प्रश्नोत्तर P25-0115 · भाग 25
गुरु जी, इस पर थोड़ा बताइए — ये मन कैसे काम करता है? बाहर से जब मन को नहीं मिलता, तब क्या होता है?
जैसे भूख लगी, तो भोजन कहां है — आपको अंदर पता है ना, होटल का पता, घर का पता, कहां-कहां भोजन है, वो सब बताएगा। कभी-कभी कहते हो मुझे याद नहीं आ रहा, लेकिन याद करने का प्रयास करते हो तो याद आ जाता है, क्योंकि वो फाइल खुल नहीं रही थी। जैसे मोबाइल-कंप्यूटर में कोई फाइल नहीं खुलती तो अंदर का पता नहीं चल पाता। आपके अंदर सब फाइलें हैं, अलग-अलग आपने बनाई हैं; जब फाइल खुल गई, बात याद आ गई। तो सब हमारे अंदर स्टोर है। जैसे आपको कोई दृश्य देखना हो, इच्छा जग गई, और बाहर नहीं दिख रहा है, तो जितना आपने दृश्य देखा है वो सब आने लगेगा — क्योंकि बहिर्मुखी उसे मिल नहीं रहा है। पहले बाहर ढूंढता है, नहीं है पॉसिबल तो अंतर्मुखी ढूंढते हो। मन निमित्त है। मोबाइल-कंप्यूटर में एरो को कौन ले जाता है? आप ले जाते हो। एरो का कोई जगह नहीं — कहां से आता है, कहां जाता है पता नहीं। एरो से सब खोल सकते हो, लेकिन एरो को नहीं खोल सकते। और एरो किसके लिए काम करता है? उसी मोबाइल-कंप्यूटर के लिए; उसमें जितना है वही खोलेगा, बगल वाले का नहीं खोल सकता। तो आपका मन आपके लिए काम करता है, शरीर के लिए।
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वीडियो: अंतर्मुखी कैसे हो ?अंतर्मुखी होने का रहस्य । #yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान · 2026-05-27