सत्संग PV03-0030 · भाग 3
अपनी क्षमता अनुसार ही आगे बढ़ते हैं — गुरु कमी देखकर भी चुप क्यों रहता है
17 अक्टूबर 2026 · जो कहता हूं वह बस करता रह #योगी
चैनल: आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान सत्संग
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मुख्य बातें
- आपकी स्थिति अनुसार ही आपकी कोई मदद कर सकता है; अपनी क्षमता अनुसार ही आगे बढ़ सकते हैं।
- क्षमता होगी तो सीधा दूसरी से 12वीं भी पढ़ा देगा; क्षमता नहीं है तो वो कुछ नहीं कर सकता।
- काम के पीछे मान चाह लिया तो उसका मूल्य ही ले लिया — मान तो ले लिया।
- गुरु कभी-कभी कमी देखकर भी चुप रहता है, क्योंकि बता दे तो भाग जाए; कम से कम सही जगह रुका है तो क्षमता बढ़ ही रही है।
- क्षमता सत्कर्म और सेवा से बढ़ती है।
- परिणाम मेरे हाथ में नहीं; मेरे हाथ में बस इतना है कि कर्म ईमानदारी से करता हूं कि बेईमानी से।
क्षमता अनुसार ही मदद
कोई शिक्षक हो, ऑलराउंडर हो, एक से लेके ग्रेजुएट तक पढ़ाता हो; उसके पास दो बच्चे आ जाएं — एक दूसरी क्लास का, एक 12वीं क्लास का। तो दूसरी क्लास वाले को तीसरी के लिए मदद कर सकता है। दूसरी वाला चाहे कि मुझे सीधा 13वीं का मदद करो, तो वो करे तो फेल हो जाएगा ना। और 12वीं वाले को 13वीं का मदद कर सकता है।
तो यह ऐसा है ना कि आपकी स्थिति अनुसार ही आपकी कोई हेल्प कर सकता है। उसकी क्षमता भी है, लेकिन वो क्या करे? आपकी क्षमता नहीं है। तो ये पूरा सामने वाले के ऊपर होता है — अपनी क्षमता अनुसार ही वह आगे बढ़ सकता है।
स्कूल में बहुत बच्चे पढ़ते हैं, लेकिन एक बच्चा इतना तेज होता है कि उसको चौथी क्लास से सीधा सातवीं में डाल देते हैं — आपकी योग्यता के अनुसार ही। तो अगर आपकी क्षमता होगी ना, तो वो सीधा दूसरी से 12वीं भी आपको पढ़ा देगा। लेकिन अगर क्षमता नहीं है, वो कुछ नहीं कर सकता।
काम के पीछे मान की इच्छा
उसका मूल्य ही ले लिया ना। वही मिल जाएगा। मान ही चाह लिया, तो मान तो ले लिया।
गुरु कमी देखकर भी चुप क्यों रहता है
उसके सानिध्य में आप हो, तो कभी-कभी गुरु देखता है आप में कमी, लेकिन बता नहीं पाता। क्यों नहीं बता पाता? क्योंकि अभी तो आप रुके हो; हो सकता है वो कमी बताए तो भाग जाओ। तो देखता है कि ये लक्षण है, तो बताता भी नहीं — वो समय का इंतजार करता है। कम से कम रुका तो है; रुका है, इसका मतलब कुछ सीख रहा है।
तो गुरु कभी-कभी आपकी कमी देखता है, लेकिन मजबूर है, बता नहीं सकता, क्योंकि सब चला जाएगा फिर। कम से कम सही जगह तो रुका है; कभी ना कभी इसकी क्षमता हो जाएगी। लेकिन ये भाग गया तो इसका पतन हो जाएगा। तो गुरु सब देखते हुए भी चुप रहता है, क्योंकि यहां से चला गया तो सब कुछ खो देगा। कम से कम यहां है, तो इसकी क्षमता बढ़ ही तो रही है।
सुनने की क्षमता और सत्कर्म
अगर उसकी सुनने की क्षमता है और अपने आप को पूरा सुधार करेगा, तब तो बता ही देगा। गुरु 100 में 101% देखता है कि ये नहीं सुन पाएगा, और सुन लेगा तो फिर चला जाएगा, क्योंकि इसको ये कमी लग ही नहीं रही है।
क्षमता बढ़ती इसलिए है कि उसके द्वारा सत्कर्म होता रहता है; कहीं ना कहीं गुरु उससे सेवा करवाता रहता है। तो उसकी क्षमता उससे बढ़ती है।
भाव शुद्ध हो, परिणाम कुछ भी आए
गुरु के एक-एक शब्द में, एक-एक वाक्य में जीना। कि मैं दिल खोल के, आंख मिला के कह पाऊं कि आपने जैसा बोला, वैसा ही मैंने जिया; कि मेरा भाव शुद्ध था, भले उसका परिणाम कुछ भी आए।
क्योंकि काम तो बहुत लोगों के थ्रू होके जाएगा ना। मुझे परिणाम से मतलब नहीं; मैंने किस भाव से कर्म किया, वह मायने रखता है। परिणाम मेरे हाथ में नहीं है। मेरे हाथ में बस इतना है कि मैं कर्म को ईमानदारी से करता हूं कि बेईमानी से करता हूं।