प्रश्नोत्तर P25-0192 · भाग 25
कोई भी अनुभव और आत्मानुभूति — क्या दोनों से परे उठना है?
दोनों से परे उठना है, अपने आप में। तभी स्थिर हो पाओगे, जब सारे अनुभव से परे उठ जाओगे, अनुभूति की भी इच्छा नहीं रहेगी, जब कोई भी कामना नहीं रहेगी — तब जाके उस परम सत्य में स्थिर हो पाओगे। अगर कोई भी कामना है, चाहे अनुभव का हो, चाहे आत्मानुभूति का हो, तो फिर आप ऐसे भटकते रहोगे।
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