आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P26-0058 · भाग 26

गुरु जी, चिंतन के लिए कुछ भरोसा नहीं, तो क्या सीधा आत्म-स्थिति में टिक जाएं? आत्म-चिंतन कैसे करें?

इस पर तो कल बात हो चुकी है। एक प्रश्न को एक बार में क्लियर करो, उसको फिर दोबारा रिपीट मत करो। कल तुझे बताया ना — जब तुझे लग रहा है कि सब कुछ मेरा छूट गया है, तो बस यह आत्मचिंतन कर कि मेरी स्थिति में मैं क्यों स्थिर नहीं हो पा रहा हूं। वो कमी तू देख और उस कमी को हटा। यही आत्मिक चिंतन है। अगर सब हो ही गया है तो कहीं ना कहीं तो कोई कमी बची है, जो मैं देख नहीं पा रहा हूं; कमी नहीं बची होती तो मेरी स्थिति होती। तो उसे सूक्ष्म तरीके से देख। यही आत्मिक चिंतन है। एक प्रश्न को हमें एक ही बार में क्लियर कर लेना चाहिए — क्योंकि अगर आप उस समय पूरा नहीं करते, तो हो सकता है आपका शरीर छूट जाए या जवाब देने वाला चला जाए, फिर आपका संशय मिटेगा नहीं, और आप वही प्रश्न लेकर फिर पैदा होंगे। जब तक यह प्रश्न है, तब तक आप अपनी स्थिति में, स्व में स्थिर नहीं हो पाएंगे।

सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें

वीडियो: 36 रात अपनों की कुटिया हरियाणा यमुना तट #योगी · 2026-10-29