प्रश्नोत्तर P25-0143 · भाग 25
गुरु जी, लोग सब बेईमानी से कमा कर बेटे को दे देते हैं और कहते हैं अब मुझे कुछ नहीं चाहिए — क्या ये उनकी चालाकी है?
वो तो परेशान ही है — सारी जिंदगी परेशान था, अभी परेशान है, और मरेगा भी परेशान। जितना धन है दबा दिया, और फिर आकर कह रहे हैं कि मुझे कुछ नहीं चाहिए, मुझे आत्मज्ञान चाहिए, परमात्मा से मिलना है। माल कहां है? "माल तो बच्चों को दे दिया, माल तो हमने लिया ही नहीं" — तो दुनिया देती किसको है? अपने को! समाज को दे दिए होते, समाज में बांट दिए होते। इसमें भी चालाकी है कि बच्चे भोगें, मुझे छोड़ दो — लेकिन बच्चे नहीं भोगेंगे, बच्चे तो अपने कर्म का भोगेंगे; बाप को भोगना पड़ेगा। बच्चे भी अगर बेईमानी से जिएंगे तो वो भी भोगेंगे; अगर उस पैसे का उन्होंने सदुपयोग किया तो वो नहीं भोगेंगे।
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वीडियो: समय बीत जाने के बाद समझ क्यों आती है ?#yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान #प्रत्यक्षज्ञान · 2026-06-15