प्रश्नोत्तर P25-0144 · भाग 25
गुरु जी, अगर बेईमानी का पैसा बच्चों के पास जाएगा, तो वो तो सत्कर्म कर ही नहीं पाएंगे, क्योंकि पैसा बेईमानी का है?
नहीं, पैसा बेईमानी का है लेकिन बेईमान हट चुका है — अब वो पैसा उनका हो गया। पैसा जिसके पास गया, जैसा वो है वैसा बन जाता है। जैसे पानी जिस पात्र में डालो उस पात्र में समा जाता है, वैसे पैसा जिसके हाथ में गया वैसा तुरंत हो गया। बेईमान ने ईमानदार को दिन भर के काम की मजदूरी दे दी, तो वही पैसा अशुद्ध से शुद्ध हो गया। पैसा घूमता रहता है, ना शुद्ध है ना अशुद्ध — मतलब ये कि आपके पास आया कैसे। प्रह्लाद को भी बेईमानी की रोटी खिलाई थी, लेकिन प्रह्लाद परम भक्त हो गए। 18 तक ज्यादातर अबोधता ही रहती है; समझने लायक हुए, कर्म का सिद्धांत पता चला, उसके बाद भी अगर बाप-मां का साथ दिए तो वो भी भ्रष्ट हो रहे थे। लेकिन जब समझ में आया और उन्होंने तुरंत साथ छोड़ दिया, तो एक परसेंट भी नहीं भोगेंगे।
सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें
वीडियो: समय बीत जाने के बाद समझ क्यों आती है ?#yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान #प्रत्यक्षज्ञान · 2026-06-15