सत्संग PV03-0028 · भाग 3
सीखने वाला हूं या सिखाने वाला? — सत्संग से समझ और परिक्रमा का सही उद्देश्य
27 अक्टूबर 2026 · अगर मैं सीखने वाला हूं तो मुझे सबकी सुननी है | योगी गुरु जी का सत्संग
चैनल: आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान मार्ग
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मुख्य बातें
- अगर मैं सीखने वाला हूं तो मुझे सबकी सुननी है और अपनी समझ से समझना है; सिखाने वाला हूं तो किसी की नहीं सुननी, क्योंकि सुनूंगा तो फंस जाऊंगा।
- सीखना जीवन है; हमें सीखकर उस परमानंद तक पहुंचना है।
- सत्संग से ही समझ विकसित होती है और वैराग्य जगता है; सत्संग नहीं मिलेगा तो किताबें पढ़ने से कुछ नहीं होने वाला।
- समझाने वाला, टोकने वाला अपने आप मिलेगा — उसे स्वीकार करूं या अस्वीकार, ये मेरे ऊपर है।
- परिक्रमा 'मेरा' से मुक्त होने की, स्व की यात्रा है — आत्मिक चिंतन करो, मोबाइल बंद रखो, अपने साथ रहो।
- आदत नहीं सुधरी, आचरण नहीं बदला, विकार का नाश नहीं हुआ, तो बस घूमना है — जिस उद्देश्य से चले हैं, उस पर काम करना पड़ेगा।
सीखने वाला या सिखाने वाला
अगर पढ़ने लायक हो तो कोई पढ़ाने वाला तो चाहिए। एक पढ़ने वाला, तो एक पढ़ाने वाला। ये विद्यालय प्रकृति का विद्यालय है। अब मुझे सीखना है या सिखाना — ये पक्का करना पड़ेगा कि मैं सीखने वाला हूं या सिखाने वाला।
अगर मैं सीखने वाला हूं तो मुझे सबकी सुननी है, और मुझे अपनी समझ से समझना है और आगे काम करना है। और अगर मैं सिखाने वाला हूं तो मुझे फिर किसी की नहीं सुननी है, क्योंकि मैं सुनूंगा तो फंस जाऊंगा। तो आप देखो — सिखाने वाले हो या सीखने वाले हो। सीखने वाले हो ना, तो बस सीखने की बात करो।
आपको अनेक लोग सिखाने वाले मिल जाएंगे। सीखना जीवन है। हमें सीखकर उस परमानंद तक पहुंचना है।
सत्संग जीवन में अमृत है
सत्संग से ही समझ विकसित होती है, वैराग्य जगता है, फिर वैराग्य से मुक्त होने के लिए हम काम करते हैं। तो सत्संग तो जीवन में अमृत है। अगर सत्संग नहीं मिलेगा ना, तो किताबें पढ़ने से कुछ नहीं होने वाला है।
कोई न कोई आपको मिल ही जाएगा — समझाने वाला, टोकने वाला, बताने वाला। अपने आप मिलेगा। अब देखना है कि मैं उसे स्वीकार करता हूं कि अस्वीकार — ये मेरे ऊपर है।
परिक्रमा में आत्मिक चिंतन
अपनी समझ को विकसित करो, और जिसके लिए परिक्रमा कर रहे हो वो करो — अपने को सुधारो। ना कोई नशा करना है; बस आत्मिक चिंतन करते रहना है। और मोबाइल भी, अगर हो सके तो बंद ही कर दो। घर वालों को बोल दो कि मैं जब तक परिक्रमा करूंगा, बात मत करो। तभी आत्मिक चिंतन होगा, और तभी आपको पता चलेगा कि कितना मोह, आसक्ति, बंधन है। नहीं तो घर वालों से बात करोगे तो आपको पता ही नहीं चलेगा कि बंधन कितना है।
परिक्रमा का मतलब है — दो वस्त्र, जमीन पे आसन लगा के सोना, मांगना कुछ नहीं है, पैसा छूना नहीं है। आपको भोजन मिल जाएगा, रहने की जगह मिल जाएगी। और किसी से व्यवहारिक एक शब्द बात नहीं करना है।
ये 'मेरा' से मुक्त होने के लिए यात्रा है। ये स्व की यात्रा है, 'मेरा' की यात्रा नहीं है। आपके साथ कोई हो जाए, चलेगा, लेकिन आपको अपने साथ रहना है और किसी के साथ होना नहीं है। तब जाके आपको कुछ समझ में आएगा, तब परिक्रमा का मतलब होगा।
तप का मतलब
मैंने देखा, मैंने यही समझा कि लोग बस ज्यादा से ज्यादा घूमने के लिए एक तरह का मनोरंजन कर रहे हैं।
तप का मतलब क्या है? ताप क्या करता है? जला के राख करता है। अगर आपकी आदत नहीं सुधरी, अगर आपका आचरण नहीं बदला, आपके विकार का नाश नहीं हुआ, तो फिर बस घूमो।
तो यही हमें समझना है कि जिस उद्देश्य को हम ले चले हैं, उस उद्देश्य पर हमें काम करना पड़ेगा।