प्रश्नोत्तर P25-0062 · भाग 25
गुरु जी, एक तरफ आप कहते हैं कि कर्मों का बंधन है, जो किया उसे भोगना पड़ेगा; दूसरी तरफ कहते हैं कि उम्मीद से मुक्त हो जाओ तो अभी मुक्त हो सकते हो। तो वह बंधन कहां जाएगा? ये दोनों बातें विरोधी नहीं हैं?
इसीलिए तो मैं कहता हूं कि मुक्ति तुरंत पाओगे, मोक्ष बाद में। आप मुक्त तुरंत हो सकते हो — आगे का बंधन बंधेगा नहीं, यह है मुक्ति। और सत्कर्म करके पिछले का नाश करो — यह मोक्ष। धीरे-धीरे अपनी स्थिति में आ जाओगे। मोक्ष तब होगा जब पूरी तरह अपना भोग खत्म हो जाएगा; मोक्ष के पहले ही आपको ज्ञान हो जाएगा — जैसे रामकृष्ण परमहंस ज्ञान के बाद कैंसर का भोग भोगे। ईमानदारी मुक्ति है, और फिर आप सत्कर्म करो। जितना आपका कर्म का बंधन है, वह सत्कर्म के द्वारा निकलेगा, और एक समय ऐसा आएगा कि अपनी स्थिति को उपलब्ध हो जाओगे। यही रास्ता है।
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वीडियो: मोह और प्रेम गलत है या सही ? #yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान #प्रत्यक्षज्ञान #साधना · 2026-06-16