प्रश्नोत्तर P25-0116 · भाग 25
गुरु जी, जो चीजें मेरी इंद्रियों ने देखीं, चखीं, सुनीं, वो मेरे अंदर संग्रहित हो गईं, और वो जरूरत में काम करती हैं। तो जो मन है, क्या वही हमारे विचारों को चलाता है?
कौन चलाता है? आदेश आप। जरूरत आपकी है, जरूरत में चलता है, लेकिन सब चलाने वाले आप हो — जीवात्मा। जैसी आपने आदत डाली, शरीर इंद्रियों द्वारा जैसा आपने ग्रहण किया, वैसी इच्छा आपकी बनती चली गई, और उसे वो मन इंगित करता है, मन बताता है। एरो कभी नहीं कहता कि आप क्या खोलो; आप जैसा खोल दोगे, दिखाने लगेगा। उसका काम ये नहीं है कि अच्छा या बुरा। मन ना अच्छा ना बुरा, ये दोनों से परे है; उसे मतलब ही नहीं। मतलब आपको है कि क्या अच्छा है, क्या बुरा। उसका काम है आपको इंगित करना।
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वीडियो: अंतर्मुखी कैसे हो ?अंतर्मुखी होने का रहस्य । #yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान · 2026-05-27