प्रश्नोत्तर P25-0094 · भाग 25
गुरु जी, सेवा और साधना से क्या धुलेगा?
आपका किया गया पिछला बुरा कर्म। निर्विकार होंगे — विकारों से मुक्ति पाने में सहायता मिलती है। आत्मचिंतन का मतलब यह नहीं कि कुछ नहीं करना, सिर्फ बैठे रहना, जो विचार आ रहे हैं उनको देखते रहना — ऐसा नहीं है। आत्मिक चिंतन का मतलब है — आपने अपना भाव बनाया कि मुझे निर्विकार होना है; मुझे राग, द्वेष, मोह, आसक्ति, इच्छा, अपेक्षा, मेरा और कर्ता के भाव से मुक्त होना है। और आप उसके लिए बैठ गए हो कि मैं कैसे मुक्त हो जाऊं। जब इस भाव को लेकर बैठोगे तो बाकी काम अपने आप होने लगेंगे।
सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें
वीडियो: 34 सुबह अपनों की कुटिया हरियाणा यमुना तट #योगी · 2026-10-27