आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P25-0117 · भाग 25

गुरु जी, मैं समझती हूं कि मेरा शरीर है, इसलिए मुझे भूख लगी। तो ये भूख किसको लग रही है — शरीर को या जीवात्मा को?

शरीर को लग रही है, शरीर की जरूरत है। लेकिन जीवात्मा उस भूख के माध्यम से उन वस्तुओं का स्वाद ले रहा है। स्वाद की जरूरत शरीर को नहीं है। आप बताइए — आपको भोजन से पोषण है कि स्वाद से पोषण है? शरीर निमित्त है, इंद्रियां निमित्त हैं। शरीर की जरूरत है, शरीर में आप हो, इस शरीर का उपयोग कर रहे हो, लेकिन स्वाद कौन ले रहा है? जीव चाहता है स्वाद, जीव स्वाद ले रहा है। आप इन आंखों से कोई रूप का स्वाद ले रहे हो, तो क्या इन आंखों को कोई बेनिफिट है? कान को मधुर संगीत से कोई लाभ है? कान तो निमित्त है। तो जीवात्मा स्वाद में फंसी हुई है — और वो आप ही हो।

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वीडियो: अंतर्मुखी कैसे हो ?अंतर्मुखी होने का रहस्य । #yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान · 2026-05-27