प्रश्नोत्तर P26-0026 · भाग 26
गुरु जी, जातिवाद और जाति के नाम पर अत्याचार, भेदभाव को कैसे खत्म करें?
कोई बात नहीं, आप मत करो। आप में नहीं होना चाहिए। अगर आप ऐसा जियोगे, भेदभाव नहीं रखोगे, तो धीरे-धीरे उसका असर पड़ेगा। ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र — जितने भी जीव हैं, सबके अंदर हैं। जब कोई मां अपने बच्चे को जन्म देती है और उसके मल को साफ करती है, उस समय वह शूद्र होती है। फिर उसके भोजन की व्यवस्था करती है, उस समय वह वैश्य होती है। फिर उसकी रक्षा करती है, उस समय क्षत्रिय होती है। और आखिरी में ज्ञान देकर उसे समाज में छोड़ देती है, उस समय वह ब्राह्मण होती है। तो चार वर्ण प्रकृति के हर जीव में हैं। जिसने चारों वर्ण पूर्णतः, बिना भेदभाव के अपना लिए, वह महात्मा हो जाएगा, महान आत्मा हो जाएगा।
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