारा कल्याण होगा, उतना आशीर्वाद भी मिलेगा, आपकी ऊर्जा बढ़ेगी; और श्राप मिलेगा तो ऊर्जा घटेगी, धीरे-धीरे दरिद्र हो जाओगे।
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वीडियो: विचार कहां से आते हैं क्या हम विचारों को कंट्रोल कर सकते हैं #योगीजी_का_सत्संग #विचार #कंट्रोल · 2024-09-05